इंडिया टुडे सी वोटर सर्वे : एक बार फिर मोदी सरकार

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बाल मुकुन्द ओझा

एक प्रतिष्ठित खबरिया चैनल के सर्वे के मुताबिक आज लोकसभा चुनाव होते है तो न केवल मोदी का जलवा बरक़रार रहेगा अपितु  देश में मोदी राज की वापसी होंगी। सर्वे में बताया गया है यदि देश में आज लोकसभा चुनाव होते है तो भाजपा अकेले बहुमत प्राप्त कर अपनी सरकार बना सकती है। इसे देश का वर्तमान मिज़ाज़ बताया गया है। इंडिया टुडे- सी वोटर के ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे में ये नतीजे निकलकर आए हैं। सर्वे में अभी देश का मूड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दिख रहा है। इस ताज़ा सर्वे को देखे तो देश में महंगाई , बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था में गिरावट और विपक्ष के ताबड़तोड़ हमलों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आयी है। मोदी का जादू अभी बरकरार है। मोदी की लोकप्रियता लगातार बनी हुई है। देश के एक प्रमुख न्यूज़ चैनल इंडिया टुडे – सी वोटर के इस सर्वे में बताया गया है की आज लोकसभा चुनाव होते है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जलवा बरकरार रहेगा है। सर्वे में बताया गया है मोदी का जादू अभी भी मतदाताओं के सिर चढ़ कर बोल रहा है। 8 दिसंबर 25 से 21 जनवरी 26 के बीच किये इस सर्वे में 36 हज़ार 265 लोगों को शामिल किया गया है। सर्वे में एनडीए को 47 प्रतिशत और इंडिया गठबंधन को 39 प्रतिशत, अन्य को 14 प्रतिशत  वोट मिलेंगे। सर्वे के मुताबिक एनडीए को 352 और इंडिया गठबंधन को 182 सीटें और अन्य को 9 सीटें मिलने की बात कही गई है। भाजपा को 287 सीटों के साथ अकेले बहुमत का आंकड़ा मिलने की बात भी कही गई है। सर्वे को देखें तो कांग्रेस की सीटें 80 सीटें मिलने की बात कही गई है जो पिछले चुनाव से कम है। सर्वे ने मोदी की बादशाहत पर फिर मुहर लगा दी है। सर्वे की माने तो आज चुनाव होते है तो  मोदी आसानी से लोकसभा चुनाव जीत लेंगे। कांग्रेस सहित उनके विरोधियों को मुंह की खानी पड़ेगी। सर्वे में आज भी मोदी ब्रांड की लोकप्रियता ने अपने झंडे गाड़ रखे है। इस सर्वे में लोगों से ये भी पूछा गया कि अगले प्रधानमंत्री के तौर पर सबसे बेहतर चेहरा कौन सा होगा? इस पर 55 फीसदी लोगों ने नरेंद्र मोदी को सही दावेदार बताया वहीं जबकि 27 फीसदी ने राहुल गांधी को। देश का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रधान मंत्री भी लोगों ने मोदी को ही बताया है। मोदी के कामकाज से 57 फीसदी लोग बहुत खुश हैं।

हमारे देश में दो चीजों का विकास करीब-करीब एक साथ ही हुआ है। पहला चुनावी सर्वेक्षणों और दूसरा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या कहें खबरिया चैनलों का।  खबरिया या समाचार चैनलों की भारी भीड़ ने चुनावी सर्वेक्षणों को पिछले तीन  दशक से हर चुनाव के समय का अपरिहार्य बना दिया है। आज बिना इन सर्वेक्षणों के भारत में चुनावों की कल्पना भी नहीं की जाती। बल्कि कुछ समाचार चैनल तो साल में कई बार ऐसे सर्वेक्षण करवाते हैं और इसके जरिये सरकारों की लोकप्रियता और समाज को प्रभावित करने वाले मुद्दों की पड़ताल करते रहते हैं। आजकल सर्वे की बहुत ज्यादा चर्चा हो रही है। जिसे चाहे वह सर्वे करवा रहा है। आखिर यह सर्वे है क्या, इसकी जानकारी जनसाधारण को होनी बहुत जरुरी है। सीधे शब्दों में बात करें तो किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी या किसी भी विषय पर लोगों के मन की बात जानने के लिए लोगों के बीच में सर्वे किया जाता है, जिससे कि वहां के समाज के लोगों की क्या स्थिति है ,और वहां पर क्या चल रहा है उन सभी का हमें पता चल जाता है। कुल मिलकर लोगों के मन की बात सर्वे के दौरान जानने की चेष्टा की जाती है। सर्वे शत प्रतिशत सही हो इसका दवा नहीं किया जा सकता ,फिर भी सर्वे के महत्त्व से नकारा नहीं जा सकता।

चुनावी सर्वे कराए जाने की शुरुआत दुनिया में सर्वप्रथम अमेरिका में हुई थी। अमेरिकी सरकार के कामकाज पर लोगों की राय जानने के लिए जॉर्ज गैलप और क्लॉड रोबिंसन ने इस विधा को अपनाया, जिन्हें ओपिनियन पोल सर्वे का जनक माना जाता है। भारत में  वर्ष 1960 में ही चुनाव पूर्व सर्वे का खाका खींच दिया गया था। तब ‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज’ (सीएसडीएस) द्वारा इसे तैयार किया गया था। भारत में एग्जिट पोल की शुरूआत का श्रेय इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ पब्लिक ओपिनियन के प्रमुख एरिक डी कोस्टा को दिया जाता है, जिन्हें चुनाव के दौरान इस विधा द्वारा जनता के मिजाज को परखने वाला पहला व्यक्ति माना जाता है। चुनाव के दौरान इस प्रकार के सर्वे के माध्यम से जनता के रूख को जानने का काम सबसे पहले एरिक डी कोस्टा ने ही किया था। शुरूआत में देश में सबसे पहले इन्हें पत्रिकाओं के माध्यम से प्रकाशित किया गया जबकि बड़े पर्दे पर चुनावी सर्वेक्षणों ने 1996 में उस समय दस्तक दी, जब दूरदर्शन ने सीएसडीएस को देशभर में एग्जिट पोल कराने के लिए अनुमति प्रदान की।

बाल मुकुन्द ओझा

वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार

डी .32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर

 

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