वित्त मंत्री ने 53.47 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट किया पेश

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जानिए एक-एक रुपये का हिसाब

नई दिल्‍ली, 01 फरवरी (हि.स)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में वित्‍त वर्ष 2026-27 के लिए 53.47 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का केंद्रीय बजट पेश किया। निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) का 4.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 53,47,315 करोड़ रुपये खर्च का बजट पेश किया है। पिछला बजट का प्रावधान 50,65,345 करोड़ रुपये का था, जिसे संशोधित अनुमान में 1,00,503 करोड़ रुपये घटाकर 49,64,842 करोड़ रुपये किया गया है। इस तरह वित्‍त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में नए केंद्रीय बजट का आकार 7.7 फीसदी अधिक है। सीतारमण ने बताया कि केंद्रीय बजट 2026-27 के हर एक रुपये का कितना पैसा कहां से आया और कहां गया।

एक रुपये का कितना पैसा कहां से आया:-

केंद्रीय बजट 2026-27 में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक सरकार ने एक रुपये का 24 पैसा उधारी और अन्य प्रकार की देयताओं के माध्‍यम से जुटाया। इसके बाद सबसे ज्यादा राशि आयकर मद से सरकार को एक रुपये के 21 पैसे मिले। सरकार ने कंपनियों पर लगने वाले निगम कर के जरिए एक रुपये के 18 पैसे जुटाये। माल और सेवा कर (जीएसटी) और अन्य करों की वसूली से 15 पैसे से ज्‍यादा की आमदनी हुई। आंकड़ों के अनुसार सरकार को करों के अलावा अन्य स्रोतों से सरकार को एक रुपये के 10 पैसे मिले। वहीं, केंद्रीय उत्पाद शुल्क से 6 पैसे और सीमा शुल्क से 4 पैसे की आमदनी हुई। उधार के अलावा अन्य स्रोतों से पूंजीगत प्राप्ति के तहत सरकार को एक रुपये में 2 पैसा मिला।

एक रुपये का कितना पैसा कहां खर्च किया जाएगा:-

केंद्रीय बजट 2026-27 के आंकड़ों के अनुसार सरकार के पास आने वाले हर एक रुपये में से 20 पैसे ऋणों की ब्याज अदायगी में खर्च होंगे। वहीं, 22 पैसे करों और शुल्कों में राज्यों की हिस्सेदारी के तौर पर दिए जाएंगे। सरकार अपने पास आने वाले एक रुपये में से 17 पैसे केंद्रीय योजनाओं पर खर्च करेगी। 8 पैसे राज्यों में केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर खर्च होंगे। 11 पैसे रक्षा क्षेत्र में खर्च किए जाएंगे। वित्त आयोग और अन्य मदों में भी 7 पैसे खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा आर्थिक सहायता के लिए 6 पैसे, पेंशन के लिए 2 पैसे, और अन्य मदों में सरकार के हर एक रुपये से 7 पैसे खर्च करेगी।

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