सर्दी जुकाम है तो अपनाएं दादी नानी के नुस्खे

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बाल मुकुंद ओझा

देश इस समय सर्दी, कोहरे और शीत लहर की चपेट में है। मौसम में हो रहे बदलाव के कारण कफ, कोल्ड, फीवर, गले में खराश, खांसी, सिर में दर्द आदि समस्याएं होना आम बात है। इस समय घर घर में सर्दी और जुकाम का प्रकोप देखा सकता है। अंग्रेजी दवाओं के मकड़जाल से आम परेशान है। जिसे देखो अंग्रेजी दवाइयों के पीछे भागता मिलेगा। सामान्य बीमारियों से लेकर असाध्य बीमारियों की दवा आज घरों में मिल जाएगी। इनमें चिकित्सकों द्वारा लिखी दवाइयों के अलावा वे दवाइयां भी शामिल है जो मेडिकल स्टोर्स से बीमारी बताकर खरीदी गई है अथवा गूगल से खोजकर निकाली गई है। ये दवाइयां असली है या घटिया अथवा नकली ये भी आम लोगों को मालूम नहीं है। घटिया दवाइयों का बाजार आजकल खूब फलफूल रहा है। आये दिन घटिया और नकली दवाइयां बरामद करने की खबरें मीडिया में सुर्खियों में पढ़ने को मिल रही है। इन दवाइयों के सेवन से साधारण खांसी बुखार और जुकाम को ठीक होने में एक पखवाड़ा या महीना लग जाता है। इसी बीच दादी नानी के नुस्खे सोशल मीडिया पर प्रचलित होने लगे है। ये नुस्खे कारगर है या नहीं इसकी पड़ताल भी जरुरी है।

आइये, आज हम आपको एक बार फिर दादी नानी के नुस्खों की याद दिला रहे है। स्वस्थ रखने के लिए नानी-दादी के नुस्खे आज भी महत्वपूर्ण हैं। वे हमारे रोजमर्रा के जीवन से जुड़े हैं। अगर उनका पालन किया जाए तो बड़ी से बड़ी बीमारी का मुकाबला किया जा सकता है। बदलते मौसम में सर्दी जुकाम होना आम बात है। दादी नानी ने इन बीमारियों का मुकाबला करने के लिए हमें योग, साधना, देशी चिकित्सा और प्रकृति से मित्रता का सन्देश दिया था। आधुनिक चिकित्सा पद्धति ने हमें दादी नानी के नुस्खों से दूर कर दिया। बाज़ार में भले ही कई दवाएँ मिलती हों, लेकिन भारतीय परिवारों में दादी-नानी के घरेलू नुस्खे पीढ़ियों से बच्चों को राहत देने के लिए अपनाए जाते रहे हैं। दादी-नानी के नुस्खे कारगर माने जाते हैं। ये घरेलू उपाय न सिर्फ आसान हैं, बल्कि शरीर को प्राकृतिक तरीके से राहत भी देते हैं।

मौसमी बीमारियों से बचाने के लिए दादी नानी के नुस्खे चमत्कारिक रूप से काम करते हैं और बहुत जल्दी आराम देते हैं। सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से पाचन सुधरता है और शरीर गर्म रहता है।  खाने में तिल, गुड़, मूंगफली, अदरक और लहसुन का प्रयोग अधिक करें।  हल्दी वाला दूध रात में पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और नींद अच्छी आती है।  ठंड के दिनों में धूप सेकना बेहद फायदेमंद है। इससे शरीर में विटामिन-डी की पूर्ति होती है और हड्डियां मजबूत रहती हैं।  सरसों या तिल के तेल की हल्की मालिश रोज करने से रक्तसंचार बेहतर होता है और त्वचा की नमी बनी रहती है। योग, साधना, व्यायाम और हमारी रसोई में मिलने वाले मसालों से उपचार जैसी प्राकृतिक और देशी चिकित्सा ने हमारी बहुत मदद की है। सर्दी, जुकाम, खांसी, गले में खराश आम बात है। दादी नानी के नुस्खों ने इनका उपचार भी हमें बताया है। ये नुस्खे इतने ज्यादा कारगर हैं कि डॉक्टर और मेडिकल साइंस भी उन्हें मानने से मना नहीं करते हैं। हल्दी वाला दूध हो या नमक मिले गरम पानी के गरारे कोरोना के जुकाम और गले दर्द में दोनों ही कारगर इलाज है। अदरक को पानी में उबालकर और फिर शहद के साथ खाया जाए तो यह कफ, गले में खराश और गला खराब होने की दिक्कत से छुटकारा दिला सकती है। अदरक को शहद के साथ खाने से गले में होने वाली सूजन और जलन में भी राहत मिलती है। इसी भांति अजवायन, लोंग, काली मिर्च, तुलसी गिलोय, मलेठीयुक्त पान, शहद, दालचीनी आदि के नुस्खे भी संजीवनी साबित हुए है। उल्टा लेटकर ऑक्सीजन प्राप्त करने के नुस्खे को एलोपेथी की मान्यता मिली है। इन नुस्खों का उपयोग कर लाखो लोग कोरोना के प्रारंभिक लक्षणों से बाहर निकलने में कामयाब हुए है। यही नहीं इनमें से ज्यादातर नुस्खों का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।

विशेषज्ञ कहते है, अगर सर्दी-खांसी तीन दिन से ज्यादा बनी रहे या बुखार के साथ बढ़े, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। दादी नानी के नुस्खे शुरुआती लक्षणों में बेहद कारगर हैं, लेकिन लंबे समय तक राहत न मिले तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। दादी-नानी के ये पुराने नुस्खे आज भी उतने ही असरदार हैं। इन घरेलू और प्राकृतिक उपायों को अपनाकर हम न सिर्फ सर्दी-खांसी से बच सकते हैं बल्कि दवाइयों पर निर्भरता भी कम कर सकते हैं।

बाल मुकुन्द ओझा

वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार

डी 32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर

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