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पीसीएस मुख्य परीक्षा-2024 का रिजल्ट घोषित, 2719 अभ्यर्थी सफल

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प्रयागराज, 04 फ़रवरी (हि.स.)।

60 रिक्तियों को छोड़ते हुए 887 रिक्तियों पर लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर चयन होना है। साक्षात्कार के लिए अलग सूचना दी जाएगी। यूपी लोक सेवा आयोग के सचिव अशोक कुमार की ओर से रिजल्ट आज देर शाम घोषित किया गया है।

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अभिषेक पाठक की हाई-वोल्टेज ड्रामा फिल्म ‘हाउसवाइफ’ में दिखेंगी आलिया भट्ट

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अभिनेत्री आलिया भट्ट इन दिनों अपनी फिल्म ‘एल्फा’ को लेकर चर्चा में हैं, जो इसी साल रिलीज होने वाली है। इसी बीच खबर है कि उन्होंने एक और बड़े प्रोजेक्ट के लिए हामी भर दी है। बताया जा रहा है कि आलिया निर्देशक अभिषेक पाठक के साथ हाई-वोल्टेज ड्रामा फिल्म ‘हाउसवाइफ’ में नजर आएंगी। अभिषेक पाठक इससे पहले अजय देवगन अभिनीत सुपरहिट फिल्म ‘दृश्यम-2’ का निर्देशन कर चुके हैं। इस नई फिल्म में आलिया एक विवाहित महिला की भूमिका निभाती दिखाई देंगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्म की कहानी एक शादीशुदा जोड़े के इर्द-गिर्द घूमेगी और इसमें रिश्तों की जटिलताओं को भावनात्मक अंदाज़ में दिखाया जाएगा। मुख्य पुरुष किरदार के लिए अभिनेता राजकुमार राव से बातचीत जारी है। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट में रुचि दिखाई है, हालांकि अभी आधिकारिक अनुबंध नहीं हुआ है। अगर बात बनती है, तो यह पहली बार होगा जब आलिया भट्ट और राजकुमार राव बड़े पर्दे पर साथ नजर आएंगे।

बताया जा रहा है कि ‘हाउसवाइफ’ में आलिया केवल अभिनय ही नहीं करेंगी, बल्कि अपनी प्रोडक्शन कंपनी एटर्नल सनशाइन प्रोडक्शंस के जरिए सह-निर्माता की भूमिका भी निभाएंगी। इस फिल्म का निर्माण पैनोरमा स्टूडियोज के साथ मिलकर किया जाएगा। शूटिंग 2026 के मध्य, यानी अगस्त या सितंबर के आसपास शुरू होने की संभावना है। तब तक अभिषेक पाठक ‘दृश्यम 3’ की शूटिंग पूरी कर चुके होंगे। आलिया फिलहाल संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘लव एंड वार’ में रणबीर कपूर और विक्की कौशल के साथ काम कर रही हैं।

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किश्तवाड़ में सुरक्षाबलों से मुठभेड़ में जैश का एक और आतंकी ढेर

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किश्तवाड़, 04 फरवरी (हि.स.)। किश्तवाड़ जिले के दिच्छर इलाके में सुरक्षा बलों ने एक मुठभेड़ में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक और आतंकवादी को मार गिराया है। आज ही सुरक्षा बलों ने उधमपुर जिले में एक मुठभेड़ में दो आतंकवादियों को मार गिराया था। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की टुकड़ियों ने किश्तवाड़ इलाके में घेराबंदी और सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसके बाद भागे आतंकियों से फिर संपर्क हो गया है।

सेना की व्हाइट नाइट कोर ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर कहा कि किश्तवाड़ क्षेत्र में आतंकवादियों की तलाश में निरंतर जारी अभियान के दौरान घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में कई मुठभेड़ें हो चुकी हैं। चल रहे संयुक्त अभियान में सीआईएफ डेल्टा, व्हाइट नाइट कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने आज शाम लगभग 5.45 बजे किश्तवाड़ के दिच्छर इलाके में भाग रहे आतंकवादियों से फिर से संपर्क स्थापित किया।

