गांव से निकल कर शहर में पैर पसारता नमकीन उद्योग

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काशीवासियाें को पसंद देशी स्वाद

वाराणसी, 05 फरवरी (हि. स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी के चोलापुर, लोहता, राजातालाब जैसे ग्रामीण क्षेत्र में घरेलू महिलाओं के समूह द्वारा खुलता नमकीन बनाया जाता है। जिसकी शहर के दुकानों पर बिक्री की जाती है। गांव से निकल कर शहर में पैर पसारता नमकीन उद्योग बहुत सारे परिवारों को रोजगार दे रहा है तो नमकीन का देशी स्वाद काशीवासी की पहली पसंद बन चुका हैं।

बड़ी कंपनियों के पैकेट बंद नमकीन के मुकाबले छोटे समूह की महिलाओं या लोगों के हाथ से बनने वाला दाल, मूंगफली, मसाले और अन्य सामग्री से मिश्रित नमकीन का देशी स्वाद लोगों को खासा पसंद आता है। जिसकी कीमत बाजार में तीन सौ से चार सौ रुपए के बीच होती है। वहीं, लागत मूल्य दो सौ से लेकर तीन सौ रुपए ही होते हैं।

राजातालाब में नमकीन का व्यापार करने वाले संजय ने बताया कि नमकीन उद्योग से जुड़े लोगों ने गांव-गांव सफलता प्राप्त की, इसके बाद शहर में अब तेजी से बाजार पर गांव का यह उद्योग अपना प्रभाव बना रहा है। वह होलसेल में शहर की दुकानों को नमकीन सप्लाई करते हैं। प्रति किलो की दर से उनकी सात प्रकार की नमकीन बाजार में जाती है। इसके अलावा पापड़ की भी पांच वैरायटी वह बेचते हैं।

शहरी क्षेत्र धूपचंडी में चित्रकूट मैदान के सामने नमकीन बेचने वाले राजेश ने बताया कि प्रतिदिन उनकी दुकान पर नमकीन खरीदने वाले ग्राहक आते हैं। ग्राहकों को चटपटी मूंगफली नमकीन, रहर दाल मसाला नमकीन, खट्टी मीठी नमकीन और तीखी बेसन भुजिया बेहद पसंद आती है। उनकी दुकान पर शहर के कई जगह से लोग नमकीन खरीदने आते हैं।

महमूरगंज क्षेत्र में नमकीन की दुकान पर पहुंचे ग्राहक पवन कुमार सिंह ने कहा कि बनारस के लोगों को सुस्ती मिटाने के लिए चाय पीने की आदत है और चाय के साथ नमकीन मिल जाए तो क्या बात है। आने वाले त्योहार होली को देखते हुए वह तीन प्रकार की नमकीन खरीद कर ले जा रहे हैं। बाजार की कंपनियों के मुकाबले खुलती नमकीन ज्यादा चटपटी और खाने में स्वादिष्ट होती है।

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