राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ट्रांसजेंडरों के गरिमा गृह का शिलान्यास किया

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बस्ती, 10 फ़रवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को बस्ती जिले में ट्रांसजेंडरों के लिए गरिमा गृह का शिलान्यास किया। वह लखनऊ से राजकीय हेलीकाप्टर से सुबह 9:50 बजे पुलिस लाइन के हेलीपैड स्थल पर पहुंची। वहां से वह कार से कार्यक्रम स्थल रैनबो हाउस लैबुड़वा ताल आईं। करीब 11 बजे उन्होंने ट्रांसजेंडर सुमदाय एवं समाज विषयक संवाद स्थापित किया।

माधव प्रसाद के सवाल पर राज्यपाल ने कहा कि मां के गर्भ से ही ट्रांसजेंडर का जन्म होता है। यह कमाई का साधन नहीं है। वह घर-घर बच्चों का जन्म होता है तो बधाई देती हैं। ऐसे बच्चों को घर में रखें जो भी थर्ड जेंडर हो, विदेशों में नहीं है। फिर यहां क्यों नहीं रखा जाता है। बस्ती में अच्छा कार्य शुरू हुआ है। मैं चाहती हूं कि कोई बच्चा ट्रांसजेंडर जन्म लेता है तो घर में रखें। पड़ोस वाले टीका टिप्पणी न करें। यह पुण्य का कार्य है। हमारी परीक्षा करने के लिए ऐसे बच्चे घर में आते हैं।

उन्होंने कहा कि मैं ट्रांसजेंडर को यही कहना चाहती हूं कि अपने बूते पर आगे बढ़े। पढ़ें आगे बढ़ें। समाज आपको स्वीकारने के लिए तैयार है। इसकी शुरुआत बस्ती से हुई है। आसपास के लोग मदद करें। अपने घरों में बुलाएं, उन्हें सम्मान दें।

आशा दुबे ने पूछा कि अक्सर भेदभाव की शुरुआत परिवार से होती है, कैसे बचें। इस पर राज्यपाल ने कहा कि खुद पालन पोषण करना चाहिए। कई लोग पालन पोषण करते हैं। लेकिन जो बाहर निकाल दिए जाते हैं, उन्हें पंजीकरण कराया जाता है। उन्होंने कहा कि अक्सर पड़ोस के ताने से हम घरों से ऐसे जन्म लेने वाले बच्चों को निकाल देते हैं। ऐसा न करें।

इंद्रा चैरिटेबल ट्रस्ट के अजय पांडेय इस दिशा में अच्छा काम कर रहे हैं। कई लोगों ने अपने होटल में काम पर रखे हैं। कुछ लोग गोशाला में काम कर रहे हैं। इज्जत से काम करने पर सम्मान मिलता है। बस्ती के इस शुरुआत में आप लोग आएं। उन्हें सिलाई मशीन दें। उन्हें सीख दें। काम करना ट्रांसजेंडर चाहते हैं, लेकिन काम न मिलने से वह मांग कर अपना गुजरना करना पड़ता है।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सोचा और इस दिशा में अच्छा प्रयास लिया। कसीस मुंबई महराष्ट्र ने कहा कि समाज हमें अपनाने से क्यों अलग करता है। इस पर राज्यपाल ने कहा कि महाराष्ट्र में जन्म लेने वाले इस ट्रांसजेंडर को सम्मान बस्ती में मिला तो यहां जीवन ठीक से चलने लगा। ऐसे ट्रांसजेंडर जो अपने घरों में जाना चाहता है, वह भी जा सकता है।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि लोग टीवी सीरियल देखते हैं। न्यूज नहीं देखते है, इस कारण से ट्रांसजेंडर पर उनका ध्यान नहीं जाता। कोई व्यक्ति ऐसे समाज के लिए काम करे यह बड़ी बात है। सरकार बजट से स्कूल देती है, स्कूल चलाती है, लेकिन ट्रांसजेंडर को लाभ नहीं मिल पाती है। यह बात जब नरेन्द्र भाई मोदी ने देखा और समझा तो नीतियां बनाकर बजट की व्यवस्था की। गरिमा को घर और समाज में से सम्मान मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पत्नी रहते हुए दूसरे को रखना। बच्चा पैदा करके छोड़ देते हैं। कई ऐसे हैं, जो पढ़ाई की उम्र में प्रेग्नेंट हो जाते हैं। बेटी पहले समय से आती थी। बेटियों पर ध्यान क्यों नहीं रखते। हम भरोसा रखते हैं, पर बच्चे भटक जा रहे हैं। यह किसका दोष है बताओ। हमारे घरों से भागने वाले 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे भागकर बच्चे पैदा कर रहे हैं। यह समाज का चित्र ठीक नहीं है।

राज्यपाल ने कहा कि इस समाज के लिए मैं 50 साल से काम करती हूं। अपने घरों में बेटे और बेटियों को समझाएं की वह कोई गलत कार्य न करें। उन पर नजर रखें। ऐसे भागने वाले बच्चों पर घर वालों से लेकर पुलिस परेशान होती हैं। जिन बच्चों ने नजायज जन्म लिया है, उन्हें सरकार पाल रही है, लेकिन समाज को सोचना होगा कि यह स्थिति सामने क्यों आ रही है।

ट्रांसजेंडर से कहना चाहती हूं कि ऐसे बच्चे पढ़े। उनके लिए क्लास की व्यवस्था की गई है। कम से कम ग्रेजुएट की शिक्षा दिलाएं और नौकरी भी लें। पुलिस में भी भर्ती होगी। अनपढ़ न रहें।

अजय पांडेय को बोला है कि अनपढ़ को काम पर लगवाएं और उसके रुचि के अनुसार रखें। एक जिला से जब यह अभियान चलेगा तो दूसरे के जिलों में भी जाएगा।

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