डीपफेक पर सख्त नियम जरूरीः वैष्णव

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नई दिल्ली, 17 फ़रवरी (हि.स.)। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को कहा कि डीपफेक जैसी तकनीक के संदर्भ में सख्त नियम बनाना बेहद जरूरी है, ताकि बच्चों और समाज को इसके खतरों से बचाया जा सके। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एक ऐसा साधन है, जिसका उपयोग हर व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की चुनौतियों को हल करने और समाज की जरूरतों के अनुसार समाधान बनाने में कर सकता है।

अश्विनी वैष्णव ने यहां भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में वाईयूवीएआई तकनीकी नवाचार प्रतियोगिता (हैकाथॉन) में भाग लेने वाले तीन हजार से अधिक छात्रों से बातचीत की। देशभर से आए छात्रों ने स्थानीय भाषाओं और विभिन्न क्षेत्रों पर आधारित एआई समाधान प्रस्तुत किए। वैष्णव ने इसे जमीनी स्तर पर नवाचार और युवाओं की सक्रिय भागीदारी का उदाहरण बताया।

उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन ने वैश्विक स्तर पर बड़ी दिलचस्पी पैदा की है। अगले कुछ सालों में लगभग 17 अरब डॉलर की उद्यम पूंजी निवेश प्रतिबद्धता और करीब 200 अरब डॉलर का बुनियादी ढांचे में निवेश आने की उम्मीद है। यह भारत के एआई तंत्र में दुनिया की गहरी रुचि को दर्शाता है। यह गति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बनाए गए दूरदर्शी ढांचे के कारण संभव हुई है। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा एआई सम्मेलन आयोजित करना इस बात का प्रमाण है कि देश उभरती प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि चाहे कोई भी कंपनी हो, उसे भारत के संविधान और कानूनी ढांचे के भीतर काम करना होगा। किसी भी कंपनी को उस देश के सांस्कृतिक संदर्भ को समझना जरूरी है, जिसमें वह काम कर रही है। क्योंकि, जो चीज एक देश में सामान्य है, वह दूसरे देश में प्रतिबंधित हो सकती है। इसी कारण कंपनियों को उस देश की संस्कृति और सामाजिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए काम करना चाहिए।

वैष्णव ने कहा कि यह समस्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है और समाज तथा बच्चों को इससे बचाना जरूरी है। सरकार ने उद्योग जगत के साथ बातचीत शुरू की है कि मौजूदा कदमों से आगे और किस तरह के नियम बनाए जाएं। संसद की सूचना प्रौद्योगिकी समिति ने भी इस पर अध्ययन कर सुझाव दिए हैं।

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