बेलडांगा हिंसा मामले में आरोपितों के पेश न होने पर एनआईए ने राज्य पुलिस पर उठाए सवाल

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कोलकाता, 05 फरवरी (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में हुई हिंसा मामले में गुरुवार को आरोपितों को कोलकाता के बैंकशाल कोर्ट में पेश नहीं किया जा सका। इस पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने राज्य पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। एनआईए ने अदालत को बताया कि अब तक उन्हें केस डायरी भी नहीं सौंपी गई है।

सुनवाई के दौरान एनआईए के वकील ने बताया कि आरोपित फिलहाल मुर्शिदाबाद जेल में हैं, लेकिन पर्याप्त पुलिस एस्कॉर्ट नहीं मिलने के कारण उन्हें अदालत में पेश नहीं किया जा सका। जेल सुपर ने जानकारी दी कि पुलिस सुपरिंटेंडेंट वाहन और सुरक्षा व्यवस्था नहीं करा सके, जिसके चलते आरोपितों को कोलकाता नहीं लाया जा सका।

एनआईए ने अदालत को यह भी बताया कि जेल को पहले ही सुरक्षा व्यवस्था के साथ आरोपितों को पेश करने की सूचना दी गई थी। जेल प्रशासन ने राज्य पुलिस से एस्कॉर्ट मांगा था, लेकिन सहयोग नहीं मिला। एजेंसी का कहना है कि जांच अधिकारी केस डायरी के बिना जांच आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं।

इस पर न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि क्या स्थानीय पुलिस के असहयोग के कारण आरोपितों को पेश नहीं किया जा सका। एनआईए ने इस पर सहमति जताई। इसके बाद अदालत ने आदेश दिया कि 12 फरवरी को आरोपितों को हर हाल में अदालत में पेश किया जाए। साथ ही राज्य पुलिस के जांच अधिकारी को उस दिन सशरीर अदालत में उपस्थित होकर कारण बताना होगा। मुर्शिदाबाद के पुलिस अधीक्षक को भी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

आरोपितों के वकील फाजिल अहमद खान ने कहा कि वे आरोपितों को सशरीर अदालत में पेश किए जाने की मांग कर रहे थे। उनका आरोप है कि बेलडांगा पुलिस हिरासत में आरोपितों के साथ अत्याचार किया गया है। उन्होंने कहा कि आरोपितों को पेश न किए जाने के कारण वे अदालत में अपनी बात पूरी तरह नहीं रख सके।

उल्लेखनीय है कि, झारखंड में मुर्शिदाबाद के प्रवासी मजदूर अलाउद्दीन शेख की मौत के बाद 16 जनवरी को बेलडांगा में हिंसा भड़क उठी थी। शव के पहुंचते ही लोगों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। आरोप लगाया गया कि बांग्ला भाषी होने के कारण अलाउद्दीन को बांग्लादेशी समझकर हत्या की गई, हालांकि झारखंड पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए इसे आत्महत्या बताया था। प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किया गया, टायर जलाए गए और सियालदह–लालगोला रेल सेवा बाधित हुई। इस हिंसा में एक महिला पत्रकार भी घायल हुई थीं।

उच्च न्यायालय ने पहले ही स्पष्ट किया था कि यदि केंद्र सरकार चाहे तो बेलडांगा हिंसा की जांच एनआईए को सौंपी जा सकती है। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी।

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