छह विदेशी हस्तियों को पद्म पुरस्कार, जर्मनी, रूस, अमेरिका और जॉर्जिया की हस्तियां शामिल

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नई दिल्ली, 25 जनवरी (हि.स.)। इस साल के पद्म पुरस्कार में विदेशी, एनआरआई, पीआईओ और ओसीआई श्रेणी के कुल छह लोगों को सम्मानित किया गया है। इनमें तीन भारतीय मूल के और तीन विदेशी नागरिक शामिल हैं। इन सभी ने चिकित्सा, खेल, कला और शिक्षा के क्षेत्र में दशकों तक काम कर भारत की वैश्विक पहचान मजबूत की है। दो लोगों को पद्म भूषण और चार को पद्मश्री दिया गया है। इनमें अमेरिका के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. नोरी दत्तात्रेयुडु और टेनिस स्टार विजय अमृतराज को पद्म भूषण मिला है, जबकि जर्मनी के संगीत शोधकर्ता लार्स क्रिश्चियन कोख, रूस की भाषाविद् ल्यूडमिला खोखलोवा, अमेरिका के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट प्रतीक शर्मा और जॉर्जिया के कुश्ती प्रशिक्षक व्लादिमेर मेस्त्विरिश्विली (मरणोपरांत) को पद्मश्री से नवाजा गया है।

चिकित्सा क्षेत्र में अमेरिका में कार्यरत डॉ. नोरी दत्तात्रेयुडु को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। उन्होंने 50 साल से अधिक समय तक कैंसर के इलाज में योगदान दिया है। नौ तरह के कैंसर में उनकी विशेषज्ञता मानी जाती है और उन्होंने कई नई तकनीकें विकसित कीं। दुनिया के कई देशों में कैंसर उपचार केंद्र स्थापित कराने में भी उनकी अहम भूमिका रही है।

खेल जगत से विजय अमृतराज को पद्म भूषण मिला है। वे भारतीय टेनिस के बड़े नामों में गिने जाते हैं। उन्होंने 16 एकल खिताब जीते और डेविस कप में भारतीय टीम के कप्तान रहे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय टेनिस को पहचान दिलाने में उनका योगदान अहम माना जाता है।

चिकित्सा क्षेत्र में ही अमेरिका में कार्यरत डॉ. प्रतीक शर्मा को पद्मश्री दिया गया है। वे गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी के विशेषज्ञ हैं। पेट और आंतों से जुड़ी बीमारियों और कैंसर के निदान व इलाज में उनके काम को खास तौर पर सराहा गया है। एंडोस्कोपी और उन्नत इमेजिंग तकनीकों में उनका योगदान उल्लेखनीय है।

खेल क्षेत्र में जॉर्जिया के व्लादिमेर मेस्तविरिश्विली को मरणोपरांत पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। वे फ्रीस्टाइल कुश्ती के प्रसिद्ध कोच थे। उनकी ट्रेनिंग से सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त, बजरंग पुनिया और रवि दहिया जैसे पहलवानों ने ओलंपिक पदक जीते। भारत को कुश्ती में विश्व स्तर पर मजबूत बनाने में उनका बड़ा योगदान रहा।

कला के क्षेत्र में जर्मनी के लार्स क्रिश्चियन कोख को पद्मश्री मिला है। वे संग्रहालय विशेषज्ञ हैं और उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत पर गहरा शोध कर चुके हैं। भारतीय संगीत और वाद्य यंत्रों पर उनकी लिखी किताबों से भारतीय संस्कृति को दुनिया में पहचान मिली है।

साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में रूस की ल्यूडमिला विक्टोरोवना खोखलोवा को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। वे इंडोलॉजी की प्रमुख विद्वान हैं और पिछले 50 साल से हिंदी, पंजाबी, गुजराती और मारवाड़ी जैसी भारतीय भाषाओं पर काम कर रही हैं। उन्होंने कई किताबें, शोध पत्र और रिपोर्ट प्रकाशित की हैं।

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