सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार, बजट पास करना भी जरूरीः किरेन रिजिजू

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नई दिल्ली, 27 जनवरी (हि.स.)। संसद के बुधवार से शुरू हो रहे बजट सत्र से पहले मंगलवार को बुलाई गयी सर्वदलीय बैठक में सरकार ने विपक्ष को सभी मुद्दों पर चर्चा कराने का आश्वासन दिया। साथ ही यह भी कहा कि यह बजट सत्र है और देश चलाने के लिए बजट पास करना भी अनिवार्य है।

संसद भवन के मुख्य समिति कक्ष में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पत्रकारों से कहा, “संसदीय लोकतंत्र में सभी सांसदों का कर्तव्य है कि वे जनता की बात रखें और साथ ही एक-दूसरे की बात भी सुनें। सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन यह बजट सत्र है और देश चलाने के लिए बजट पास करना अनिवार्य है।”

रिजिजू ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और बजट चर्चा के दौरान सदस्य विभिन्न विषय उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने कभी नियमों और संविधान की अनदेखी नहीं की और संसद का संचालन पूरी तरह संविधान के अनुरूप ही होता है।

यूजीसी के नए दिशानिर्देशों को लेकर विपक्ष द्वारा मुद्दा उठाए जाने के सवाल पर रिजिजू ने कहा कि सरकार किसी एक विषय तक सीमित नहीं रहना चाहती, लेकिन बजट सत्र का मुख्य फोकस बजट पर चर्चा और उसे पारित करना ही रहेगा। सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने भी अपनी-अपनी मांगें और मुद्दे सामने रखे।

बैठक के बाद द्रविण मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के सांसद टीआर बालू ने कहा, “हमने सर्वदलीय बैठक में तमिलनाडु के मछुआरों के मुद्दे, होसुर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को मंज़ूरी न मिलना, कच्चाथीवू को वापस लेने, अमेरिका के टैरिफ, मदुरै और कोयंबटूर मेट्रो प्रोजेक्ट जैसे मुद्दे उठाए।”

तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के संसदीय दल के नेता लवु श्रीकृष्ण देवरायलु ने आंध्र प्रदेश से जुड़े अमरावती राजधानी विधेयक का मुद्दा उठाते हुए न्याय की मांग की। उन्होंने जल जीवन मिशन की राशि के उपयोग और रायलसीमा को बागवानी हब के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने कहा कि पार्टी ने सरकार से जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग की है। उन्होंने केरल में रेलवे परियोजनाओं, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना और कुछ योजनाओं को वापस लेने की मांग रखी।

तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने पश्चिम बंगाल में चल रही एसआईआर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे संसद में चर्चा के लिए उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल हैं और इससे जुड़ी कथित अनियमितताओं पर संसद में बहस होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष शासित राज्यों के लिए केंद्रीय धन रोका जा रहा है और केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।

बैठक में विपक्षी दलों ने एक स्वर में कहा कि संसद एकतरफा नहीं हो सकती और विपक्ष को भी अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने संसद की गरिमा बनाए रखने और विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया।

बैठक में राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू, संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल और सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री डॉ. एल मुरुगन, कांग्रेस नेता जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी, द्रमुक नेता तिरुचि शिवा, तृणमूल कांग्रेस के नेता सागरिका घोष और समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव समेत कई अन्य नेता भी बैठक में शामिल रहे। उल्लेखनीय है कि संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर 02 अप्रैल तक चलेगा। केंद्रीय बजट एक फरवरी, रविवार को पेश किया जाएगा।

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