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बाबा बासुकीनाथ में तमिलनाडु के राज्यपाल ने की पूजा-अर्चना

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दुमका, 17 फ़रवरी (हि.स.)। तमिलनाडु के राज्यपाल रविंद्र नारायण रवि ने मंगलवार को बासुकीनाथ धाम में सपरिवार पूजा अर्चना कर भोलेनाथ से आशीर्वाद प्राप्त किया।

तीर्थ नगरी में जिला प्रशासन के आला अधिकारियों ने राज्यपाल का स्वागत किया। इसके बाद राज्यपाल ने बाबा मंदिर के गर्भ गृह में विधि-विधान से पूजा अर्चना की। पूजा के बाद मंदिर प्रांगण में बाबा भोलेनाथ और माता पार्वती सहित अन्य देवी देवताओं की आरती उतारी। इसके बाद डीसी अभिजित सिन्हा ने राज्यपाल को बाबा बासुकीनाथ का स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

मौके पर मंदिर के पंडा धर्म रक्षिणी सभा ने राज्‍यपाल को बाबा बासुकीनाथ का फोटो और रुद्राक्ष को भेंट किया।

उल्‍लेखनीय है कि पूर्व आईपीएस अधिकारी रविंद्र नारायण रवि नागालैंड के राज्यपाल भी रह चुके हैं। इधर, राज्यपाल के तीर्थ नगरी में आगमन को लेकर जिला और स्थानीय प्रशासन ने मुकम्मल तैयारी कर रखी थी। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किया गया था।

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इंडो-नेपाल व्यापार मेला’ नई दिल्‍ली में 20 से 22 फरवरी तक पीएचडी चैंबर भवन में लगेगा

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नई दिल्‍ली, 17 फरवरी (हि.स)। ‘इंडो-नेपाल व्यापार मेला’ 20 से 22 फरवरी तक नई दिल्ली के पीएचडी चैंबर भवन में लगाया जायेगा। व्यापार मेला के इस दूसरे संस्करण में 65 प्रदर्शनी स्टॉल होंगे। यह ऐतिहासिक द्विपक्षीय मेला भारत–नेपाल आर्थिक कूटनीति को और सुदृढ़ करते हुए दीर्घकालीन क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देगा।

प्रेस क्लब में मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में एवरेस्ट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (ईसीसीआई) के अध्यक्ष युवराज बराल ने इंडो-नेपाल व्यापार मेला के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस व्यापार मेला के उद्घाटन सत्र में भारत में नेपाल के राजदूत शंकर प्रसाद शर्मा, मुख्य अतिथि भारत सरकार के पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ (एफएनसीसीआई) के अध्यक्ष चंद्र प्रसाद ढकाल सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रहेगी।

युवराज बराल ने बताया कि इंडो–नेपाल ट्रेड फेस्टिवल को व्यापार, पर्यटन, संस्कृति और नवाचार के माध्यम से द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने वाले एक परिवर्तनकारी मंच के रूप में परिकल्पित किया गया है। उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सार्थक साझेदारी विकसित करने, निवेश के अवसरों का विस्तार करने और दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने में यह महोत्सव सहायक सिद्ध होगा।

एवरेस्ट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के महासचिव डॉ. मोहन कार्की ने बताया कि ये व्‍यापार मेला भारत–नेपाल के बीच द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग, पर्यटन एकीकरण, सांस्कृतिक आदान–प्रदान तथा निवेश साझेदारी को सुदृढ़ करने वाले एक प्रमुख मंच के रूप में स्थापित हो चुका है। इस वर्ष के ‘इंडो-नेपाल व्यापार मेला’ में जलविद्युत एवं ऊर्जा साझेदारी, सीमा-पार व्यापार एवं कनेक्टिविटी, रामायण और बौद्ध सर्किट सहित पर्यटन एकीकरण, बैंकिंग, फिनटेक एवं डिजिटल अर्थव्यवस्था सहयोग, मीडिया एवं सांस्कृतिक कूटनीति, युवा सहभागिता, शिक्षा एवं नवाचार साझेदारी, स्टार्टअप इकोसिस्टम तथा इंडो–नेपाल सहयोग ‘विजन 2030’ जैसे विषयों पर 10 से ज्‍यादा उच्चस्तरीय सत्र और नीतिगत संवाद आयोजित किए जाएंगे, जिनमें 60 से अधिक विशेषज्ञ भाग लेंगे।

