आईआईएसईआर देश की ज्ञान-शक्ति को करेंगे सुदृढ़: धर्मेंद्र प्रधान

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नई दिल्ली, 13 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं और ये संस्थान देश की ज्ञानशक्ति को वैश्विक मंच पर और मजबूत करेंगे।

प्रधान ने यह बात यहां आईआईएसईआर की स्थायी समिति की तीसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। बैठक में देश के सभी सात आईआईएसईआर के शैक्षणिक एवं शोध कार्यों की समीक्षा की गयी और भविष्य की रणनीति पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। मंत्री ने छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने, परिणामोन्मुख और समाजोपयोगी शोध को बढ़ावा देने तथा अकादमिक एवं शोध उत्कृष्टता के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया।

बैठक को संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा कि आईआईएसईआर भारत की उच्च शिक्षा के “ताज के नगीने” हैं। उन्होंने छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे युवाओं की प्रतिभा का पूरा दोहन होगा और जीवन-स्तर को आसान बनाने तथा सामाजिक प्रगति से जुड़े परिणामोन्मुख शोध को बढ़ावा मिलेगा।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि स्थायी समिति ने अकादमिक और शोध उत्कृष्टता प्राप्त करने, छात्र अनुभव को समृद्ध करने और विश्वस्तरीय वैज्ञानिक शिक्षा एवं अनुसंधान प्रदान करने के मूल मिशन को और सशक्त बनाने के रोडमैप पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी आईआईएसईआर अकादमिक एवं शोध उत्कृष्टता की नई संस्कृति स्थापित करेंगे और ऐसे वैज्ञानिकों, नवोन्मेषकों व उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार करेंगे जो राष्ट्रीय और वैश्विक वैज्ञानिक चुनौतियों का समाधान कर सकें।

बैठक में अकादमिक लचीलापन बढ़ाने के तहत ‘आई-फ्लेक्स’ ढांचे को लागू करने, पीएचडी कार्यक्रमों में सुधार, समाजोपयोगी अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने, प्रत्येक आईआईएसईआर में शोध पार्क व इनक्यूबेटर स्थापित करने तथा विशिष्ट शोध क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्र बनाने पर सहमति बनी। इसके अलावा, उद्योग और अनुसंधान के बीच सेतु बनाने के लिए प्रत्येक आईआईएसईआर में सेक्शन-8 कंपनी स्थापित करने का निर्णय भी लिया गया।

बैठक में मेधावी छात्रों को आकर्षित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में भाग लेने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रवेश में विशेष प्रावधान, स्नातक स्तर पर खेल कोटा शुरू करने की संभावनाओं और भारतीय भाषाओं की पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों को सहयोग देने के उपायों पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम के अंत में आईआईएसईआर के 5-वर्षीय और 10-वर्षीय विज़न दस्तावेज जारी किए गए तथा शैक्षणिक, शोध और नवाचार सहयोग को मजबूत करने के लिए कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।

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