बांग्लादेश में इंक़िलाब मंच आंदोलन के 32 वर्षीय अग्रणी नेता शरीफ़ उस्मान हादी की हत्या के बाद उग्र प्रदर्शन − हिंसा और आगजनी की वारदातों में कई अखबारों के कार्यालय निशाना बनाए गए तो मैमनसिंह जिले के भालुका में फैक्ट्री से लौट रहे 25 वर्षीय दीपू चंद्र दास को तौहीन.ए.मजहब के आरोप में पीटकर मारने और फिर पेड़ से लटकाकर जलाने के शर्मनाक कृत्य को अंजाम दिया। फसादियों ने रात के एक बजे लक्ष्मीपुर के सदर इलाके में पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता बिलाल हुसैन के घर को पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इस बेहद शर्मनाक और अमानवीय हरकत में बिलाल की सात वर्षीय बेटी आयशा अख्तर जलकर मर गई जबकि बिलाल उसकी सोलह साल की बेटी सलमा अख्तर और चौदह साल की बेटी सामिया अख्तर झुलस गए। पत्रकारों को निशाना बनाने और कार्यालयों पर हमला करने के चलते 21 दिसंबर 2025 को 27 वर्ष में पहली बार दैनिक प्राथोम आलो प्रकाशित नहीं हुआ। इससे पूर्व गुस्साई भीड ने द डेली स्टार प्रोथोम आला और न्यू ऐज के कार्यालयों में तोडफोड की। फर्नीचर दस्तावेज और उपकरण सडकों पर फैंक कर आग लगादी। मीडिया के 25 लोग चार घंटे तक छत पर फंसे रहे। फायरब्रिगेड के कर्मचारियों ने आग पर काबू पाते हुए उन्हें बचाया। कट्टरपंथियों का आरोप है कि ये अख्बार शेख हसीना हुकूमत का पक्ष करते हैं। उन्होंने भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन कर भारत विरोधी नारे लगाए। ऐसे ही नारे हादी के जनाज़े की नमाज़ के दौरान जिसमें अंतरिम सरकार के सलाहकार मोहम्मद यूनुस और आर्मी चीफ जनरल वकार.उज.जमा शामिल हुए थे लगाए गए। शैक्षिक संस्थान सियासत की जद में आए और देश में अस्थिरता की स्थिति पैदा हो गई। भीड़ को नियंत्रण करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बांग्लादेश बार्डर गार्ड के जवानों को तैनात किया गया।
जुलाई 2024 में बांग्लादेश में छात्रों की अगवाई वाले आंदोलन के रहनुमा शरीफ उस्मान हादी की 18 दिसंबर को सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्होंने 12 दिसंबर को ढाका के बिजॉय नगर इलाके में मोटर साइकिल सवार दो नकाबपोश बंदूकधारियों ने सिर में गोली मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। वह इसी निर्वाचन क्षेत्र से आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने वाले थे। हादी की मौत की खबर फैलते ही उनके समर्थक और कट्टरपंथी कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतर कर आगजनी, तोड़फोड़ और लक्षित हमले शुरू कर दिए। ढाका , राजशाही − चटगाँव आदि शहरों में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। गुस्साई भीड़ और प्रदर्शनकारी खुलना और चटगाँव में भारतीय उच्चायोग की ओर बढ़े ࣳ जाकिर हुसैन रोड पर पुलिस बैरिकेड्स तोड़ दिए और धरना देते हुए नारेबाजी की। पुलिस ने भीड हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोडेे , लाठी चार्ज किया और गिरफ़्तारियां कीं। अंतरिम सरकार के सलाहकार मोहम्मद यूनुस के शरीफ उस्मान हादी की मौत की पुष्टि के बाद हालात बेकाबू हुए। दर्शनकारियों के गुस्से का अंदाजा इसी से लग जाता है कि उन्होंने राजशाही में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर्रहमान के पहले से तबाह पुश्तैनी और