डॉ. कार्की ने बताया कि इसके अलावा व्यावसायिक नेटवर्किंग कार्यक्रमों तथा नीति-निर्माताओं, मंत्रियों, राजनयिकों, उद्योगपतियों, निवेशकों और उद्यमियों के बीच बी2बी और बी2जी बैठकों का भी आयोजन किया जाएगा। उन्‍होंने कहा कि आयोजकों का विश्वास है कि ये सत्र दोनों देशों के विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के हितधारकों को साझा विकास और सतत क्षेत्रीय सहयोग के नए अवसर तलाशने के लिए एक ही मंच पर लाएंगे। उन्‍होंने कहा कि महोत्सव में भारत और नेपाल के 60 से अधिक स्टॉल लगेंगे। आयोजकों का अनुमान है कि महोत्सव का अवलोकन 25 हजार से अधिक लोग करेंगे।

इंडो-नेपाल व्यापार मेला’ भारत में नेपाली उद्योगपतियों और व्यवसायियों के संगठन एवरेस्ट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (ईसीसीआई), नेपाली दूतावास, नेपाल पर्यटन बोर्ड तथा व्यापार एवं निर्यात प्रोत्साहन केंद्र के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। वर्ष 2008 में स्थापित ईसीसीआई में भारत के विभिन्न क्षेत्रों से 800 से अधिक उद्योगपति और व्यवसायी सदस्य के रूप में जुड़े हुए हैं।

बाबा महाकाल का शाही रिसेप्शन और नगर भोज 26 फरवरी  को

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उज्जैन, 17 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाशिवरात्रि पर्व के बाद आगामी 26 फरवरी को शाही रिसेप्शन और नगर भोज का आयोजन किया जाएगा। उज्जैन, 17 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाशिवरात्रि पर्व के बाद आगामी 26 फरवरी को शाही रिसेप्शन और नगर भोज का आयोजन किया जाएगा।

दरअसल, महाशिवरात्रि पर्व के बाद हर वर्ष उनके भक्तों द्वारा नगर भोज का आयोजन किया जाता है। तय दिन नगर कोट से वर बने भगवान शिव की बारात निकलती है,जिसमें भूत-पलीत सदृश्य भक्त शामिल होते हैं। वहीं नगर भोज में पूरे शहर को आमंत्रित किया जाता है। इसके लिए अलग से आमंत्रण पत्र भी छपवाया जाता है।ै

महाकाल आरती परिवार द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम इस वर्ष यह आयोजन 26 फरवरी को नृसिंह घाट स्थित कुमावत समाज धर्मशाला में होगा। आयोजन के तहत बाबा महाकाल का 26वां शाही रिसेप्शन और नगर भोज रहेगा। आयोजन के तहत बाबा महाकाल की भव्य बारात नगरकोट से प्रारंभ होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होकर सायं 7 बजे कुमावत धर्मशाला पहुंचेगी। बारात का स्वागत महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी रमन त्रिवेदी और दिनेश पुजारी करेंगे। रिसेप्शन के दौरान गायक किशन भगत, मनीष तिवारी और श्वेता जोशी भजनों की प्रस्तुति देंगे।

आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में सांसद अनिल फिरोजिया, समाजसेवी नारायण यादव, जमनालाल यादव, हरिसिंह यादव, रवि राय और पार्षद राजेश बाथम सहित गणमान्य नागरिक शामिल रहेंगे। आयोजन के पूर्व महाकाल मंदिर के मानसरोवर गेट पर महेंद्र कटियार मित्र मंडल द्वारा भजन प्रस्तुति के माध्यम से श्रद्धालुओं को नगर भोज का निमंत्रण दिया गया।

भोज में इंद्राणी, सीताफल रबड़ी, आम का रस, खीर, रसगुल्ला और काजू कतली शामिल होंगी। इसके अलावा तंदूरी रोटी, मिक्स वेज, पुरी, दाल-चावल, भजिया, आलू बड़ा और पापड़ कतरन का स्वाद भी भक्त लेंगे। आयोजन को खास बनाने के लिए कॉफी, आइस्क्रीम, पानी पतासी और अंत में पान की भी व्यवस्था की गई है।

