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टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर 8 में पहुंची टीमों को 2028 टी20 विश्व कप का सीधा टिकट

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दुबई, 18 फरवरी (हि.स.)। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने स्पष्ट किया है कि टी20 विश्व कप 2026 के सुपर 8 स्टेज में जगह बनाने वाली सभी टीमों ने 2028 में होने वाले अगले टी20 विश्व कप के लिए स्वतः क्वालीफाई कर लिया है। अगला टूर्नामेंट आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2028 ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा।

सुपर 8 की तस्वीर तब पूरी हुई जब पाकिस्तान ने नामीबिया को हराकर अगले दौर में प्रवेश किया। ग्रुप ए से पाकिस्तान के साथ भारत आगे बढ़ा। ग्रुप बी से श्रीलंका और जिम्बाब्वे, ग्रुप सी से वेस्टइंडीज और इंग्लैंड, जबकि ग्रुप डी से साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड ने जगह बनाई।

2028 संस्करण के सह-मेजबान होने के कारण ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को पहले ही स्वतः प्रवेश मिल चुका था। अब नियमों के तहत सुपर एट्स में पहुंची सभी टीमें भी सीधे क्वालीफाई कर चुकी हैं।

12 स्वतः क्वालीफायर टीमों की सूची आईसीसी रैंकिंग के आधार पर पूरी होगी। तय कट-ऑफ तारीख तक रैंकिंग में शीर्ष पर रहने वाली अगली तीन टीमें भी जगह बनाएंगी। मौजूदा स्थिति में बांग्लादेश, अफगानि्तान और आयरलैंड इन स्थानों के प्रबल दावेदार हैं, क्योंकि कट-ऑफ से पहले उनके कोई अंतरराष्ट्रीय मैच निर्धारित नहीं हैं।

शेष आठ स्थान क्षेत्रीय क्वालीफिकेशन के जरिए भरे जाएंगे, जहां अलग-अलग क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धात्मक मजबूती के आधार पर कोटा तय होगा। इस तरह 20 टीमों वाला 2028 टी20 विश्व कप एक बार फिर वैश्विक प्रतिस्पर्धा का बड़ा मंच बनने जा रहा है।

यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले दिन तीन लाख से अधिक परीक्षार्थी रहे अनुपस्थित

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प्रयागराज, 18 फ़रवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं बारहवीं की पहले दिन दोनों पालियों की परीक्षा सकुशल संपन्न हुई। हालांकि हाईस्कूल में तीन बच्चे नकल करते हुए पकड़े गए। कुल 5 छदम परीक्षार्थी पकड़े गए। परीक्षा के दौरान पांच प्रथम सूचना रिपोर्ट की गई है। यह जानकारी बुधवार को बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने दी।

उन्होंने बताया कि प्रथम पाली में हाईस्कूल में कुल 2754376 पंजीकृत थे। जिसमें से 2583055 उपस्थित हुए। जबकि 171321 परीक्षा में अनुपस्थित रहे। इसी तरह द्वितीय पाली में बारहवीं में कुल 2499370 पंजीकृत हुए थे। लेकिन परीक्षा में 2356983 छात्र उपस्थित हुए, जबकि 142387 परीक्षा में शामिल नहीं हुए। जिन्हें अनुपस्थित कहेंगे। इस तरह हाईस्कूल एवं बारहवीं में कुल 5253746 पंजीकृत हुए थे। जबकि 4940038 ही परीक्षा में शामिल हुए। वहीं कुल दोनों पालियों में 313708 परीक्षा में अनुपस्थित मिले। परीक्षा के दौरान तीन हाईस्कूल के छात्र अनुचित साधनों का प्रयोग करते हुए पकड़े गए। हापुड़ जिले में दो और बरेली में नकल करते एक छात्र पकड़ा गया है। पांच ऐसे परीक्षार्थी पकड़े गए जो दूसरे के स्थान पर परीक्षा देते हुए पकड़े गए। प्रदेश के आगरा, फतेहपुर, कन्नौज, कौशाम्बी, एवं इटावा में एक-एक नटवर लाल पकड़े गए।

