धार्मिक स्थलों में भक्तों के लिए सुरक्षा और संसाधन मुहैया कराए-मानवाधिकार आयोग

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जयपुर, 10 फ़रवरी (हि.स.)। राज्य मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि धार्मिक स्थलों पर लाखों की संख्या में आने वालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इनकी अनदेखी से ही पूर्व में विभिन्न मंदिरों और दरगाहों में अव्यवस्थाओं के चलते, भगदड़ जैसी दुखद घटनाओं में दर्शनार्थियों ने अपनी जान खोयी है और कई घायल भी हुए हैं। ऐसे में देवस्थान विभाग और मुख्य धार्मिक स्थलों से संचालक मंडलों से आयोग अपेक्षा करता है कि वे धार्मिक स्थलों में उचित संसाधन सुनिश्चित करें। आयोग अध्यक्ष जस्टिस जीआर मूलचंदानी ने यह आदेश प्रकरण में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेते हुए दिए। आयोग ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर पीने के पानी, छाया, बैठने के लिए स्थान, वृद्ध, बीमार और महिलाओं के लिए अलग पंक्ति के साथ ही सुलभ दर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही आयोग ने देवस्थान आयुक्त को कहा है कि वे धार्मिक स्थलों में इन सुविधाओं को लेकर आयोग में रिपोर्ट पेश करें। आयोग ने मामले में प्रदेश में प्रमुख मंदिरों के प्रबंधकों के साथ ही सभी संभागीय आयुक्त, जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किए हैं।

आयोग ने रामदेवरा, श्रीनाथजी, सांवरिया सेठ, खाटू श्याम जी, मेहंदीपुर बालाजी, गोविन्द देवजी, सालासर बालाजी, बेणेश्वर धाम, चौथ माता, मोती डूंगरी, एकेश्वर, गलता, गोवर्धन जी, जोधपुर का रामदेवरा, पाल के बालाजी, संतोषी माता, रातानाडा गणेश मंदिर और अजमेर दरगाह के साथ ही किलों में स्थित माताजी के मंदिर साल में कई बार मेले भरते हैं। जिसके लाखों की संख्या में भक्त आते हैं। असंख्य जनसमूह के एकत्र होने पर भगदड जैसी घटनाएं भी हुई हैं। ऐसे में जरूरी है कि इन धार्मिक स्थलों में जरूरी व्यवस्था करने की जिम्मेदारी वहां के संचालन मंडल की है। ऐसे में यहां पर्याप्त व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही आयोग ने मामले की सुनवाई 12 मार्च को तय की है।

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