ऐतिहासिक घर को बुलडोजर से गिरा दिया। भीड़ ने अवामी लीग के शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नोफेल और सांसद हबीब हसन के भाई के घर समेत कई नेताओं के घरों पर हमला कर उन्हें फूंक दिया। दंगाइयों ने धान मंडी स्थित बांग्लादेश के प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक संगठनों में से एक छायानट को आग लगा दी , जिससे किताबें , संगीत उपकरण और अन्य सांस्कृतिक व दुर्लभ चीज़ें नष्ट हो गईं। मोहम्मद यूनुस के ऐलान के बाद 20 दिसंबर 2025 को एक दिनी शोक के साथ सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय झंडा झुका रहा। दूसरी ओर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि शरीफ़ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा और अशांति की नई लहर इस बात का सबूत है कि देश में स्थिरता अभी बहुत दूर है। हादी की हत्या के बाद वहां अफ़रा.तफ़री , तोड़फोड़ , आगजनी , संपत्ति को नुकसान भारत विरोधी नारे , प्रदर्शन , अशांति और अस्थिरता का माहौल है। हालाँकि ࣳ यह बात भी छिपी नहीं है कि 2024 में शेख हसीना सरकार का तख्तापलट के बाद से राजनीतिक हिंसा में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। अल्पसंख्यकों को भी निशाना बनाया जा रहा है। ऐसा लगता है कि 12 फरवरी 2026 को आम चुनावों की घोषणा करने वाले मोहम्मद यूनुस कट्टरपंथियों और अराजकता फैलाने वालों के सामने बेबस हो गए हैं। यह स्थिति बांग्लादेश के लिए अच्छी नहीं कही जा सकती। देश में जानबूझकर अशांति फैलाई जा रही है और साजिश के तहत भारत विरोधी भावनाओं को भड़काया जा रहा है , ताकि चुनावों को असुरक्षित बताकर टाला जा सके। इससे कट्टरपंथी मजबूत होंगे और अंतरिम सरकार को सत्ता में बने रहने का बहाना मिल जाएगा। राजनीतिक व आर्थिक अस्थिरता और मनोवैज्ञानिक व सामाजिक चिंता की स्थिति नागरिकों को हिंसा और तबाही की ओर ले जा रही है। शेख हसीना वाजिद ने छात्र आंदोलन को कुचलने के लिए एक तानाशाह की तरह ताकत का बेजा इस्तेमाल किया , जिसका नतीजा यह निकला कि छात्र उनके खिलाफ पंक्तिबद्ध होते गए। आंदोलन और प्रदर्शनों के चलते उन्हें न सिर्फ अपनी सत्ता गंवानी पडी , बल्कि भारत में शरण लेने पर मजबूर होना पडा। छात्र आंदोलन और उसके नेतृत्व ने अंतरिम तौर पर हुकूमत की बागडोर अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस को सौंप दी। यूनुस सरकार हिंसा और नफरत के खिलाफ होने का दावा करती है , लेकिन शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद भी हो रहे प्रदर्शन ࣳ रैलियां ࣳ हिंसा और हत्याओं का सिलसिला इस दावे को नकारता है। हादी की हत्या के बाद इसमें पुनरू तेजी आई। शेख हसीना के खिलाफ अवामी इंकिलाब ने हादी को लोकप्रिय बना दिया था। उन्हें कट्टरपंथी और भारत विरोधी करार दिया गया। शेख हसीना वाजिद को भारत में पनाह मिलने के बाद बांग्लादेश में भारत विरोधी भावना और रुझान खतरनाक हद तक बढ़ा है। शेख हसीना की वापसी की मांग भी गई। हादी के हमलावरों पर सरहद पार कर भारत में घुसने का भी आरोप है। भारतीय उच्चायोग पर हमले की कोशिश को भी इसी नज़रिए से देखा जा रहा है। बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले हिंसात्मक वारदातें अंतरिम सरकार के लिए चिंता की बात है।

एम ए कंवल जाफरी
वरिष्ठ पत्रकार