सपा प्रतिनिधिमंडल ने वोट काटने की शिकायत उप्र चुनाव आयोग से की

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लखनऊ, 18 फ़रवरी (हि.स.)। समाजवादी पार्टी (सपा)के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को बताया कि चुनाव आयोग के उप्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से आज हमारे प्रतिनिधिमंडल ने मिलकर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए वोट काटने को लेकर ज्ञापन सौंपा है। यह एक ऐसी आशा है जो हर इंसान के अंदर बैठे ईमानदार जमीर से दुनिया हमेशा करती आई है। सदैव ये नहीं होता कि लोग कुछ गलत करते हैं, कभी-कभी सत्ताधारी दल के लोग अधिकारियों को गलत करने पर मजबूर भी करते हैं। बचपन में हमने ‘पंच परमेश्वर’ की जो कहानी सुनी थी, उस पर हमारा एतबार आज भी कायम है।

एसआईआर में फार्म 7 की अनगिनत धांधलियों और गड़बड़ियों को लेकर हमारी जो आपत्तियाँ और ठोस साक्ष्य हैं, उनका संज्ञान लेकर चुनाव आयोग न्यायसंगत निर्णय लेगा और इस अपराध के लिए कानूनी कार्रवाई करते हुए दोषियों के खिलाफ एफआईआर भी करेगा, ये हमारा अटूट विश्वास है। चुनाव आयोग जब अपने गौरवशाली अतीत के प्रति सजग रहेगा तभी लोकतंत्र बचेगा और चुनाव आयोग के हर अधिकारी का मान-सम्मान भी।

टैरिफ वार से भारत का कुछ नहीं बिगड़ेगा : डॉ मोहन भागवत

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लखनऊ, 18 फ़रवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने बुधवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में कहा कि टैरिफ वार से भारत का कुछ नहीं बिगड़ेगा। हम किसी देश से नहीं दबेंगे, खड़े रहेंगे। कुछ दिन बाद सबकुछ सामान्य हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था पूंजीपतियों और बैंको में हाथों में नहीं, हमारे घरों में है। भारत के पास इतना सामर्थ्य है कि वह दबाव सहन करके भी आगे बढ़ सकता हैं।

उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म ही सच्चा मानव धर्म है। दुनिया मे पंथ निरपेक्षता वाला कोई समाज है तो वह हिन्दू समाज है। संघ का काम देश के लिए है। अनेक जाति, पंथ संप्रदाय बताने से अच्छा है कि हम सब अपनी पहचान हिन्दू मानें।

उन्होंने कहा सामाजिक समरसता समाज मे एकता का आधार है। जाति, भाषा की पहचान महत्वपूर्ण नहीं हैं। हम सब हिन्दू हैं यह भाव रखना होगा। जाति नाम की व्यवस्था धीरे-धीरे जा रही है। तरुण पीढ़ी के आचरण में यह दिख रहा है। संघ में किसी की जाति नहीं पूछी जाती है। सब हिन्दू सहोदर हैं, इस भाव से काम करते हैं। समाज से जाति को मिटाने के लिए जाति को भुलाना होगा। समाज में जिस दिन जाति-पाति को महत्व नहीं मिलेगा, उस दिन जाति पर राजनीति करने वाले नेता भी बदल जाएंगे।

बच्चों को पहले घर में धर्म की शिक्षा दें

उन्होंने कहा कि दूर-दूर रहने वाले परिवार भावनात्मक रूप से जुड़े रह सकते हैं। हमें अपने बच्चों को नाते रिश्तेदारों, संबंधियों से मिलाते रहना चाहिए। परिवारों को वर्ष में एक बार कुल परंपरा परिवार के संस्कार के निर्वहन के लिए एकत्रित होना चाहिए। इससे परिवारों में पीढ़ियों का जुड़ाव बना रहता है। एक अच्छे परिवार से अच्छे समाज का निर्माण होता है। उन्होने संयुक्त परिवारों में हो रहे विघटन के संदर्भ में कहा कि आधुनिकता हमारी रगों में है लेकिन हम पश्चिमीकरण के विरोधी हैं।उन्होंने कहा कि हम अपने बच्चों को पहले घर में ही धर्म की शिक्षा दें। धन का प्रदर्शन करने की परंपरा हमारी नहीं रही है। संयुक्त परिवार में संस्कारों का वास होता है।

