अगर मान जाते तो उत्तर प्रदेश के पहले भाजपाई मुख्यमंत्री बनते अटल बिहारी वाजपेयी

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नई दिल्ली, 25 दिसंबर (हि.स.)। कम लोगों को पता है कि 1991 में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को पहली बार पूर्ण बहुमत प्राप्त होने पर पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं का प्रस्ताव था कि अटल बिहारी वाजपेयी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें लेकिन वाजपेयी ने इसके लिए मना कर दिया और कल्याण सिंह को यह पद देने की वकालत की थी।

एक टेलीविजन चैनल के लिए निर्माणाधीन एक वृत्तचित्र में शामिल एक साक्षात्कार में उत्तर प्रदेश के कद्दावर भाजपा नेता रहे राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने इस घटना का उल्लेख किया है।

कलराज मिश्र ने वाजपेयी के व्यक्तित्व में अपने सहयोगियों को प्रोत्साहित करने की प्रव‍ृत्ति की चर्चा करते हुए कहा, “ऐसा कौन होगा जो उत्तर प्रदेश जैसे इतने बड़े राज्य का मुख्यमंत्री ना बनना चाहे।” उन्होंने कहा कि बात 1991 की है जब भाजपा को पहली बार उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ था। डॉ मुरली मनोहर जोशी राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। एक बैठक में डॉ जोशी सहित तमाम वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री के पद को लेकर चर्चा की और तय हुआ कि अटल जी को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “सभी नेता अटल जी को मुख्यमंत्री बनाये जाने के पक्ष में थे लेकिन मेरी राय दूसरी थी। हमने कहा कि नहीं, कल्याण सिंह विधानमंडल दल के नेता हैं, उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए लेकिन कल्याण सिंह सहित सभी नेताओं ने अटल जी को मुख्यमंत्री बनाने की बात कही।”

कलराज मिश्र ने कहा कि बाद में उन्हें वाजपेयी के पास यह बात बताने को भेजा गया। इस पर वाजपेयी ने उनसे पूछा कि वह क्या सोचते हैं। उन्होंने वाजपेयी से कहा, “मेरा विचार भिन्न है। आप प्रधानमंत्री वाले विषय हैं। आपको मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहिए। आपको कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री बनाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि बाद में वाजपेयी ने मुख्यमंत्री पद स्वीकार करने से इन्कार कर दिया और कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव किया।

कलराज मिश्र ने कहा कि यदि वाजपेयी मुख्यमंत्री बन जाते तो फिर कहा जाता कि उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री आगे जा कर प्रधानमंत्री बनता है। उन्होंने कहा कि अपने सहयोगियों को आगे बढ़ाना और प्रोत्साहित करना अटल जी की प्रवृत्ति थी और उनकी विशाल हृदयता थी।

मूर्धन्य कवि, साहित्यकार, पत्रकार एवं राजनीति में अजातशत्रु रहे अटल बिहारी वाजपेयी बाद में देश के अत्यंत लोकप्रिय प्रधानमंत्री बने। उदारमना एवं संवेदनशील व्यक्तित्व के धनी वाजपेयी ने भारत में गठबंधन की राजनीति एवं सरकार को सफलता प्रदान की और देश को कांग्रेस का ठोस विकल्प प्रदान किया। वाजपेयी की 101वीं जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी याद में देश में अनेक कार्यक्रम आयोजित किये गये। देश हर साल उनके जन्मदिन को सुशासन दिवस के रूप में मनाता है।

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