महाकाल शयन आरती युवा शक्ति परिवारइधर रवि प्रदोष पर्व पर महाकाल शयन आरती युवा शक्ति परिवार के तत्वावधान में 1 मार्च को नरसिंह घाट मार्ग स्थित मांगलिक परिसर रघुकूल गार्डन में भंडारे का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि आयोजन के संरक्षक डॉ. रवि सोलंकी हैं। कार्यक्रम की जिम्मेदारी हरीश जोशी, शांतिलाल बैरागी, आदित्य जाट, राजेश खूबचंदानी, राजेश अग्रवाल और राजकुमार अग्रवाल संभाल रहे हैं। सहयोगी के रूप में घनश्याम चौधरी, राम राठौर, उज्जवल गोड़, संतोष सोलंकी, सतीश वर्मा, महेश वर्मा, आयुष नागर, अजय त्यागी, अभिजीत जाट, नीलेश हरोड़, हर्ष बागी, पंकज जैन, सावन रोचवानी, हेमंत खत्री, रोहित नागर, शैलू परमार और धर्मेन्द्र परिहार द्वारा निभाई जा रही है, वे तैयारियों में लगे हैं।

पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने पदोन्नति नियमों में बड़े बदलाव को दी मंजूरी

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कोलकाता, 17 फरवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने मंगलवार को राज्य सरकार के विभिन्न संवर्गों में लंबे समय से लंबित पदोन्नति संबंधी ठहराव को दूर करने और वरिष्ठ स्तर पर अनुभवी अधिकारियों की संख्या बढ़ाने के लिए पदोन्नति नियमों में बड़े बदलाव को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कैबिनेट बैठक के बाद यह जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (डब्ल्यूबीसीएस) संवर्ग की पदोन्नति और ट्रांस्फर नियमों में संशोधन किया गया है, ताकि कैरियर प्रगति को सुव्यवस्थित किया जा सके और विभिन्न राज्य सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित हो।

नए प्रावधान के तहत डब्ल्यूबीसीएस अधिकारियों को दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पूरी करनी होगी। इसके बाद उन्हें तीन वर्ष तक प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) के रूप में सेवा देनी होगी। कुल पांच वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद वे सीधे उपमंडल अधिकारी (एसडीओ) पद पर पदोन्नति के पात्र होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच वर्ष की सेवा के बाद डब्ल्यूबीसीएस अधिकारी को एसडीओ बनने का अवसर मिलेगा। यह निर्णय उच्च स्तर पर अनुभवी अधिकारियों की संख्या बढ़ाने और विभिन्न राज्य सेवाओं के बीच समानता लाने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने बताया कि यह फैसला विभिन्न विभागों के पदोन्नति संबंधी अभिलेखों की समीक्षा के बाद लिया गया।

सरकारी सूत्रों के अनुसार इस निर्णय से पहले 46 विभागों के आंकड़ों की विस्तार से जांच की गई।

कैबिनेट ने अन्य राज्य गठित सेवाओं में भी पदोन्नति संबंधी अड़चनों को दूर करने के लिए 20 प्रतिशत अतिरिक्त पद सृजित करने का नीतिगत निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल डब्ल्यूबीसीएस ही नहीं, बल्कि अन्य राज्य सेवाओं में भी चरणबद्ध तरीके से 20 प्रतिशत अतिरिक्त पद बनाए जाएंगे। इससे पदोन्नति में ठहराव कम होगा और विभिन्न संवर्गों के बीच संतुलन बना रहेगा।

सूत्रों के मुताबिक पुलिस सहित अन्य सेवाओं में भी इसी प्रकार के कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में इस फैसले का स्वागत किया गया है और उम्मीद जताई गई है कि इससे विभिन्न विभागों में लंबे समय से लंबित पदोन्नति संबंधी समस्याओं का समाधान होगा।

सीएमएचओ को भेंट किए नकली नोट और सोने के सिक्के

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जबलपुरः भ्रष्टाचार को लेकर अनोखा प्रदर्शन

जबलपुर, 17 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जबलपुर में जिला अस्पताल विक्टोरिया के सामने डॉ संजय मिश्रा के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मंगलवार को समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अनोखा प्रदर्शन किया। इस दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को प्रतीकात्मक रूप से नकली नोट और नकली सोने के सिक्के भेंट किए।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जिले में फर्जी अस्पताल धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। कई सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचते। कार्यकर्ताओं ने बरेला में एक प्रसूता की मौत और डिंडोरी में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों का हवाला देते हुए विभागीय लापरवाही बताई।

सपा नेता आशीष मिश्रा ने आरोप लगाया कि जिले का स्वास्थ्य तंत्र भ्रष्टाचार से ग्रस्त है। उन्होंने कहा कि अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहे हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब जनता बुनियादी इलाज के लिए भटक रही है।