सेना ने आगे कहा कि ऑपरेशन त्राशी-एक में एक आतंकवादी मारा गया। किश्तवाड़ क्षेत्र में आतंकवादियों की तलाश और उन्हें खदेड़ने का अभियान जारी है। इससे पहले आज ही सुरक्षा बलों ने उधमपुर जिले में एक मुठभेड़ में दो आतंकवादियों को मार गिराया था।

राष्ट्रपति ने ओडिशा में विकास परियोजनाओं का लोकार्पण−शिलान्यास किया

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज 4 फरवरी को  ओडिशा के रायरांगपुर में महाराजा श्रीराम चंद्र भंजा देव विश्वविद्यालय सूचना प्रौद्योगिकी परिसर का उद्घाटन किया और आयुष अस्पताल सह आयुर्वेदिक कॉलेज, ओडिशा कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय परिसर, तीरंदाजी केंद्र, शहर सौंदर्यीकरण और जल निकासी उन्नयन परियोजनाओं, सभागार और सांस्कृतिक केंद्र, लड़कियों के छात्रावास और नशामुक्ति केंद्र की 

आधारशिला रखी।

 अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार की पूर्वोदय परिकल्पना ओडिशा के विकास को प्राथमिकता देती है और मयूरभंज जिला इस परिकल्पना से काफी लाभान्वित हो रहा है।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये विकासोन्मुखी परियोजनाएं, संस्थाएं और योजनाएं इस क्षेत्र को लाभ पहुंचाएंगी और यहां के लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगराष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार जनजातीय भाइयों और बहनों के आर्थिक विकास के लिए विशेष प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री वन धन योजना के माध्यम से 90 से अधिक लघु वन उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) उपलब्ध कराना, सूक्ष्म ऋण योजना के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों के आदिवासी सदस्यों को ऋण देना और आदिवासी महिला सशक्तिकरण योजना के तहत अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता के कुछ उदाहरण हैं। सरकार बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं के लिए भी काम कर रही है। निजी समूहों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री-जनमन योजना लागू की गई है। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विद्युतीकरण किया गया है और दूरदराज के क्षेत्रों में 4जी इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई है। इन प्रयासों से आदिवासी क्षेत्रों में समग्र विकास की धारा प्रवाहित हो रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदाय के विकास के माध्यम से ही सबसे गरीब लोगों के उत्थान का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है कि जनजातीय समुदायों को सभी सरकारी कल्याणकारी और विकास योजनाओं का लाभ मिले। उन्होंने सभी से इन योजनाओं का लाभ उठाने और दूसरों को भी जागरूक करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय विकास सुनिश्चित होगा, जिससे राज्य का विकास होगा और अंततः देश का विकास होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने का हमारा संकल्प सरकार और नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से ही पूरा हो सकता है।

रुड़की में मंदिर के समीप बनी अवैध मजार ध्वस्त

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हरिद्वार, 04 फ़रवरी (हि.स.)। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के रुड़की क्षेत्र में एक मंदिर के समीप बनी अवैध मजार को प्रशासन की मौजूदगी में बुधवार को ध्वस्त कर दिया गया। जिला प्रशासन की ओर से इस अवैध संरचना को पूर्व में नोटिस जारी किया गया था, लेकिन निर्धारित समयावधि में कोई जवाब नहीं दिया गया।

जानकारी के अनुसार, सलेमपुर राजपुताना क्षेत्र में मंदिर के पास कुछ वर्ष पूर्व अवैध रूप से मजार का निर्माण किया गया था। क्षेत्र में आबादी बढ़ने के बाद स्थानीय लोगों ने इसे लेकर प्रशासन को कई बार ज्ञापन सौंपे थे। स्थानीय लोगों का कहना था कि यह अवैध संरचना सार्वजनिक मार्ग में बाधा उत्पन्न कर रही थी।

जिला प्रशासन की ओर से करीब दो सप्ताह पूर्व मजार पर नोटिस चस्पा किया गया था। लगभग एक माह बीत जाने के बावजूद कोई जवाब अथवा वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर शुक्रवार को प्रशासन की मौजूदगी में स्थानीय लोगों द्वारा उक्त अवैध संरचना को ध्वस्त कर दिया गया।

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि अवैध संरचना को नियमानुसार हटाया गया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में स्थानीय स्तर पर कई बार शिकायतें प्राप्त हुई थीं और यह संरचना सार्वजनिक मार्ग में बाधक बनी हुई थी।

