पद्मश्री सत्येंद्र सिंह लोहिया ने रचा इतिहास

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कुक स्ट्रेट पार करने वाले एशिया के पहले दिव्यांग तैराक बने

भोपाल, 12 फरवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के गौरव, पद्मश्री से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग तैराक सत्येंद्र सिंह लोहिया ने गुरुवार को विश्व की सबसे कठिन समुद्री तैराकियों में से एक न्यूजीलैंड के कुक स्ट्रेट (Cook Strait) को सफलतापूर्वक पार कर इतिहास रच दिया है। वे इस चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्ग को पार करने वाले एशिया के पहले दिव्यांग तैराक बन गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय तैराक सत्येंद्र सिंह लोहिया 18 जनवरी 2026 से न्यूज़ीलैंड में इस अभियान की तैयारी कर रहे थे और लगातार ठंडे पानी में कठिन अभ्यास व अक्लिमेटाइजेशन कर रहे थे। गत 28 जनवरी को उनका पहला प्रयास खराब मौसम के कारण रोकना पड़ा था। उन्होंने हार नहीं मानी और पुनः तैयारी कर निर्धारित आज 12 फरवरी को अदम्य साहस और आत्मविश्वास के साथ चुनौती स्वीकार की। तैराकी के दौरान उन्हें अत्यंत ठंडे पानी, तेज़ समुद्री धाराओं और प्रतिकूल मौसम जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, फिर भी उन्होंने दृढ़ संकल्प के बल पर लक्ष्य हासिल किया। 70 प्रतिशत दिव्यांग और व्हीलचेयर बाउंड होने के बावजूद उनकी यह उपलब्धि अदम्य इच्छाशक्ति और संघर्ष की मिसाल बन गई है।

लोहिया ने सोशल मीडिया पर उक्त जानकारी साझा करते हुए लिखा कि आज अत्यंत हर्ष और गर्व के साथ आप सभी को सूचित कर रहा हूँ कि मैंने विश्व की सबसे कठिन समुद्री तैराकियों में से एक न्यूजीलैंड का कुक स्ट्रेट (Cook Strait) 12 फरवरी, 2026 को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। उन्होंने सुबह 10:00 बजे अत्यंत ठंडे पानी, तेज धाराएँ और प्रतिकूल मौसम में अपनी तैराकी शुरू की। इन सभी चुनौतियों के बावजूद एक महीने की कठिन कोल्ड वॉटर प्रैक्टिस और अक्लिमेटाइजेशन के बाद दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ मैंने यह ऐतिहासिक तैराकी पूरी की। मुझे गर्व है कि मैं एशिया का पहला दिव्यांग तैराक बन गया हूँ, जिसने कुक स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार किया।

उन्होंने आगे कहा कि मैं 70 फीसदी दिव्यांग और व्हीलचेयर बाउंड हूँ। यदि मैं यह कर सकता हूँ, तो कोई भी अपने जीवन की किसी भी चुनौती को पार कर सकता है। असंभव कुछ भी नहीं, केवल संकल्प, साहस और निरंतर प्रयास चाहिए। तैराक लोहिया ने अपनी सफलता का श्रेय न्यूजीलैंड के अपने तैराक साथियों, पायलट फिलिप्स तथा सहयोगी मुजीब खान को दिया, जिन्होंने पूरे प्रशिक्षण और प्रयास के दौरान उनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश और पूरे भारत की विजय है। यह विजय संदेश देती है कि संकल्प, साहस और निरंतर प्रयास से कोई भी असंभव लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।——————

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