प्रदर्शन के दौरान कुछ पीडि़त मरीज भी मौजूद रहे। जिन्होंने निजी अस्पतालों पर लापरवाही के आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

गले में तुलसी माला पहने संत प्रेमानंद की शरण में पहुंचे विराट और अनुष्का

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मथुरा, 17 फरवरी(हि.स.)। भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाज व कप्तान रहे विराट कोहली पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ मंगलवार को वृंदावन परिक्रमा मार्ग स्थित श्रीहित राधा कैली कुंज आश्रम में प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से मिले। चकाचौंध भरी दुनिया से दूर दोनों आस्था के रंग में रंग गए। माथे पर ब्रजरज का तिलक लगाए और गले में तुलसी की कंठी माला पहन संत प्रेमानंद के प्रवचन सुने तो साधक की भूमिका में आ गए। संत के अनुयायियों के बीच बैठ विराट व अनुष्का ने करीब एक घंटा श्रीराधा केलिकुंज में संत प्रेमानंद का आशीर्वाद लिया। दोनों उनके गुरु संत गोविंद शरण के आश्रम पहुंचे और उनका आशीर्वाद लिया।

गौरतलब हो कि स्टार बल्लेबाज विराट कोहली व फिल्म अभिनेत्री रहीं अनुष्का शर्मा सोमवार शाम छटीकरा मार्ग स्थित रेडिसन होटल में आ गए थे। उनका कार्यक्रम बेहद गोपनीय था। मंगलवार दोनों ने संत प्रेमानंद का आशीर्वाद लिया। विराट व अनुष्का के माथे पर ब्रजरज का राधावल्लभीय तिलक व गले में तुलसी की कंठी माला थी। श्रीराधा केलिकुंज की एकांतिक वार्ता में श्रद्धालुओं के बीच आगे की पंक्ति में बैठे विराट व अनुष्का पूरी तरह भक्ति भाव में डूबे रहे।

जब संत ने जीवन में संत से दीक्षा लेने और संत की पूर्ण शरणागति में अंतर बताया, तो बेहद तल्लीनता से सुनते रहे। संत ने कहा कि किसी से दीक्षा लो तो दीक्षा देने वाले का आदेश का पालन ही जीवन का सार है। गुरु के प्रति अपना सबकुछ समर्पित करना ही शरणागति है। सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रशंसकों को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण रहा, फिर भी विराट ने कार में से हाथ हिलाकर कई जगह प्रशंसकों का अभिवादन स्वीकार किया। विराट और अनुष्का की यह यात्रा पूरी तरह निजी और आध्यात्मिक बताई जा रही है। विराट कोहली और अनुष्का ने पहली बार संत प्रेमानंद से मुलाकात जनवरी 2023 में की थी। विराट की मुलाकात के बाद संत प्रेमानंद भी अचानक चर्चा में आ गए। इसके बाद टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के अगले ही दिन विराट और अनुष्का मई 2025 में संत प्रेमानंद के पास पहुंचे। दो माह पहले 15 दिसंबर को भी दोनों ने संत से मुलाकात की।

रूस से ले जाए गए 2,000 यूक्रेनी बच्चे वापस लाए गए : जेलेंस्की

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कीव, 17 फरवरी (हि.स.)। वोलोदिमिर जेलेंस्की ने घोषणा की है कि रूस ले जाए गए लगभग 2,000 यूक्रेनी बच्चों को वापस उनके घर लाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास उनके ‘ब्रिंग किड्स बैक’ अभियान के तहत लगातार चल रही मानवीय पहल का हिस्सा है।

जेलेंस्की के अनुसार, बच्चों की वापसी सरकार, नागरिक संगठनों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के समन्वित प्रयासों से संभव हो सकी। उन्होंने इस सहयोग के लिए सभी भागीदारों का आभार जताते हुए कहा कि यह लड़ाई बच्चों और देश के भविष्य से जुड़ी है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी माना कि चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। उनके मुताबिक, कई यूक्रेनी बच्चे अब भी रूस में हैं और उन्हें वापस लाने के प्रयास जारी रहेंगे।

जेलेंस्की ने दोहराया कि जब तक हर यूक्रेनी बच्चा सुरक्षित घर नहीं लौट आता, तब तक अभियान जारी रहेगा। यूक्रेन और रूस के बीच जारी तनाव के बीच बच्चों की सुरक्षित वापसी को मानवीय मुद्दा बताया जा रहा है।