एरॉन जॉर्ज के शतक की बदौलत भारत अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में अफगानिस्तान को 7 विकेट से दी शिकस्त

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भारत ने 311 का रिकॉर्ड लक्ष्य हासिल किया, फाइनल में इंग्लैंड से भिड़ंत तय

हरारे, 04 फ़रवरी (हि.स.)। एरॉन जॉर्ज के शानदार शतक की बदौलत पांच बार की चैंपियन भारतीय टीम ने 2026 आईसीसी पुरुष अंडर-19 विश्व कप के दूसरे सेमीफाइनल में अफगानिस्तान को सात विकेट से हराकर फाइनल में जगह बना ली। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए मुकाबले में भारत ने 311 रन के मुश्किल लक्ष्य को महज 41.1 ओवर में हासिल कर लिया और अपने 10वें वर्ल्ड कप फाइनल तथा लगातार छठे फाइनल में प्रवेश किया।

लक्ष्य का पीछा करते हुए एरॉन जॉर्ज ने दबाव भरे मैच में बेहतरीन बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। उन्होंने 104 गेंदों पर 15 चौकों और दो छक्कों की मदद से 115 रन बनाए और 110.58 की स्ट्राइक रेट से भारत की जीत की नींव रखी। उनके अलावा वैभव सूर्यवंशी ने विस्फोटक अंदाज में 33 गेंदों पर 68 रन बनाए, जबकि कप्तान आयुष म्हात्रे ने 39 गेंदों पर 62 रनों की तेज पारी खेली। अंत में विहान मल्होत्रा 47 गेंदों पर 38 रन बनाकर नाबाद रहे।

जॉर्ज ने सूर्यवंशी के साथ पहले विकेट के लिए 90 रन की साझेदारी की। इसके बाद उन्होंने दूसरे विकेट के लिए म्हात्रे के साथ 114 रन और तीसरे विकेट के लिए मल्होत्रा के साथ 96 रन जोड़कर लक्ष्य को आसान बना दिया।

इससे पहले अफगानिस्तान ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 4 विकेट पर 310 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से फैसल शिनोजादा ने 93 गेंदों पर 110 रन की शानदार पारी खेली, जिसमें 15 चौके शामिल थे। वहीं, उजैरुल्लाह नियाजई 86 गेंदों पर 101 रन बनाकर नाबाद रहे, जिसमें 12 चौके और दो छक्के शामिल थे। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 148 रन की अहम साझेदारी की।

भारत की ओर से गेंदबाजी में कनीशक चौहान और दीपेश देवेंद्रन ने दो-दो विकेट लिए, हालांकि अन्य गेंदबाज अफगान बल्लेबाजों पर ज्यादा अंकुश नहीं लगा सके।

लेकिन सूर्यवंशी, जॉर्ज और म्हात्रे की आक्रामक बल्लेबाजी के आगे अफगानिस्तान का स्कोर भी नाकाफी साबित हुआ। अब फाइनल मुकाबला 6 फरवरी को इसी मैदान पर भारत और इंग्लैंड के बीच खेला जाएगा।

संक्षिप्त स्कोर:

अफगानिस्तान 310/4 (फैसल शिनोजादा 110, उजैरुल्लाह नियाजई 101 नाबाद; कनीशक चौहान 2/55, दीपेश देवेंद्रन 2/64)

भारत 311/3, 41.1 ओवर (एरॉन जॉर्ज 115, वैभव सूर्यवंशी 68; नूरिस्तानी ओमरजई 2/64, वहीदुल्लाह जद्रान 1/67)

भारत ने सात विकेट से जीत दर्ज की।

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सुकमा में गोगुंडा की पहाड़ियों में टूटा नक्सल भय का प्रतीक

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सीआरपीएफ ने रमन्ना का स्मारक किया ध्वस्त

सुकमा, 04 फ़रवरी (हि.स.)। कभी जंगलों की खामोशी में छिपा डर, बारूद की गंध और अनकही आशंकाओं का प्रतीक रहा गोगुंडा क्षेत्र अब एक नई शुरुआत की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। चार दशकों से नक्सली आतंक का पर्याय बने कुख्यात नक्सली नेता रमन्ना के स्मारक को केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने बुधवार को ध्वस्त कर दिया।

