केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र में बीओटी मोड पर 374 किलोमीटर लंबे और 19,142 करोड़ रुपये की लागत वाले 6 लेन के ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड नासिक-सोलापुर-अक्कलकोट कॉरिडोर के निर्माण वाली परियोजना को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज ओडिशा राज्य में एनएच-326 के 68,600 किलोमीटर से 311,700 किलोमीटर तक मौजूदा 2-लेन को पेव्ड शोल्डर (सड़क के किनारे बनी पक्की, समतल पट्टी) सहित 2-लेन में बदलने और मजबूत करने को एनएच(ओ) के तहत ईपीसी मोड (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन परियोजना वितरण पद्धति) की मंजूरी दी।मंत्रिमंडलीय समिति ने आज महाराष्ट्र में बीओटी मोड पर 374 किलोमीटर लंबी और 19,142 करोड़ रुपये की कुल लागत से निर्मित होने वाली छह लेन की ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड नासिक-सोलापुर-अक्कलकोट कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना नासिक, अहिल्यानगर और सोलापुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शहरों को कुरनूल से जोड़ेगी, जैसा कि मानचित्र में दर्शाया गया है।
इस परियोजना की कुल पूंजी लागत 1,526.21 करोड़ रुपये है। इसमें 966.79 करोड़ रुपये की सिविल निर्माण लागत शामिल है।एनएच-326 के उन्नयन से यात्रा तेज, सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय हो जाएगी। इससे दक्षिणी ओडिशा का समग्र विकास होगा, विशेष रूप से गजपति, रायगड़ा और कोरापुट जिलों को लाभ मिलेगा। बेहतर सड़क संपर्क से स्थानीय समुदायों, उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों और पर्यटन केंद्रों को बाजारों, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों तक बेहतर पहुंच प्राप्त होगी। इससे क्षेत्र के समावेशी विकास में योगदान मिलेगा।
यह परियोजना दक्षिणी ओडिशा (गजपति, रायगड़ा और कोरापुट जिले) की है और इससे वाहनों की आवाजाही को तेज और सुरक्षित बनाकर राज्य के भीतर और अंतर-राज्यीय संपर्क को काफी हद तक सुधारने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही यह परियोजना औद्योगिक और पर्यटन विकास को बढ़ावा देगी तथा आकांक्षी और आदिवासी क्षेत्रों में सेवाओं की पहुंच में सुधार करेगी। आर्थिक विश्लेषण से पता चलता है कि परियोजना का ईआईआरआर 17.95 प्रतिशत (आधार स्थिति) है, जबकि वित्तीय प्रतिफल (एफआईआरआर) नकारात्मक (-2.32 प्रतिशत) है। यह आर्थिक मूल्यांकन में शामिल सामाजिक और गैर-बाजार लाभों को दर्शाता है। इसमें मुख्य रूप से यात्रा समय और वाहन परिचालन लागत में बचत तथा सुरक्षा लाभ (ज्यामितीय सुधारों के बाद मोहना और कोरापुट के बीच लगभग ढाई से तीन घंटे तक की अनुमानित यात्रा समय में बचत और लगभग 12.46 किमी की दूरी की बचत) शामिल हैं।
कार्यान्वयन रणनीति और लक्ष्य:
यह कार्य ईपीसी मोड में पूरा किया जाएगा। ठेकेदारों को पुख्ता निर्माण और गुणवत्ता आश्वासन प्रौद्योगिकियों को अपनाना होगा। इनमें पूर्वनिर्मित बॉक्स-प्रकार संरचनाएं और पूर्वनिर्मित नालियां, पुलों और ग्रेड विभाजकों के लिए पूर्वनिर्मित आरसीसी/पीएससी गर्डर, प्रबलित मिट्टी की दीवारों पर पूर्वनिर्मित क्रैश बैरियर और फ्रिक्शन स्लैब और फुटपाथ परतों में सीमेंट ट्रीटेड सब-बेस (सीटीएसबी) शामिल किये जा सकते हैं। गुणवत्ता और प्रगति का सत्यापन नेटवर्क सर्वे व्हीकल (एनएसवी) और आवधिक ड्रोन-मैपिंग जैसे विशेष सर्वेक्षण और निगरानी उपकरणों के माध्यम से किया जाएगा। दैनिक पर्यवेक्षण नियुक्त प्राधिकरण अभियंता द्वारा किया जाएगा और परियोजना की निगरानी परियोजना निगरानी सूचना प्रणाली (पीएमआईएस) के माध्यम से की जाएगी।
