राहुल गांधी ने लोकसभा में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को बताया समर्पण

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नई दिल्ली, 11 फ़रवरी (हि.स.)। लोकसभा में बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को केंद्र सरकार का ट्रंप प्रशासन के आगे समर्पण करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने इस डील में भारतीय डेटा, किसानों की सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता अमेरिका के हवाले कर दिया।

राहुल गांधी ने लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान कहा कि दुनिया स्थिरता से अस्थिरता की ओर बढ़ रही है। यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष, मिडिल ईस्ट में तनाव और ईरान के साथ युद्ध की आशंका ने माहौल को खतरनाक बना दिया है। आर्थिक सर्वेक्षण में सरकार खुद मानती है कि अमेरिका-केंद्रित पुराना बहुध्रुवीय सिस्टम टूट रहा है। डॉलर का वर्चस्व चुनौती का सामना कर रहा है, चीन और रूस जैसी ताकतें इसे चुनौती दे रही हैं। ऊर्जा और वित्त को हथियार बनाया जा रहा है। डॉलर कमजोर हो रहा है और सोना-चांदी की कीमतें बढ़ रही हैं। एनएसए ने कुछ समय पहले कहा था कि युद्ध का दौर खत्म हो गया है लेकिन अब हम युद्ध के दौर में प्रवेश कर चुके हैं।

उन्होंने भारत की तीन सबसे बड़ी ताकतें गिनाते हुए कहा कि हमारी पहली ताकत है हमारे 1.4 अरब लोग जो ऊर्जावान और प्रतिभाशाली हैं। दूसरी ताकत है इनसे बनने वाला विशाल डेटा पूल। 21वीं सदी में जनसंख्या बोझ नहीं बल्कि सबसे बड़ा संसाधन है क्योंकि लोग डेटा बनाते हैं और डेटा ही एआई का ईंधन है। भारत का डेटा पूल दुनिया में सबसे बड़ा और सबसे विविध है। तीसरी ताकत है हमारे किसान और मजदूर जो खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। ऐसे तूफानी दौर में इन तीन चीजों को बचाना सबसे जरूरी है। लोग और उनका डेटा, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा प्रणाली।

उन्होंने कहा कि एआई का दौर आ रहा है और इसके खतरनाक परिणाम होंगे। भारतीय आईटी उद्योग और लाखों सॉफ्टवेयर इंजीनियर खतरे में पड़ सकते हैं। एआई कई नौकरियों को खत्म कर देगा। ऐसे समय में सरकार को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए था लेकिन बजट में इनमें से किसी पर ठोस प्रावधान नहीं है।

राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर कहा कि फरवरी 2026 में ट्रंप और मोदी की बातचीत के बाद यह डील घोषित हुई। अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ घटाया लेकिन बदले में भारत ने कई शर्तें मान लीं। असली लड़ाई भारतीय डेटा के लिए है और सरकार ने इसे बिना सुरक्षा के अमेरिका को सौंप दिया। डिजिटल ट्रेड नियमों पर नियंत्रण छोड़ दिया गया, डेटा लोकलाइजेशन की जरूरत खत्म कर दी गई, अमेरिकी कंपनियों को मुक्त डेटा प्रवाह और 20 साल का कर छूट (टैक्स हॉलीडे) घोषित दिया गया।

राहुल ने कहा कि भारतीय टैरिफ औसतन 3 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया जबकि अमेरिकी टैरिफ 16 प्रतिशत से शून्य हो गया। इससे टेक्सटाइल उद्योग पर संकट है, गुड़गांव की फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं और किसानों पर खतरा मंडरा रहा है। अमेरिकी बड़े फार्म्स से सस्ता मक्का, सोयाबीन और कपास आएगा और हमारे गरीब किसान कुचल जाएंगे। ऊर्जा सुरक्षा भी खत्म हो गई है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अब अमेरिका तय करेगा कि भारत, रूस या ईरान से तेल खरीद सकता है या नहीं।

राहुल ने डील को एकतरफा करार देते हुए कहा कि डेटा, किसान, ऊर्जा, युवा, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, छोटे उद्योग सबकुछ खत्म हो जाएगा।उन्होंने मांग की कि डील की पूरी जानकारी सदन में रखी जाए। भारत को पाकिस्तान के बराबर नहीं रखा जाना चाहिए।

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