यह कार्रवाई केवल एक ढांचे को गिराने तक सीमित नहीं रही बल्कि उस मानसिक भय को तोड़ने की दिशा में बड़ा कदम साबित हुई, जिसने वर्षों तक ग्रामीणों को जकड़ कर रखा था।

इस अहम अभियान को सीआरपीएफ की 74वीं वाहिनी ने अंजाम दिया। कमांडेंट हिमांशु पांडे के स्पष्ट निर्देशों पर असिस्टेंट कमांडेंट विदेखो एवं असिस्टेंट कमांडेंट अंकित सिंह के नेतृत्व में पूरी रणनीतिक तैयारी और सतर्कता के साथ यह कार्रवाई की गई। कड़े सुरक्षा घेरे के बीच नक्सली स्मारक को ध्वस्त कर यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि अब क्षेत्र में डर की राजनीति नहीं चलेगी।

जिस स्मारक को हटाया गया, वह कुख्यात माओवादी नेता रमन्ना का था, जो कभी तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में खौफ का दूसरा नाम माना जाता था। उस पर तीन राज्यों में कुल 2.40 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। उसकी मृत्यु के बाद भी माओवादी संगठन द्वारा उसकी विचारधारा को जीवित रखने के उद्देश्य से इस तरह के स्मारकों को ‘शहादत’ के प्रतीक के रूप में स्थापित किया गया था। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस स्मारक के पास से गुजरते समय लोग डर के कारण नजरें झुका लेते थे। बच्चों को चुप करा दिया जाता और महिलाएं रास्ता बदल लेती थीं। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल पत्थर का ढांचा नहीं बल्कि भय का स्थायी प्रतीक बन चुका था।

स्मारक ध्वस्त होते ही गांव का माहौल बदला नजर आया। पत्थरों के गिरने की आवाज़ के साथ वर्षों पुरानी खामोशी टूट गई और लोगों के चेहरों पर राहत दिखाई दी।

इस मौके पर सीआरपीएफ 74वीं वाहिनी के असिस्टेंट कमांडेंट विदेखो की ने कहा कि माओवाद केवल हथियारों के दम पर नहीं बल्कि डर और प्रतीकों के सहारे जीवित रहता है। ऐसे अवैध स्मारकों को हटाना जरूरी है ताकि भय की जड़ खत्म हो और विकास का रास्ता खुले।

सुकमा का गोगुंडा पहाड़ पिछले चार दशकों (40 साल) से नक्सलियों का अजेय किला माना जाता था। यहां नक्सलियों की भारी मौजूदगी के कारण सुरक्षाबल पहुंचने से बचते थे। हालांकि इलाके में सीआरपीएफ 74वीं बटालियन का नया कैंप स्थापित होने के बाद स्थितियां बदल गईं। अब यह क्षेत्र पूरी तरह से नक्सलियों के कब्जे से आजाद हो चुका है।

टॉप नक्सली कमांडर और सेंट्रल कमेटी मेंबर रमन्ना की मौत साल 2020 में हार्ट अटैक से हुई थी। उसकी मौत के बाद नक्सलियों ने उसकी याद में गोगुंडा की पहाड़ियों पर यह 20 फीट ऊंचा स्मारक तैयार किया था, जो नक्सलियों के प्रभाव का प्रतीक माना जाता था। नक्सली रमन्ना की याद में बनाए गए इस स्मारक को गिराने के लिए सीआरपीएफ 74वीं बटालियन और कोबरा 201 बटालियन ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया। जवानों ने स्मारक को चारों तरफ से घेरकर ध्वस्त कर दिया।

मणिपुर में एक उग्रवादी गिरफ्तार, हथियार एवं गोला-बारूद बरामद

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इंफाल, 04 फरवरी (हि.स.)। मणिपुर में पुलिस एवं सुरक्षा बल उग्रवादियों एवं अवैध हथियारों के विरूद्ध लगातार अभियान जारी रखे हुए हैं। इसी कड़ी में अलग-अलग अभियानों में एक उग्रवादी को जहां गिरफ्तार किया गया, वहीं भारी मात्रा में हथियार बरामद किया गया है।

