ढोलक की थाप हुई मौन, विख्यात कलाकार रमेश दास का निधन

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पूर्वी सिंहभूम,28 जनवरी (हि.स.)। शहर के गौरव, ख्याति प्राप्त ढोलक वादक और संगीत साधक रमेश दास अब हमारे बीच नहीं रहे। उनका निधन मंगलवार की रात्रि लगभग 11:30 बजे हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही न केवल जमशेदपुर बल्कि देश-विदेश में फैले उनके शिष्यों, संगीत प्रेमियों और कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

रमेश दास ने अपनी साधना, तपस्या और अनवरत अभ्यास के बल पर ढोलक वादन को नई पहचान दिलाई। उन्होंने पारंपरिक लोक संगीत से लेकर शास्त्रीय और फ्यूजन संगीत तक, हर मंच पर अपनी कला का अद्भुत प्रदर्शन किया। भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी उन्होंने अपनी ढोलक की थाप से भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा का परचम लहराया और जमशेदपुर का नाम रोशन किया।

उनकी पहचान केवल एक उत्कृष्ट कलाकार के रूप में ही नहीं, बल्कि एक सरल, सौम्य और विनम्र व्यक्तित्व के रूप में भी थी। वे युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा स्रोत थे और हमेशा नए कलाकारों को प्रोत्साहित करने में आगे रहते थे। कई शिष्य आज देश के विभिन्न हिस्सों में संगीत के क्षेत्र में सक्रिय हैं, जो स्वयं को गर्व से रमेश दास जी का शिष्य बताते हैं।

उनके निधन से संगीत जगत ने एक अनमोल रत्न खो दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उनकी कला, सादगी, अनुशासन और मधुर स्वभाव हमेशा लोगों के हृदयों में जीवित रहेंगे। शहर के अनेक सांस्कृतिक संगठनों, कलाकारों और गणमान्य नागरिकों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे अपूरणीय क्षति बताया और भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। वे अपने पीछे पत्नी,दो बेटियां सहित पूरा परिवार छोड़कर गए हैं।

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