तिरुप्परंगुन्न्तरम पहाड़ पर दीपक जलाने का आदेश बरकरार, तमिलनाडु सरकार की अपील खारिज

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मदुरै, 06 जनवरी (हि.स.)। मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने तिरुप्परंगुन्न्तरम पहाड़ की चोटी पर दीपक जलाने से जुड़े एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति जयचंद्रन और न्यायमूर्ति के.के. रामकृष्णन की द्विसदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन का पूर्व आदेश पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए।

तमिलनाडु सरकार ने न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन के फैसले को चुनौती देते हुए दो न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष अपील दायर की थी। सुनवाई के बाद अदालत ने सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि दीपक जलाने से कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने का तर्क निराधार है।

अदालत ने अपने फैसले में मदुरै जिला प्रशासन पर भी कड़ी टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि जिला प्रशासन दो पक्षों के बीच अनावश्यक विवाद पैदा करने की भूमिका निभा रहा है। न्यायालय ने यह भी कहा कि सरकार का यह दावा कि कानून-व्यवस्था की समस्या के कारण पहाड़ की चोटी पर दीपक नहीं जलाया जा सकता, तर्कहीन है और इससे “हँसी उड़ाने” जैसा रवैया झलकता है।

पीठ ने स्पष्ट किया कि हर वर्ष कार्तिक मास में तिरुप्परंगुन्न्तरम पहाड़ की चोटी पर दीपक जलाया जाना चाहिए। जब पहाड़ की चोटी पर दीपक जलाने की परंपरा है, तो मंदिर प्रशासन जनता को इसकी अनुमति देने से इनकार नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि मंदिर परिसर में दीपक जलाने से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका बेवजह है।

अदालत ने यह भी कहा कि तिरुप्परंगुंद्रम क्षेत्र में सार्वजनिक शांति से जुड़ी जो भी समस्याएं उत्पन्न हुई हैं, उसके लिए स्वयं सरकार जिम्मेदार है। दीपक जलाने को लेकर अव्यवस्था की आशंका जताना उचित नहीं है।

गौरतलब है कि तिरुप्परंगुंद्रम पर्वत की चोटी पर दीपक जलाने की अनुमति को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इस मामले में एकल न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन ने दीपक जलाने के पक्ष में आदेश दिया था। इसके खिलाफ तिरुप्परंगुंद्रम मंदिर के कार्यकारी अधिकारी और मदुरै के जिला कलेक्टर ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। इन अपीलों पर पिछले महीने न्यायमूर्ति जयचंद्रन और न्यायमूर्ति के.के. रामकृष्णन की पीठ ने सुनवाई की।

सभी अपीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने एकल न्यायाधीश के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि तिरुप्परंगुन्न्तरम पहाड़ की चोटी पर दीपक जलाने की परंपरा जारी रहेगी और इस पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई जा सकती।

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