
जयपुर, 11 फरवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने रोडवेज से रिटायर कर्मचारी को बकाया भुगतान से जुडे मामले में कहा है कि आर्थिक हालात का बहाना बनाकर रोडवेज बकाया भुगतान से इनकार नहीं कर सकती है। रोडवेज को अपने वित्तीय प्रबंधन को सुधारना चाहिए, लेकिन खराब प्रबंधन का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने प्रकरण को लेकर लोक अदालत में तय किए गए ब्याज सहित याचिकाकर्ता को बकाया भुगतान करने को कहा है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश मोहन सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने कहा कि यदि रोडवेज अपने कुप्रबंधन को लेकर सतर्क है तो उसे पहले अपने प्रशासनिक कार्यो पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए कदम उठाने चाहिए। अदालत ने कहा कि चालक, परिचालक तथा अन्य कर्मचारी रोडवेज की रीढ हैं, जो सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बनाए हुए हैं।
याचिका में अधिवक्ता सुनील समदडिया ने अदालत को बताया कि याचिकार्ता ने अप्रैल, 2014 में रोडवेज से वीआरएस लिया था। वहीं साल 1998 से साल 2011 के बीच साप्ताहिक अवकाश सहित ओवर टाइम आदि के बकाया भुगतान को लेकर मामला राष्ट्रीय लोक अदालत में गया। लोक अदालत ने 12 दिसंबर, 2015 को दोनों पक्षों में समझौता कराते हुए छह फीसदी ब्याज सहित नौ माह में बकाया भुगतान करने को कहा। इसके बाद भी उसे पूरा भुगतान नहीं किया गया। वहीं रोडवेज की ओर से कहा गया कि साल 2021 के परिपत्र के तहत निगम की वित्तीय स्थिति को देखते हुए उपलब्ध बजट के आधार पर भुगतान की प्राथमिकताएं तय की गई हैं। जिसके कारण कुछ भुगतान लंबित रह जाते हैं। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने कहा कि रोडवेज वित्तीय हालत के चलते रिटायर कर्मचारी का बकाया भुगतान नहीं रोक सकता। इसके साथ ही अदालत ने रोडवेज को बकाया भुगतान करने को कहा है।