भक्तों के हाथ में होना चाहिए मंदिरों का नियंत्रण

मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के सवाल पर सरसंघचालक ने कहा कि हम भी यह चाहते हैं कि मंदिरों का नियंत्रण भक्तों के हाथों में हो। धर्माचार्य और सज्जन लोग मिलकर मंदिरों का संचालन करें। लेकिन इसके लिए हमें तैयारी करनी होगी। विश्व हिन्दू परिषद इस दिशा में काम कर रहा है। मंदिरों का पैसा राष्ट्रहित व हिन्दू कल्याण में लगना चाहिए।

व्यक्ति निर्माण करता है संघ

संघ व्यक्ति का निर्माण करता है। संघ की कार्यपद्धति में देने की बात है,लेने की नहीं। इसलिए हमारे समर्पित कार्यकर्ताओं में निराशा नहीं आती। अपने प्रयासों से अनेक गांवों को विकसित करने का काम संघ ने हाथ में लिया है। देश में पाँच हजार गांवों को संघ ने विकास के लिए चयनित किया है। जिसमें से 333 गाँव अच्छे बन गए हैं। ऐसे गांवों में जहां कुछ नहीं था, वहाँ ग्रामवासियों ने 12वीं तक विद्यालय बना दिये। गाँव में कोई मुकदमा नहीं हैं। भूमिहीन किसानों को भूमि मिली है। गाँव में ही रोजगार सृजित किया है। इससे गाँव के किसानों की उन्नति हुई है।

उन्होंने सज्जन शक्ति से आह्वान किया कि उन्हें किसी न किसी समाज परिवर्तन के प्रकल्प से जुड़कर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को जानने के लिए संघ की शाखा में आएं और संघ को जाने। संघ की शाखा में आना संभव न हो तो संघ से जुड़े कार्यक्रमों में आएं। अगर यह भी संभव नहीं हो सकता है, तो वे किसी न किसी सामाजिक गतिविधि से जुड़े।

महाराष्ट्र में मुस्लिम का पांच फीसदी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण खत्म

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मुंबई, 18 फरवरी (हि.स.)। महाराष्ट्र सरकार ने मुसलिम समुदाय का पांच फीसदी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण खत्म करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार के इस निर्णय पर विपक्ष ने तीव्र नाराजगी व्यक्त की है। पिछली कांग्रेस-राकांपा सरकार ने मराठों को 16 परसेंट और मुसलमानों को पांच परसेंट कोटा देने के लिए एक ऑर्डिनेंस जारी किया था।

उल्लेखनीय है कि 2014 में जब कांग्रेस-राकांपा सरकार ने मुसलिम समाज को पांच फीसदी और मराठा समाज को १६ फीसदी आरक्षण दिए जाने का अध्यादेश जारी किया था। लेकिन मराठा आरक्षण कानूनी चुनौतियों की वजह से अदालत ने खत्म कर दिया था। इसी तरह मुसलिम आरक्षण को बॉम्बे उच्च अदालत में कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था और अदालत ने कहा था कि धार्मिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता लेकिन इस अध्यादेश के जारी होने के 12 साल बाद देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने मुस्लिम समाज को नौकरी और शिक्षा में दिया जाने वाला पांच फीसदी आरक्षण खत्म कर दिया है। नए शासनादेश में कहा गया है कि सरकार ने 2014 के पहले के फैसलों और सर्कुलर को रद्द कर दिया है और स्पेशल बैकवर्ड कैटेगरी में मुसलमानों को जाति और नॉन-क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट जारी करना बंद कर दिया है।

विपक्ष ने इस कदम की आलोचना की है, और सरकार के ‘सबका साथ सबका विकास’ नारे पर सवाल उठाया है।

कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कहा, “हम इस फैसले की कड़ी निंदा करते हैं। 2014 में शिक्षा और नौकरी के लिए घोषित 5 फीसदी रिज़र्वेशन के बारे में पॉज़िटिव कदम उठाने के बजाय, सरकार ने बस पुराने प्रोसेस को खत्म कर दिया है। हाई कोर्ट के अंतरिम स्टे और ऑर्डिनेंस के पुराने हो जाने का हवाला देते हुए, सरकार ने मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर गहरा आघात किया है।”

