उपराष्ट्रपति ने राज्य को त्याग-दृढ़ता का प्रतीक बताया

0
13

उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वर्ष :

-उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने जागरण मंच का उद्घाटन किया

देहरादून, 17 जनवरी (हि.स.)। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज देहरादून में जागरण मंच का उद्घाटन किया। यह आयोजन उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने उत्तराखंड को त्याग, दृढ़ता तथा राष्ट्र सेवा का प्रतीक बताते हुए राज्यवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

उत्तराखंड की स्थापना को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राज्य का गठन पर्वतीय जनमानस की दीर्घकालिक आकांक्षाओं का लोकतांत्रिक जवाब था और इसने भारत की संघीय प्रणाली की मजबूती को पुनः स्थापित किया। उन्होंने लोकसभा सदस्य के रूप में उत्तराखंड के गठन के विधेयक के पक्ष में मतदान करने के अपने व्यक्तिगत अनुभव को भी साझा किया।

देवभूमि उत्तराखंड के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की सभ्यतागत चेतना में इस राज्य का विशेष स्थान है। वैदिक और पुराणिक परंपराओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सत्यम, शिवम और सुंदरम के सार को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने राज्य के पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसके हिमनद, नदियां और वन इसकी भौगोलिक सीमाओं से कहीं अधिक दूर तक जीवन को पोषित करते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य ने सड़क, रेल, हवाई और संचार संपर्क में अभूतपूर्व प्रगति देखी है।

उपराष्ट्रपति ने पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हरित विकास को बढ़ावा देने, विशेष रूप से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तराखंड के प्रयासों की सराहना की और सकल घरेलू उत्पाद के साथ-साथ सकल पर्यावरण उत्पाद की अवधारणा को अपनाने वाला देश का पहला राज्य होने के लिए उत्तराखंड की प्रशंसा की। बउपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा में राज्य के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों में बड़ी संख्या में अधिकारी उत्तराखंड से हैं।

उन्होंने जीवंत सीमावर्ती गांवों को अंतिम चौकी नहीं, बल्कि शक्ति, विरासत और लचीलेपन की पहली पंक्ति बताया और प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण को याद किया जिसमें उन्होंने माणा गांव को भारत का पहला गांव कहा था। 2047 तक आत्मनिर्भर और विकसित भारत बनने की दिशा में भारत की यात्रा पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, जैविक कृषि, बागवानी, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, आयुष, पर्यावरण पर्यटन, स्टार्टअप और कौशल विकास में अपनी विशाल क्षमता के साथ उत्तराखंड एक अद्वितीय स्थान रखता है।

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया की भूमिका पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह जनता और सत्ता में बैठे लोगों के बीच एक सेतु का काम करता है, जिससे शासन में जवाबदेही और पारदर्शिता मजबूत होती है। विकास की सकारात्मक खबरों को उजागर करने के लिए समाचार पत्र की सराहना करते हुए उन्होंने मीडिया संगठनों से आग्रह किया कि वे नियमित रूप से कम से कम दो पृष्ठ सकारात्मक और विकासोन्मुखी समाचारों के लिए समर्पित करें। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों को विशेष रूप से युवाओं के बीच सकारात्मकता का प्रसार करना चाहिए, क्योंकि रचनात्मक और प्रेरणादायक कहानियों से युवा नागरिक राष्ट्र निर्माण में अधिक सक्रिय रूप से योगदान देने के लिए प्रेरित होंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जागरण फोरम में हुई चर्चाओं से उत्तराखंड की निरंतर प्रगति के लिए नए विचार उत्पन्न होंगे। कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल, लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, दैनिक जागरण के प्रबंध संपादक तरुण गुप्ता, निदेशक सुनील गुप्ता आदि मौजूद रहे।

बीसी खंडूडी से की मुलाकात

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उत्तराखंड भ्रमण कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री भुवन चंद्र खंडूडी से उनके आवास पर मुलाकात कर हाल-चाल जाना और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उप राष्ट्रपति ने उनके कार्यकाल को भी याद किया और कहा कि बीसी खंडूडी ने देश व प्रदेश के विकास में अहम योगदान दिया है।

#uk-Vice-President-State-formation #UTTRA-KHAND #VICE-PRESIDENT #UTTRA-KHAND-State-formation

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here