
नई दिल्ली, 15 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पोंगल के अवसर पर काशी-तमिल संगमम के विस्तार को देश की सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल आज परंपराओं, भाषाओं और समुदायों को जोड़ने वाला एक सशक्त मंच बन चुकी है, जिसने एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को और गहराई दी है।
प्रधानमंत्री ने तमिल भाषा में लिखे अपने लेख में कहा कि काशी-तमिल संगमम भारत की विविधता में निहित एकता का जीवंत उदाहरण है, जो सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच आपसी समझ और सम्मान को मजबूत कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अलग-अलग पोस्ट्स में कहा कि काशी-तमिल संगमम भारत की विविधता में निहित एकता का जीवंत उदाहरण है। यह पहल सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच आपसी समझ और सम्मान को मजबूत कर रही है।
प्रधानमंत्री ने अपनी सोमनाथ यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दौरान उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों से आए नागरिकों से बातचीत की, जिन्होंने काशी-तमिल संगमम और सौराष्ट्र-तमिल संगमम जैसी पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पोंगल के विशेष अवसर पर काशी-तमिल संगमम की यात्रा और एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को सशक्त बनाने में इसकी भूमिका पर विचार साझा करना उनके लिए विशेष रहा। इस पहल ने यह दिखाया है कि सांस्कृतिक संपर्क किस प्रकार राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है।
प्रधानमंत्री ने तमिल भाषा में लिखे अपने लेख में काशी-तमिल संगमम की पृष्ठभूमि और इसके ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इतिहास, संस्कृति और भारतीय समाज की साझा चेतना के प्रति लोगों का सम्मान स्पष्ट रूप से देखने को मिला। इसी दौरान काशी-तमिल संगमम और सौराष्ट्र-तमिल संगमम में भाग ले चुके लोगों से हुई मुलाकातों ने इस पहल के व्यापक प्रभाव को उजागर किया। तमिल भाषा और संस्कृति के प्रति उनका विशेष सम्मान रहा है और तमिल न सीख पाने को वे अपने जीवन का एक अभाव मानते हैं। बीते वर्षों में सरकार को तमिल संस्कृति को देशभर में और अधिक लोकप्रिय बनाने तथा एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को प्रगाढ़ करने के कई अवसर मिले हैं, जिनमें काशी-तमिल संगमम एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय परंपरा में संगम का विशेष स्थान है और इसी दृष्टि से काशी-तमिल संगमम एक विशिष्ट पहल है। यह विभिन्न परंपराओं में निहित एकता का उत्सव मनाने के साथ-साथ उनकी विशिष्ट पहचान का सम्मान भी करता है। सदियों से काशी सभ्यता का केंद्र रही है, जहां देश-विदेश से लोग ज्ञान, जीवन अनुभव और आध्यात्मिक शांति की खोज में आते रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने काशी और तमिलनाडु के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव गहरा रहा है। काशी में विराजमान भगवान विश्वनाथ और तमिलनाडु के रामेश्वरम के बीच आध्यात्मिक संबंध, तेनकासी को दक्षिण की काशी कहा जाना तथा संत कुमारगुरुपर स्वामियों और महाकवि सुब्रह्मण्य भारती जैसे महान व्यक्तित्वों की भूमिका इन संबंधों को और सुदृढ़ करती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी-तमिल संगमम का पहला आयोजन वर्ष 2022 में हुआ था, जिसमें तमिलनाडु से विद्वान, कारीगर, विद्यार्थी, किसान, लेखक और विभिन्न क्षेत्रों के लोग काशी, प्रयागराज और अयोध्या पहुंचे थे। इसके बाद के आयोजनों में इस पहल का दायरा और प्रभाव लगातार बढ़ता गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी-तमिल संगमम जैसे आयोजन सांस्कृतिक समझ को मजबूत करने के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों के बीच स्थायी संबंध स्थापित करते हैं। आने वाले समय में यह पहल और अधिक प्रभावी होगी और एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को और सशक्त बनाएगी।