मणिपुर पुलिस मुख्यालय द्वारा बुधवार काे दी गयी जानकारी के अनुसार सुरक्षा बलों ने आरपीएफ/पीएलए के एक एक्टिव कैडर, मीसनम कोरोहनबा लुवांग उर्फ कोरो (45) को इंफाल पश्चिम जिले के इंफाल थानांतर्गत कीशमथोंग टॉप लीराक में उसके घर से गिरफ्तार किया। उसके पास से एक मोबाइल फोन जब्त किया गया। पुलिस आरोपित से पूछताछ कर रही है।

वहीं दूसरी ओर सुरक्षा बलों ने इंफाल पश्चिम जिले के लमसांग थानांतर्गत लंबाल अवांग लीकाई से, अन्य चीजों के अलावा भारी मात्रा में हथियार बरामद किया गया है। बरामद हथियारों में एक स्थानीय निर्मित सिंगल बैरल बंदूक, एक 9 एमएम की पिस्तौल, मैगजीन के साथ छह अन्य पिस्तौलें, 64 अलग-अलग कैलिबर के कारतूस, तीन एसएलआर के खाली कारतूस, एक नंबर-36 एचई ग्रेनेड, एक डेटोनेटर, तीन ट्यूब लॉन्चिंग डिवाइस, 10 आर्मिंग रिंग, एक मैगजीन, चार लोहे की प्लेटें, दो छलावरण हेलमेट, तीन बीपी वेस्ट और एक गोला-बारूद कंटेनर बॉक्स शामिल हैं

स्टॉक मार्केट में एक्रेशन न्यूट्रावेद की शानदार शुरुआत

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मजबूत लिस्टिंग के बाद लगा अपर सर्किट

नई दिल्ली, 04 फरवरी (हि.स.)। आयुर्वेदिक और न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद बनाने वाली कंपनी ऐक्रेशन न्यूट्रावेद के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में जोरदार उछाल के साथ एंट्री करके अपने आईपीओ निवेशकों को खुश कर दिया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 129 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर इसकी लिस्टिंग 48.06 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 191 रुपये के स्तर पर हुई। लिस्टिंग के बाद लिवाली का जोर बन जाने के कारण थोड़ी देर में ही ये शेयर उछल कर 200.55 रुपये के अपर सर्किट लेवल तक आ गए। इस तरह पहले दिन के कारोबार में ही कंपनी के आईपीओ निवेशकों को 55.43 प्रतिशत का फायदा हो गया।

ऐक्रेशन न्यूट्रावेद का 25 करोड़ रुपये का आईपीओ 28 से 30 जनवरी के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से एवरेज रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 1.83 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्‌यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 1.01 गुना सब्सक्राइब हुआ था। वहीं, नॉन इंस्टीट्‌यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 2.08 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसी तरह रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 2.19 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इस आईपीओ के तहत 19.20 लाख रुपये के नए शेयर जारी किए गए हैं। आईपीओ के जरिये जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी नई मैन्युफैक्चरिंग मशीनरी खरीदने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्‌द्देश्यों में करेगी।

कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी को 28 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 82 लाख रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का शुद्ध लाभ उछल कर 2.61 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2025 में कंपनी को 2.33 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका है।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी लगातार बढ़ोतरी होती रही। वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 3.07 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 5.20 करोड़ और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 16.06 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2025 में कंपनी को 14.07 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है।

इस अवधि में कंपनी के कर्ज का बोझ भी बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2022-23 के अंत में कंपनी पर 1.97 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 2.17 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 3.86 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 तक कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ 4.43 करोड़ रुपये हो गया था।

इस अवधि में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में ये 72 लाख रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 4.86 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही के अंत तक ये 2.95 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2022-23 में 59 लाख रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 1.21 करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद 2024-25 में कंपनी का ईबीआईटीडीए 3.65 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं, मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में ये 3.29 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा।

        क्या विद्यालयों को बंद करने से भारत बनेगा विश्व गुरु ?                                                                 

