हाईकोर्ट ने बीएचयू की प्रोफेसर चयन प्रक्रिया रद्द की

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नई समिति गठित करने का आदेश

प्रयागराज, 18 फरवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कला संकाय के नृत्य विभाग में प्रोफेसर पद पर हुई चयन प्रक्रिया को अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिया है।

खंडपीठ ने 16 फरवरी 2026 को सुनाए अपने फैसले में कहा कि चयन समिति का गठन विश्वविद्यालय नियमों के विपरीत था और विशेषज्ञों की नियुक्ति में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। अदालत ने सम्बंधित अभ्यर्थी की नियुक्ति भी निरस्त कर दी।

मामला डॉ. दीपांविता सिंह रॉय की याचिका से जुड़ा है, जो कथक की एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि कार्यकारी परिषद के अभाव में कुलपति ने आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर चयन समिति बनाई, जबकि यह मामला नियमित प्रमोशन का था और इसे आपात स्थिति नहीं माना जा सकता।

याचिका में यह भी कहा गया कि चयन समिति में शामिल दो विशेषज्ञ भरतनाट्यम पृष्ठभूमि की थीं, जबकि पद कथक विशेषज्ञ के लिए था। एक अन्य सदस्य के पास प्रोफेसर स्तर की आवश्यक शैक्षणिक योग्यता भी नहीं थी। साथ ही, एक अभ्यर्थी पर बाहरी विशेषज्ञों की सूची तैयार करने में भूमिका निभाने का आरोप लगाते हुए हितों के टकराव की बात उठाई गई।

विश्वविद्यालय ने दलील दी कि नियुक्ति “नृत्य विभाग” के लिए थी, किसी एक विधा के लिए नहीं। हालांकि अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रमोशन आपातकालीन मामला नहीं होता और चयन समिति में उसी विषय के विशेषज्ञ होना अनिवार्य है।

अदालत ने कुलपति को दो महीने के भीतर नई चयन समिति गठित करने का निर्देश दिया है, जिसमें केवल कथक विशेषज्ञ शामिल होंगे और सम्बंधित अभ्यर्थियों को समिति गठन प्रक्रिया से अलग रखा जाएगा, ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।

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