
राजिम, 07 फ़रवरी (हि.स.)। राजिम कुंभ कल्प मेला में नागा साधुओं व संताें का आगमन लगातार जारी है। शनिवार काे पेशवाई के दौरान दत्तात्रेय मंदिर में अन्य नागा साधुओं के साथ में एक 13 साल के नागा साधू बैठे हुए थे। उन्होंने मीडिया काे बताया कि पिछले 4 साल से नागा साधु बना हुआ हूं मेरी उम्र 13 साल है। अर्थात 9 साल की उम्र में ही साधु संस्कृति की ओर इनका झुकाव हो गया था।
उन्हाेंने बताया कि मेरा मन लगा और साधुओं के सानिध्य में आने के चलते उनके द्वारा दिये गये ज्ञान को आत्मसात किया और सीधे नागा साधु बन गया। शिक्षा दीक्षा के बारे में पूछा तब बताया कि वह संस्कृत पढ़ते हैं। सुबह 3:00 बजे से उठ जाते हैं 4:00 बजे स्नान करने के लिए चले जाते हैं उसके बाद जप, तप, ज्ञान, माला जाप इत्यादि कृत्य में लीन रहते हैं। 9 साल की उम्र में मां-बाप का अपने बच्चों को छोड़ना बहुत मुश्किल होता है ऐसे में इस नन्हे साधु का कहना है कि मेरे माता-पिता साधु संस्कृति से प्रभावित थे, इसलिए उन्होंने रोका नहीं।
इसी तरह से यहां साधु संतों के आश्चर्य चकित करने वाले अनेक दृश्य देखे जा रहे हैं एक साधु तो 1100 रुद्राक्ष को अपने सिर पर रखे हुए हैं। दत्तात्रेय मंदिर में ही बैठे एक साधु ने बताया कि मुझे 30 बार हार्ट अटैक आ चुका है लेकिन फिर भी जिंदा हूं। जिसको राम रखेगा उसे मारेगा कौन और जिसे राम मारेगा उसे बचाएगा कौन। सब कुछ ऊपर वाले के हाथ में है। यह कुंभ पर्व भारतीय संस्कृति, संस्कार, समृद्धि एवं परंपराओं को पल्लवित कर रही है।