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 निर्मल रानी 

 पिछले दिनों एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी शासित राज्य मध्य प्रदेश से एक निर्माणाधीन निजी स्कूल की इमारत को बुल्डोज़र से ढहा दिये जाने का समाचार प्राप्त हुआ। प्राप्त ख़बरों के अनुसार मध्य प्रदेश के बैतूल ज़िले के धाबा गांव के रहने वाले अब्दुल नईम इसी गांव में अपनी निजी ज़मीन पर एक निजी स्कूल बनवा रहे थे। परन्तु चूँकि निर्माणाधीन स्कूल संचालक का नाम ‘अब्दुल नईम’ था इसलिये प्रशासन ने उस भवन को स्कूल के बजाये मदरसा बताकर ढहा दिया। बताया जा रहा है कि जिस समय बुलडोज़र उस निर्माणाधीन स्कूल भवन को ध्वस्त कर रहा था उस समय ग्रामीण, प्रशासन से उसे न तोड़े जाने की गुहार लगा रहे थे। ख़ुद स्थानीय सरपंच हाथ जोड़कर प्रशासन से बुलडोज़र चलाने से मना करती रहीं परन्तु एसडीएम के आदेश पर बुलडोज़र चला दिया गया। ग्रामीणों में पहली बार यह आस बंधी थी कि यह स्कूल खुलने के बाद उनके बच्चे अब गांव में ही पढ़ पाएंगे परन्तु वे लोग मलबे के सामने खड़े होकर सवाल पूछते नज़र आये । उस पर ढिटाई यह कि ज़िला प्रशासन ने यह आरोप मढ़ दिया कि पंचायत ने ही स्कूल की निर्माणाधीन इमारत पर बुल्डोज़र चलवाया है जबकि सरपंच और उप सरपंच इस से साफ़ इनकार कर रहे हैं। ग़ौरतलब है कि लगभग दो हज़ार की आबादी वाला धाबा गांव आदिवासी बाहुल्य गांव है और इस गांव में केवल तीन ही मुस्लिम परिवार रहते हैं। अच्छे स्कूल के अभाव में ही इस गांव के कई परिवार बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए गांव से 10-15 किलोमीटर दूर तक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने के लिए भेजते हैं। इसी उद्देश्य से अब्दुल नईम ने स्कूल बनाने के लिए न केवल अपनी पूरी जमा-पूंजी लगा दी बल्कि लाखों रूपये लोगों से उधार भी लेकर अपने सपनों के इस स्कूल में लगा दिये थे। 

                 बड़ी अजीब बात है कि वर्तमान सरकार से ही जुड़े नेता मंत्री व समर्थक भारत को ‘विश्व गुरु’ बनाने का ढिंढोरा पीटते रहते हैं। तो क्या  विश्व गुरु भारत  का अर्थ शिक्षित भारत नहीं ? और यदि शिक्षित भारत का सपना साकार करना है तो शिक्षण संस्थाओं से दुश्मनी कैसी ? परन्तु दुर्भाग्य तो यही है कि विश्व गुरु बनने का जितनी ज़ोर ज़ोर ढिंढोरा पीटा जा रहा है उतनी ही तेज़ी से इसी सरकार के दौर में स्कूल भी बंद किये जा रहे हैं। केवल  2019 से 2024 तक  अनुमानतः लगभग 14,910 सरकारी स्कूल या तो बंद कर दिये गये या दूसरे स्कूल्स में समाहित कर दिये गये। कुल मिलाकर अब तक 89,441 सरकारी स्कूल बंद होने का उल्लेख है। इस दौरान निजी स्कूलों में वृद्धि हुई है जबकि सरकारी स्कूलों में कमी आई है। सबसे ज़्यादा स्कूल मध्य प्रदेश, ओडिशा, व जम्मू-कश्मीर राज्यों में बंद किये जाने की ख़बर है। जबकि गुजरात, पश्चिम बंगाल,महाराष्ट्र,पंजाब, राजस्थान के अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों सांबा, कठुआ, राजौरी, पूंछ, बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर में भी काफ़ी संख्या में स्कूल बंद किये गये। 