महाराष्ट्र एमआईएम अध्यक्ष इम्तियाज जलील ने कहा है कि महाराष्ट्र सरकार का फैसला मुसलमानों के लिए “रमज़ान का तोहफ़ा” है। उन्होंने कहा, “हालांकि, हम फिर भी अपने लडक़े-लड़कियों से कहेंगे कि वे पढ़ाई न छोड़ें। अगर इंडिया पढ़ेगा, तो इंडिया तरक्की करेगा।” इम्तियाज जलील ने यह भी कहा कि मुसलिम समाज के मौलना मौलवी चुनाव के समय कुकुरमुत्ते की तरह उग आते हैं और अमुक पार्टी को वोट दो की अपील करते हैं। इन सभी मौलवी-मौलानाओं को अब मुसलिम समाज का नेतृत्व कर समाज को फिर से आरक्षण दिलाना चाहिए।

ट्रांसजेंडर और समलैंगिक जोड़े को लिव-इन रिलेशनशिप में रहने की अनुमति

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–हाईकोर्ट का पुलिस सुरक्षा देने का आदेश

प्रयागराज, 18 फरवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ट्रांसजेंडर और एक अन्य व्यक्ति के बीच लिव-इन रिलेशनशिप को संरक्षण प्रदान करते हुए, उनके परिवार वालों या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उनके जीवन में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने संविधान के अंतर्गत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार को सर्वोपरि बताते हुए, पुलिस को जरूरत पड़ने पर तत्काल सुरक्षा प्रदान करने का भी आदेश दिया है।

मामला मुरादाबाद जिले के मझोला थाना क्षेत्र से जुड़ा है। दोनों याची बालिग हैं और उन्होंने स्वेच्छा से लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का फैसला लिया है। याचियों का कहना था कि परिवार से ही उनकी जान-माल को खतरा है। स्थानीय पुलिस से सुरक्षा की मांग की, किंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट की शरण ली।

न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने कहा कि किसी भी बालिग व्यक्ति को अपनी मर्जी से अपना जीवनसाथी चुनने का पूरा अधिकार है और परिवार या समाज इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के नवतेज सिंह जोहर बनाम भारत संघ (2018) मामले का हवाला दिया, जिसमें समलैंगिक सम्बंधों को मान्यता देते हुए आईपीसी की धारा 377 समाप्त कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि ऐसे सम्बंध संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन नहीं करते। साथ ही, अकांक्षा बनाम यूपी राज्य (2025) मामले का जिक्र करते हुए कोर्ट ने पुष्टि की कि शादी न होने या शादी न कर पाने की स्थिति में भी जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार सुरक्षित रहते हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया-‘एक बार जब कोई बालिग व्यक्ति अपना जीवन साथी चुन लेता है, तो परिवार या किसी अन्य को उनके शांतिपूर्ण जीवन में बाधा डालने का कोई अधिकार नहीं है। राज्य का कर्तव्य है कि वह हर नागरिक के जीवन स्वतंत्रता की रक्षा करे।’ कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अगर याचिकाकर्ताओं के शांतिपूर्ण जीवन में कोई बाधा आती है, तो वे पुलिस कमिश्नर या एसएसपी से सम्पर्क करें। पुलिस तुरंत सुरक्षा प्रदान करेगी। अगर दस्तावेजी सबूत न हों, तो पुलिस ऑसिफिकेशन टेस्ट या अन्य कानूनी प्रक्रिया अपनाकर उम्र सत्यापित कर सकती है। हालांकि, अगर कोई अपराध दर्ज नहीं है, तो पुलिस जबरन कोई कार्रवाई नहीं करेगी।

ट्रांसजेंडरों से मेडिकल टेस्ट कराने की मांग सम्बंधित प्राधिकारी नहीं कर सकते: हाईकोर्ट

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–जिलाधिकारी के जारी प्रमाणपत्र ही उनकी पहचान का निर्णायक प्रमाण

प्रयागराज, 18 फरवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि पासपोर्ट में संशोधन के लिए ट्रांसजेंडरों से मेडिकल टेस्ट कराने की मांग सम्बंधित प्राधिकारी नहीं कर सकते। जिलाधिकारी द्वारा जारी प्रमाणपत्र ही उनकी पहचान का निर्णायक प्रमाण है।

