आज़मगढ़ में शिया-सुन्नी दंगे में हुई हत्या के मामले में 12 आरोपित दोषी करार, 17 फरवरी को सजा का ऐलान

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आजमगढ़, 13 फ़रवरी (हि.स.)। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय की अदालत ने शुक्रवार को 27 साल पूर्व मुबारकपुर में शिया-सुन्नी दंगे में हुई एक हत्या के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने 12 आरोपितों को दोषी करार दिया है। अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 17 फरवरी तारीख निर्धारित की है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी मुकदमा नासिर हुसैन ने मुबारकपुर थाने में 30 अप्रैल 1999 को रिपोर्ट दर्ज कराई। नासिर हुसैन ने अपनी तहरीर में बताया कि उसके चाचा अली अकबर निवासी पूरा ख्वाजा 27 अप्रैल 1999 से लापता थे। अली अकबर के लड़के जैगम ने 28 अप्रैल को गुमशुदगी की सूचना थाने पर दी थी। अली अकबर की सिर कटी लाश राजा भाट के पोखरे से 30 अप्रैल को बरामद की गई। विवेचना में पता चला कि मोहर्रम के जुलूस से लौटते समय अली अकबर को सुन्नी सम्प्रदाय के लोगों ने मारपीट कर हत्या कर दी थी।

इस मामले में पुलिस ने हुसैन अहमद निवासी हैदराबाद, मोहम्मद अयूब फैजी, हाजी मोहम्मद सुलेमान, फहीम अख्तर, असरार अहमद, मोहम्मद याकूब सभी निवासी दुल्हनपूरा, अली जहीर नजीबुल्लाह इरशाद निवासी पूरासोफी, हमीदुल्लाह उर्फ झीनक, मोहम्मद असद हाजी अब्दुल खालिक अफजल अलाउद्दीन दिलशाद तथा वसीम निवासी हैदराबाद के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित किया। दौरान मुकदमा हाजी मोहम्मद सुलेमान, नजीबुल्लाह, हमीदुल्लाह उर्फ झीनक तथा हाजी अब्दुल खालिक की मृत्यु हो गई। अभियोजन पक्ष की तरफ से डीजीसी फौजदारी प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी तथा एडीजीसी दीपक कुमार मिश्रा ने कुल नौ गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया।

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपित हुसैन अहमद , मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर, असरार अहमद, मोहम्मद याकूब, अली जहीर, इरशाद,मोहम्मद असहद, अफजल, अलाउद्दीन, दिलशाद तथा वसीम को अली अकबर की हत्या का दोषी करार दिया। अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तिथि नियत की है।

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