
पुदुचेरी, 29 दिसंबर (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन सोमवार को पांडिचेरी विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने स्नातक छात्रों से राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी उठाने का आह्वान किया। उन्होंने छात्रों को ‘विकसित भारत 2047’ का शिल्पकार बताते हुए देश के भविष्य को गढ़ने में उनकी अहम भूमिका पर जोर दिया।
उपराष्ट्रपति ने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए स्नातक छात्रों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी उपाधियां उनके साथ समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए ज्ञान का उपयोग करने का कर्तव्य भी लाती हैं। उपराष्ट्रपति ने पुदुचेरी को सांस्कृतिक समृद्धि और आध्यात्मिक विरासत की भूमि बताते हुए सुब्रमण्यम भारती, भरथिदासन और श्री अरबिंदो जैसे महान कवियों और दूरदर्शी व्यक्तियों के अमिट प्रभाव को याद किया। उन्होंने कहा कि श्री अरबिंदो का दर्शन ज्ञान, आध्यात्मिकता और कर्म को एकीकृत करते हुए उच्च शिक्षा का मार्गदर्शन करता है।
विकसित भारत 2047 के सफर पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा व्यक्त किया गया दृष्टिकोण एक समृद्ध, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रदान करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक है, जहां रटने की पद्धति से हटकर आलोचनात्मक चिंतन, कठोर विषयों से हटकर बहुविषयक शिक्षा और परीक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण से हटकर समग्र विकास पर बल दिया गया है।

दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल कनेक्टिविटी के माध्यम से हो रहे तीव्र परिवर्तनों की ओर ध्यान दिलाते हुए उपराष्ट्रपति ने तकनीकी उत्साह और नैतिक सजगता के बीच संतुलन बनाए रखने का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने युवाओं से नशे के खिलाफ ‘ना’ कहने और अपने साथियों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की। उन्होंने अंत में छात्रों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनकी शिक्षा उन्हें अच्छा इंसान, जिम्मेदार नागरिक और सामाजिक रूप से जागरूक पेशेवर बनाए, जहां ज्ञान विनम्रता से, प्रौद्योगिकी मानवीय मूल्यों से और सफलता सामाजिक जिम्मेदारी से निर्देशित हो।
आवास परियोजना का किया उद्घाटन
इससे पहले उपराष्ट्रपति पुदुचेरी में एक नागरिक स्वागत समारोह में शामिल हुए और स्मार्ट सिटी मिशन के तहत एक आवास परियोजना का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने लाभार्थियों को 216 नवनिर्मित फ्लैटों की चाबियां सौंपी। यह समारोह उपराष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद उनकी पहली यात्रा के अवसर पर आयोजित किया गया था। इससे पहले वे पुदुचेरी के उपराज्यपाल के रूप में कार्य कर चुके थे।
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने केंद्र शासित प्रदेश को अद्वितीय सभ्यतागत, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व की भूमि बताया। उन्होंने कहा कि पुडुचेरी हमेशा से एक जीवंत सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विश्व के लिए खुला रहा है। आवास परियोजना के समय से पहले पूरा होने पर संतोष व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि घर केवल एक भौतिक ढांचा नहीं है, बल्कि परिवारों के लिए गरिमा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का स्रोत है। उपराज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने इस परियोजना की बारीकी से निगरानी की थी।