संसद ने ऐसे लोगों के सामाजिक बहिष्कार के कारण विशेष कानून बनाया है, इसके लागू होने के बाद अब वह भी गरिमा और समान अधिकारों के हकदार हैं। उन्हें अपनी पहचान छिपाने की आवश्यकता नहीं है, जो उनके जन्मजात व्यक्तित्व के विपरीत है। कुशल आर गोयल की याचिका निस्तारित करते हुए न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है।

याची ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत जिलाधिकारी से प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। इसमें उसकी पहचान पुरुष के रूप में है, इसके बावजूद पासपोर्ट अधिकारी ने मेडिकल टेस्ट कराने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा, प्राप्त आवेदन के साथ चिकित्सा अधीक्षक या मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र के आधार पर और व्यक्तिगत संतोष के बाद जिलाधिकारियों को लिंग परिवर्तन का प्रमाण पत्र जारी करना आवश्यक है। याची को पासपोर्ट प्राधिकारी के समक्ष कोई अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है। उसकी पहचान और लिंग के प्रमाण के लिए केवल जिलाधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र पर कार्य करना चाहिए।

इस प्रकरण से जुड़े तथ्य यह हैं कि याची का जन्म महिला के रूप में हुआ था, लेकिन बाद में माता-पिता ने पहचान लिया कि वह ट्रांसजेंडर हैं। याची ने 2019 के अधिनियम के तहत जिलाधिकारी से प्रमाण पत्र प्राप्त किया, इसमें उसकी पहचान पुरुष के रूप में दर्ज है। उसने सभी औपचारिकताओं को पूरा किया था, इसके बावजूद 23 जून 2025 को पासपोर्ट अधिकारियों ने निर्देश दिया कि वह उनके पैनल के किसी क्लीनिक में पुनः चिकित्सा परीक्षण कराए। कोर्ट ने कहा, विवादित आदेश विशेष अधिनियम के तहत जारी प्रमाण पत्र का उल्लंघन है।

अधिनियम में स्पष्ट है कि कोई भी प्रतिष्ठान रोजगार, भर्ती, पदोन्नति और अन्य सम्बंधित मामलों में ट्रांसजेंडर से भेदभाव नहीं करेगा। प्रतिवादियों की तरफ से कहा गया था कि मांग अनुचित नहीं है। याची को जन्म प्रमाण पत्र में अपना नाम और लिंग बदलना होगा ताकि पासपोर्ट में आवश्यक संशोधन किया जा सके। कोर्ट ने कहा, आपत्तियां बिना ठोस कानूनी आधार हैं। विशेष अधिनियम ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को संरक्षण प्रदान करने के लिए बनाया गया था। वह अपने नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण ऐसे शरीर में पैदा हुए थे जो उनकी पहचान के अनुरूप नहीं थे।

हाईकोर्ट ने बीएचयू की प्रोफेसर चयन प्रक्रिया रद्द की

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नई समिति गठित करने का आदेश

प्रयागराज, 18 फरवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कला संकाय के नृत्य विभाग में प्रोफेसर पद पर हुई चयन प्रक्रिया को अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिया है।

खंडपीठ ने 16 फरवरी 2026 को सुनाए अपने फैसले में कहा कि चयन समिति का गठन विश्वविद्यालय नियमों के विपरीत था और विशेषज्ञों की नियुक्ति में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। अदालत ने सम्बंधित अभ्यर्थी की नियुक्ति भी निरस्त कर दी।

मामला डॉ. दीपांविता सिंह रॉय की याचिका से जुड़ा है, जो कथक की एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि कार्यकारी परिषद के अभाव में कुलपति ने आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर चयन समिति बनाई, जबकि यह मामला नियमित प्रमोशन का था और इसे आपात स्थिति नहीं माना जा सकता।

याचिका में यह भी कहा गया कि चयन समिति में शामिल दो विशेषज्ञ भरतनाट्यम पृष्ठभूमि की थीं, जबकि पद कथक विशेषज्ञ के लिए था। एक अन्य सदस्य के पास प्रोफेसर स्तर की आवश्यक शैक्षणिक योग्यता भी नहीं थी। साथ ही, एक अभ्यर्थी पर बाहरी विशेषज्ञों की सूची तैयार करने में भूमिका निभाने का आरोप लगाते हुए हितों के टकराव की बात उठाई गई।

