हैदराबाद में 7वें विश्व संघ शिविर का समापन, डॉ मोहन भागवत ने सेवा और जीवन मूल्यों पर दिया जोर

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कान्हा शांति वनम भाग्यनगर में आयोजित विश्व शिविर के सार्वजनिक कार्यक्रम में पूजनीय सरसंघचालकजी का मार्गदर्शन

संघ प्रमुख ने कहा- हिंदुत्व के मूल्यों को विश्व तक पहुंचाएं

हैदराबाद, 28 दिसंबर (हि.स.)। दिल्ली के श्री विश्व निकेतन ट्रस्ट, भाग्यनगर (हैदराबाद) के निकट कान्हा शांति वनम में आयोजित पांच दिवसीय 7वें विश्व संघ शिविर (वीएसएस) का रविवार को समापन हुआ। इस अंतरराष्ट्रीय शिविर में दुनिया के सभी महाद्वीपों के 79 देशों से 1,610 कार्यकर्ता, स्वयंसेवक और प्रतिनिधि शामिल हुए। समापन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने मार्गदर्शन प्रदान किया।

अपने संबोधन में डॉ भागवत ने कहा कि आज दुनिया में कट्टरता और असंतुलन की जड़ गलत जीवनशैली और करुणा के अभाव में है। उन्होंने कहा कि इतिहास के कुछ दौरों में मानवता ने सही रास्ता नहीं अपनाया, जिसके परिणामस्वरूप समाज में अनेक समस्याएं पैदा हुईं। इनका समाधान सेवा, संवेदना और आत्मिक मूल्यों की पुनर्स्थापना से ही संभव है।

उन्होंने सेवा की सच्ची परिभाषा स्पष्ट करते हुए कहा कि सेवा किसी पुरस्कार, डर, मजबूरी या नाम-यश की अपेक्षा से नहीं, बल्कि निस्वार्थ भाव से की जानी चाहिए। डॉ. भागवत ने रामकृष्ण परमहंस के “शिव भावे जीव सेवा” के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि जो लोग बिना किसी स्वार्थ के समाज सेवा को जीवन का उद्देश्य बना लेते हैं, वही सच्चे स्वयंसेवक हैं।

उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार का उदाहरण देते हुए कहा कि समाज परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से करनी होती है। इसी भावना से स्वयंसेवक तैयार होते हैं, जो देश-विदेश में रहकर भी अपने मूल्यों और सांस्कृतिक जड़ों को नहीं भूलते।

डॉ भागवत ने कहा कि भारत का नेतृत्व सैन्य या आर्थिक शक्ति के प्रदर्शन से नहीं, बल्कि अपने जीवन मूल्यों, संस्कृति और आचरण के माध्यम से होता है। उन्होंने विदेशों में संघ कार्य के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि अब तीसरी पीढ़ी के स्वयंसेवकों के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि दुनिया के कई देशों में लोग भारत जैसे सांस्कृतिक और जीवन मूल्यों पर आधारित स्वयंसेवक संगठन की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि इस विश्व संघ शिविर की शुरुआत 25 दिसंबर को हुई थी। इसमें हिंदू स्वयंसेवक संघ, हिंदू सेवा संघ, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) सहित विभिन्न संगठनों के सदस्य अपने परिवारों के साथ शामिल हुए। शिविर का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सेवा, संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों के माध्यम से समाज को जोड़ना रहा।

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