               स्कूल बंद करने के जो कारण बताये गये उनमें कहीं आधारभूत संरचना की कमी बताई गयी तो कहीं शिक्षकों की भारी कमी बताकर स्कूल बंद किये गए। कहीं कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बड़े स्कूलों में समाहित कर दिया गया। इसी तरह कुछ राज्यों में नये निजी स्कूलों की वृद्धि के चलते सरकारी स्कूलों पर दबाव बढ़ा और उन्हें बंद करना पड़ा। ज़ाहिर है इससे ग़रीब व निम्न वर्ग के बच्चों की शिक्षा में बाधा पड़ना स्वभाविक है। इसी तरह सरकार की सबसे ज़्यादा गाज मदरसों पर गिरी। देश के सैकड़ों मदरसों को या तो अवैध बताकर ढहा दिया गया या उन्हें बंद करवा दिया गया। भाजपा शासित असम,उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड बिहार,मध्य प्रदेश,व छत्तीसगढ़ राज्यों में अनेक मदरसे बंद किये गये। निःसंदेह यह क़दम ख़ासकर ग़रीब मुस्लिम अल्पसंख्यकों की शिक्षा के साथ भेदभाव के सिवा और कुछ नहीं क्योंकि 90% से ज़्यादा मदरसा छात्र ग़रीब पृष्ठभूमि से आते हैं। 

                जहाँ तक मदरसे में मिलने वाली शिक्षा का सवाल है तो इस्लाम धर्म व मुस्लिम समाज से नफ़रत करने वालों ने भारतीय मदरसों को साम्प्रदायिक शिक्षा के केंद्र के रूप में क्यों न दुष्प्रचारित किया हो परन्तु यदि आप मदरसों से शिक्षा प्राप्त महापुरुषों व विशिष्ट जनों पर नज़र डालें तो मदरसों के साम्प्रदायिक होने की गढ़ित धारणा स्वयं ही समाप्त हो जायेगी और यह महज़ एक प्रोपेगंडा प्रतीत होगा। मिसाल के तौर पर सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी ने मदरसा में ही शिक्षा हासिल कर फ़ारसी भाषा सीखी। इसी तरह सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने भी मदरसे से ही शिक्षा हासिल कर फ़ारसी का ज्ञान प्राप्त किया। तभी वे फ़ारसी में इतना निपुण थे कि उन्होंने अपनी मशहूर रचना ‘ज़फ़र नामा’ फ़ारसी में लिखी। सिख साम्राज्य के संस्थापक महाराजा रणजीत सिंह की तो दरबारी भाषा ही फ़ारसी थी जो कि मदरसा शिक्षा से जुड़ी थी। मराठा साम्राज्य के संस्थापक शिवाजी महाराज भी फ़ारसी भाषा में निपुण थे। उन्होंने फ़ारसी-संस्कृत शब्दकोश का संकलन करवाया।  शिवाजी महाराज  के दौर में फ़ारसी शिक्षा मदरसे से ही जुड़ी होती थी। इसी तरह हिन्दू सुधारक और ब्रह्म समाज के संस्थापक राजा राम मोहन राय ने भी बंगाल के मदरसा आलिया और पटना के मदरसा मुजीबिया में पढ़ाई की। उन्होंने फ़ारसी और अरबी सीखी और एक फ़ारसी अख़बार का संपादन भी किया। भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने भी ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा की कमी के कारण मदरसा में पढ़ाई की। भारतीय साहित्य की प्रमुख हस्ती प्रसिद्ध  लेखक व कहानीकार मुंशी प्रेमचंद ने वाराणसी के एक ऐसे मदरसे में पढ़ाई की, जहां ग़ैर-मुस्लिम छात्र भी बड़ी संख्या में पढ़ते थे।

                और मुस्लिम समाज की जो विशिष्ट हस्तियां मदरसा से शिक्षा प्राप्त हैं उनमें  भारत के पहले शिक्षा मंत्री और स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैयद अहमद ख़ान, ‘इंक़लाब ज़िंदाबाद’ का नारा देने वाले  प्रसिद्ध उर्दू कवि और स्वतंत्रता सेनानी हसरत मोहानी, स्वतंत्रता सेनानी व ‘सिल्क लेटर मूवमेंट’ के नेता मौलाना महमूद हसन देवबंदी जैसे अनेक लोगों के नाम शामिल हैं। आज भी बंगाल,झारखण्ड व बिहार जैसे कई राज्यों में केवल मुस्लिम नहीं बल्कि बड़ी संख्या में ग़ैर मुस्लिम ग़रीब बच्चे मदरसों में शिक्षा हासिल करते हैं। परन्तु सरकार क्या मदरसा तो क्या अन्य सरकारी स्कूल सभी को किसी न किसी बहाने बंद करने पर तुली है। सवाल यह है कि क्या मदरसे या विद्यालयों को बंद करने से भारत विश्व गुरु बन सकेगा ?                                                                       निर्मल रानी