प्रत्येक पैकेज के लिए निर्धारित तिथि से 24 महीनों में कार्य पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद पांच वर्ष की दोष दायित्व/रखरखाव अवधि होगी (कुल अनुबंध अवधि 7 वर्ष की होगी: 2 वर्ष निर्माण + 5 वर्ष दोष दायित्व/रखरखाव)। वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त होने और आवश्यक भूमि पर कब्ज़ा मिलने के बाद अनुबंध प्रदान किया जाएगा।
रोजगार सृजन की क्षमता सहित प्रमुख प्रभाव:
इस परियोजना का उद्देश्य यातायात की सुगम और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना तथा ओडिशा के दक्षिणी और पूर्वी भागों के बीच संपर्क को बेहतर बनाना है। विशेष रूप से गजपति, रायगढ़ा और कोरापुट जिलों को राज्य के शेष भाग और पड़ोसी आंध्र प्रदेश से जोड़ना इसका लक्ष्य है। बेहतर सड़क नेटवर्क से औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच बढ़ेगी तथा दक्षिणी ओडिशा के आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान मिलेग
निर्माण और रखरखाव अवधि के दौरान की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों से कुशल, अर्ध-कुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध होने की उम्मीद है। यह परियोजना निर्माण सामग्री की आपूर्ति, परिवहन, उपकरण रखरखाव और संबंधित सेवाओं से जुड़े स्थानीय उद्योगों को भी बढ़ावा देगी। इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को समर्थन मिलेगा।
ओडिशा राज्य की यह परियोजना गजपति, रायगढ़ा और कोरापुट जिलों से होकर गुजरती है। यह कॉरिडोर मोहना, रायगढ़ा, लक्ष्मीपुर और कोरापुट जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ता है। इससे ओडिशा के भीतर अंतर-राज्यीय संपर्क बेहतर और एनएच-326 के दक्षिणी छोर के माध्यम से आंध्र प्रदेश के साथ अंतर-राज्यीय संपर्क मजबूत होता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की यह बुनियादी ढांचा परियोजना प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान सिद्धांत के तहत एकीकृत परिवहन अवसंरचना विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नासिक से अक्कलकोट तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को वधावन बंदरगाह इंटरचेंज के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, नासिक में एनएच-60 (अदेगांव) के जंक्शन पर आगरा-मुंबई कॉरिडोर और पांगरी (नासिक के पास) में समृद्धि महामार्ग से जोड़ा जाना है। प्रस्तावित कॉरिडोर पश्चिमी तट से पूर्वी तट तक सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। चेन्नई बंदरगाह से की ओर से तिरुवल्लूर, रेनिगुंटा, कडप्पा और कुरनूल होते हुए चेन्नई से हसापुर (महाराष्ट्र सीमा) तक लगभग 4-लेन कॉरिडोर परियोजनाएं (700 किमी लंबा) पहले से ही निर्माणाधीन है। प्रस्तावित एक्सेस-नियंत्रित छह-लेन ग्रीनफील्ड परियोजना कॉरिडोर का प्राथमिक उद्देश्य यात्रा दक्षता में सुधार करना है, जिससे यात्रा समय में लगभग17 घंटे की कमी और यात्रा दूरी में 201 किमी की कमी होने की उम्मीद है। नासिक-अक्कलकोट (सोलापुर) कनेक्टिविटी कोप्पार्थी और ओरवाकल के प्रमुख राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम (एनआईसीडीसी) नोड्स से शुरू और समाप्त होने वाले माल ढुलाई के लिए लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार करेगी। इस खंड का नासिक-तलेगांव दिघे वाला हिस्सा पुणे-नासिक एक्सप्रेसवे के विकास की आवश्यकता को भी पूरा करता है, जिसे एनआईसीडीसी ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नए एक्सप्रेसवे के हिस्से के रूप में चिह्नित किया है। यह परियोजना बेहतर सुरक्षा और निर्बाध यातायात आवागमन के लिए डिज़ाइन किया गया एक उच्च गति कॉरिडोर प्रदान करती है, जिससे यात्रा का समय, भीड़भाड़ और परिचालन लागत कम होती है। इस परियोजना की महत्वपूर्ण बात यह है कि इस