विश्वविद्यालय ने दलील दी कि नियुक्ति “नृत्य विभाग” के लिए थी, किसी एक विधा के लिए नहीं। हालांकि अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रमोशन आपातकालीन मामला नहीं होता और चयन समिति में उसी विषय के विशेषज्ञ होना अनिवार्य है।

अदालत ने कुलपति को दो महीने के भीतर नई चयन समिति गठित करने का निर्देश दिया है, जिसमें केवल कथक विशेषज्ञ शामिल होंगे और सम्बंधित अभ्यर्थियों को समिति गठन प्रक्रिया से अलग रखा जाएगा, ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।

जिनेवा वार्ता बेनतीजा: रूस–यूक्रेन शांति बातचीत में नहीं निकला ठोस हल

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जिनेवा, 18 फरवरी (हि.स.)। जिनेवा में अमेरिका की मध्यस्थता से हुई रूस–यूक्रेन शांति वार्ता का ताजा दौर बिना किसी बड़े नतीजे के खत्म हो गया। दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष अगले सप्ताह अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश करने वाला है, ऐसे में इस वार्ता से उम्मीदें थीं, लेकिन प्रगति सीमित रही।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने जेनेवा में बातचीत के बाद कहा कि सबसे जटिल मुद्दों पर कोई सहमति नहीं बन सकी। उनके मुताबिक कुछ प्रारंभिक आधार जरूर तैयार हुआ है, लेकिन दोनों पक्षों की स्थितियां अभी अलग-अलग हैं और बातचीत “आसान नहीं” रही।

जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस प्रक्रिया को लंबा खींचने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्वी यूक्रेन के रूसी कब्जे वाले इलाकों की स्थिति और जापोरिजिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र का भविष्य सबसे विवादित मुद्दों में शामिल हैं। यह परमाणु संयंत्र फिलहाल मॉस्को के नियंत्रण में है।

वार्ता का दूसरा दिन महज दो घंटे में समाप्त हो गया, जिसे सीमित प्रगति का संकेत माना जा रहा है। इससे यह भी साफ हुआ कि किसी व्यापक समझौते तक पहुंचना अभी दूर की बात है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले दावा कर चुके हैं कि वे सत्ता में आते ही पहले दिन युद्ध खत्म कराने की कोशिश करेंगे। हालांकि जमीनी हालात और कूटनीतिक मतभेद फिलहाल समाधान को जटिल बनाए हुए हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि जब तक क्षेत्रीय नियंत्रण, सुरक्षा गारंटी और परमाणु सुविधाओं जैसे मुद्दों पर स्पष्ट सहमति नहीं बनती, तब तक किसी निर्णायक शांति समझौते की संभावना कम ही रहेगी।

हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘द वार्डरोब’ का पोस्टर आया सामने

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24 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होगी

अभिनेता रजनीश दुग्गल एक बार फिर डर के साए में दर्शकों का मनोरंजन करने को तैयार हैं। सुपरनैचुरल फिल्म ‘1920’ से पहचान बनाने वाले रजनीश इससे पहले ‘सांसें’ और ‘फिर’ जैसी फिल्मों में भी नजर आ चुके हैं। अब उनकी नई हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘द वार्डरोब’ चर्चा में है, जिसका पोस्टर और रिलीज तारीख जारी कर दी गई है। फिल्म का निर्देशन सौरभ चौबे ने किया है, जबकि निर्माण ज्योति राज गावली के बैनर तले हुआ है।

जारी पोस्टर में एक दरवाजे के पीछे छिपी डरावनी शक्ल वाली लड़की की झलक दिखाई गई है, जो फिल्म के रहस्य और भय का संकेत देती है। पोस्टर ने दर्शकों के बीच उत्सुकता और रोमांच बढ़ा दिया है। निर्माताओं का दावा है कि फिल्म में अलौकिक घटनाओं और मनोवैज्ञानिक डर का संयोजन देखने को मिलेगा।

फिल्म में रजनीश के साथ अभिनेत्री दिव्या अग्रवाल मुख्य भूमिका में नजर आएंगी, जो बिग बॉस ओटीटी की पहली विजेता रह चुकी हैं। ‘द वार्डरोब’ 24 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। अलौकिक हॉरर-थ्रिलर शैली की यह फिल्म दर्शकों को रोमांच और डर का नया अनुभव देने का दावा कर रही है।