सहारनपुर मे पूर्व एमएलसी व फरार गैंगस्टर इकबाल की 2.76 अरब की 56 सम्पत्तियां कुर्क

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सहारनपुर, 17 फ़रवरी (हि.स.)। सहारनपुर जिला प्रशासन ने बसपा के पूर्व एमएलसी व सपा बसपा सरकार के समय के खनन माफिया, गैंगस्टर मोहम्मद इकबाल उर्फ बाला की अवैध रूप से अर्जित 56 सम्पत्तियों को कुर्क किया है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश गिरोहबन्द एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1986 की धारा 14 (1) के तहत डीएम मनीष बंसल के आदेश पर की गई। कुर्क की गई सम्पत्तियों के प्रबंधन के लिए तहसीलदार बेहट को प्रशासक नियुक्त किया गया है।

प्रशासन के अनुसार, मोहम्मद इकबाल उर्फ बाला एक संगठित गिरोह का सरगना है। उसके बेटे मोहम्मद जावेद, मोहम्मद वाजिद, अलीशान, अफजाल और अन्य सहयोगी भी इस गिरोह में शामिल हैं। इनके खिलाफ वर्ष 2022 में थाना मिर्जापुर में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इकबाल पर जनपद, गैर जनपद और गैर राज्य के विभिन्न थानों में लगभग 50 मुकदमें दर्ज हैं।

जांच में सामने आया कि गिरोह ने वन क्षेत्रों से खैर समेत अन्य लकड़ी की चोरी, तस्करी, अवैध खनन और जमीनों पर अवैध कब्जे जैसे अपराध किए। आरोप है कि इन अवैध गतिविधियों से अर्जित धन का उपयोग सरकारी और निजी जमीनों को डराने-धमकाने तथा धोखाधड़ी के जरिए खरीदने या कब्जाने में किया गया। इसी अवैध कमाई से करोड़ों रुपये की सम्पत्तियां बनाई गईं।

प्रशासनिक आंकलन के अनुसार, कुर्क की गई इन जमीनों की वर्तमान बाजार कीमत लगभग 2 अरब 76 करोड़ रुपये है। ये सम्पत्तियां इकबाल, उसके परिजनों, आश्रितों और विभिन्न कंपनियों व सहयोगियों के नाम पर दर्ज थीं। विस्तृत जांच के बाद सभी 56 सम्पत्तियों को अवैध आय से अर्जित माना गया और उन्हें कुर्क कर लिया गया।

जिलाधिकारी के आदेश में कहा गया है कि प्रशासक नियुक्त तहसीलदार बेहट कुर्क सम्पत्तियों का उचित और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संगठित अपराध और अवैध संपत्ति के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि अपराधियों के आर्थिक आधार को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

छात्र अनुपात के अनुसार स्कूलों में टीचरों की तैनाती की जाय

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इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश

–हाईकोर्ट ने कहा, यू-डायस पोर्टल पर सही डेटा डाला जाय और उसके अनुरूप शिक्षक – छात्र अनुपात के अनुसार स्कूलों में टीचरों की तैनाती की जाय

–डीएम की कमेटी के एक माह में निर्णय लेने तक टीचरों को कोर्ट ने दी राहत

प्रयागराज, 17 फ़रवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि यूनिफाइड ड्रिस्ट्रिक्ट इनफार्मेशन सिस्टम फार एजुकेशन (यूडीआईएसई अथवा यू-डायस) पोर्टल पर सही और प्रमाणित डेटा सत्यापित कर डाला जाय और इसके अनुरूप ही सहायक अध्यापकों-प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति और तैनाती करें, ताकि निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखा जा सके।

कोर्ट ने जिलाधिकारी की कमेटी को याचियों के दाखिल होने वाले प्रत्यावेदन पर एक माह में निर्णय लेने का आदेश दिया है और तब तक अध्यापकों की वर्तमान स्थिति कायम रखने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान की एकलपीठ ने यह निर्देश देते हुए 157 उन शिक्षकों को तात्कालिक तौर पर राहत दे दी है, जिन्होंने राज्य सरकार के 14 नवम्बर 2025 के आदेश के क्रम में अपने पुनर्समायोजन को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा है कि सभी याची जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति के समक्ष एक सप्ताह के भीतर आपत्ति प्रस्तुत करें। समिति इन आपत्तियों की जांच करेगी और एक महीने के भीतर कानून के अनुसार तर्कसंगत आदेश पारित करेगी।

