
नई दिल्ली, 12 फ़रवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय में केंद्र सरकार ने लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें गिरफ्तार करने के बाद लद्दाख में हिंसा थम गई। इस मामले पर गुरुवार काे केंद्र सरकार की ओर से दलीलें पूरी कर ली गयी। जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने अब इस मामले पर सोनम वांगचुक की पत्नी की ओर से दलीलें सुनने के लिए 16 फरवरी की तिथि नियत करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) केएम नटराज ने सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को सही बताया। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद लद्दाख में हिंसा खत्म हो गई। हिंसा का खत्म होना ही बताता है कि उनकी गिरफ्तारी सही थी। एएसजी ने कहा कि सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के समय सभी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए इस कोर्ट में आने से पहले अपने कर्तव्यों पर भी ध्यान देना चाहिए।
इसके पहले 11 फरवरी को केंद्र ने कहा था कि लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य के आधार पर रिहा करना मुमकिन नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने उच्चतम न्यायालय को बताया था कि सोनम वांगचुक की अबतक कुल 24 बार स्वास्थ्य की जांच की गई है। वह फिट और तंदुरुस्त हैं। हेल्थ के आधार पर उन्हें रिहा करना मुमकिन नहीं होगा, सरकार ने इस पर बहुत सोच-विचार किया है।
इसके पहले 4 फरवरी को उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से कहा था कि उसे सोनम वांगचुक की खराब होती जा रही तबीयत को ध्यान में रखते हुए उनकी हिरासत जारी रखने के फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील को इस संबंध में निर्देश लेकर कोर्ट को सूचित करने का निर्देश दिया था।
