मोहन भागवत ने वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में किए दर्शन

धर्म

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बच्चों को वितरित किया मध्याह्न भोजन

मथुरा, 10 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को वृंदावन स्थित चंद्रोदय मंदिर में दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर समाज के कल्याण की मंगलकामना की। मंदिर परिसर में उन्होंने स्कूली बच्चों को स्वयं मध्याह्न भोजन प्रसाद भी वितरित किया।

चंद्रोदय मंदिर में उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) के संस्थापकाचार्य अभय चरणारविंद भक्तिवेदांत श्रील प्रभुपाद का संपूर्ण जीवन मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि श्रील प्रभुपाद ने भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और भगवद्गीता के सार्वभौमिक संदेश को विश्वभर में पहुंचाकर मानव समाज को नई दिशा प्रदान की।

इस अवसर पर मोहन भागवत ने अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा पोषित विद्यालय के छात्रों को प्रतीकात्मक रूप से मध्याह्न भोजन प्रसाद वितरित किया। उन्होंने बच्चों से संवाद करते हुए शिक्षा, संस्कार और सेवा के महत्व पर बल दिया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मोहन भागवत ने कहा कि संघ और चंद्रोदय मंदिर से जुड़े भक्तों का उद्देश्य केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, संस्कारयुक्त शिक्षा, सेवा और सामाजिक समरसता के माध्यम से भारत को पुनः विश्व के आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

चंद्रोदय मंदिर के जनसंपर्क प्रमुख भरतर्षभा दास ने बताया कि दर्शन के उपरांत मोहन भागवत ने श्रील प्रभुपाद के विग्रह पर पुष्पार्चन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान चंद्रोदय मंदिर के चेयरमैन मधु पंडित दास और अध्यक्ष चंचलापति दास ने उन्हें श्रील प्रभुपाद द्वारा रचित भगवद्गीता यथारूप के विभिन्न संस्करणों का अवलोकन कराया, जो अनेक भाषाओं में प्रकाशित हैं।

इसके साथ ही संघ प्रमुख ने निर्माणाधीन वृंदावन चंद्रोदय मंदिर के प्रतिरूप (मॉडल) का भी अवलोकन किया। अध्यक्ष चंचलापति दास ने मंदिर की भव्य वास्तुकला, अद्वितीय संरचना और इसके आध्यात्मिक उद्देश्य के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चंद्रोदय मंदिर का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करना तथा युवाओं को नैतिकता, सेवा और भक्ति के मार्ग पर प्रेरित करना है।

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