कोर्ट ने कहा, याचीगण ने आवश्यक तथ्यात्मक जानकारी नहीं दी है, जिससे कार्रवाई की वैधता की जांच करना मुश्किल हो रहा है। याचीगण को संस्थान-वार विवरण देना होगा, जिसमें स्वीकृत संख्या, कार्यरत संख्या और शिक्षकों की अधिकता या कमी की जानकारी हो। कोर्ट ने कहा प्रशासनिक कार्रवाई में तथ्यात्मक त्रुटियों के कारण प्रणालीगत असंतुलन हो सकता है और इससे छात्रों का हित प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में निष्पक्षता और तर्कसंगतता सुनिश्चित करने के लिए सीमित जांच करनी होगी।

कोर्ट ने कहा, पुनर्समायोजन मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। यदि कार्रवाई मनमानी है, गैर-मौजूद या असत्यापित डेटा पर आधारित है तथा इससे सार्वजनिक हित गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है तो संवैधानिक अदालतें शक्तिहीन नहीं हैं। अदालत ने पाया कि नवम्बर 2025 के सरकारी आदेशानुसार पुनर्समायोजन के लिए निर्धारित मानदंडों का पालन किया गया है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। याचीगण के अधिवक्ता ने कहा कि पूर्व में आदेश था कि जिलाधिकारी हर साल जुलाई से पहले शिक्षकों की स्वीकृत संख्या की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार समायोजन करते थे, लेकिन नवम्बर का आदेश 23 मई 2025 के आदेश से अलग है।

याचीगण का कहना था कि बच्चों के नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है। अदालत ने पाया कि प्रत्येक संस्थान में कम से कम दो शिक्षकों की आवश्यकता है और छात्र संख्या के आधार पर अतिरिक्त शिक्षकों की आवश्यकता है। जूनियर बेसिक स्कूल में 150 तथा सीनियर बेसिक स्कूल में 100 से अधिक छात्रों के लिए एक प्रधानाध्यापक की आवश्यकता है। अरुण प्रताप सिंह व 37 अन्य, संगीता सिंह पटेल और 42 अन्य, अभिषेक कुमार त्रिपाठी और 11 अन्य,स्वदेश कुमार और 57 अन्य तथा अमन राज और पांच अन्य की याचिकाओं को एक साथ सुना गया था। कोर्ट ने प्रकरण के निर्णय में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली रिसर्च एसोसिएट वैष्णवी केसरणी की भी प्रशंसा की है।

असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा 22 फरवरी को औपचारिक रूप से भाजपा में होंगे शामिल : मुख्यमंत्री डॉ. सरमा

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गुवाहाटी, 17 फरवरी (हि.स.)। असम प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा आगामी 22 फरवरी को औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। यह बात आज रात मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने भूपेन बोरा के साथ एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।

उल्लेखनीय है कि भूपेन बोरा बीते कल कांग्रेस पार्टी से औपचारिक रूप से इस्तीफा दिया था। उनको मनाने के लिए असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवब्रत सैकिया, असम कांग्रेस प्रभारी जितेंद्र सिंह समेत अन्य नेता बीते कल उनके घर गये थे। एक समय ऐसा माना जा रहा था कि भूपेन बोरा अपना फैसला बदल लेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

मुख्यमंत्री ने बीते कल ही कहा था कि वे भूपेन बोरा से उनके घर पर मंगलवार को मिलेंगे। अपने बयान के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. सरमा गुवाहाटी के घोड़ामारा स्थित भूपेन बोरा के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। जिसके बाद औपचारिक रूप से भूपेन बोरा के भाजपा में शामिल होने का मुख्यमंत्री ने ऐलान कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भूपेन बोरा का भाजपा में किस कार्यक्रम में शामिल होंगे, इसका निर्णय असम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया करेंगे। जल्द ही सभी चीजें साफ हो जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भूपेन बोरा अंतिम हिंदू नेता कांग्रेस में थे। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस में कोई भी हिंदू नेता नहीं है। डॉ. सरमा ने कांग्रेस के अन्य नेताओं पर भी कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भूपेन बोरा के साथ कांग्रेस के अन्य कई बड़े नेता भी भाजपा में शामिल होंगे।

भूपेन बोरा के कांग्रेस छोड़ने को लेकर राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। कांग्रेस के अंदर भारी उथल-पुथल की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। भूपेन का जाना कांग्रेस के लिए बड़ा आघात माना जा रहा है।