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उत्तर प्रदेश पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा की तारीख घोषित, 8 से 10 जून तक होगी लिखित परीक्षा

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प्रदेश में कुल 32,679 पदों के लिए तीन दिन होगी लिखित परीक्षा, दो पालियों में होगा आयोजन

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होगी परीक्षा से जुड़ी सभी जानकारी व निर्देश

उत्तर प्रदेश पुलिस में बतौर सिपाही भर्ती होने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। योगी सरकार ने आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 के तहत होने वाली लिखित परीक्षा की तारीखें घोषित कर दी हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPBPB) की ओर से मंगलवार को जारी सूचना के अनुसार सिपाही भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा 8 जून (सोमवार), 9 जून (मंगलवार) और 10 जून (बुधवार) को आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा तीनों दिनों में दो-दो पालियों में कराई जाएगी। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से कुल 32,679 पदों को भरा जाएगा। सिपाही भर्ती परीक्षा से संबंधित अन्य जानकारी, परीक्षा केंद्र, एडमिट कार्ड एवं दिशा-निर्देश उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे।

अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत बना योगी सरकार का फैसला
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं को योगी आदित्यनाथ सरकार ने वर्तमान सिपाही भर्ती प्रक्रिया में बड़ी राहत दी है। अभ्यर्थियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस में आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर प्रस्तावित सीधी भर्ती-2025 के लिए अधिकतम आयु सीमा में एकमुश्त तीन वर्ष का शिथिलीकरण प्रदान किया गया है। सरकार द्वारा यह निर्णय उत्तर प्रदेश लोक सेवा (भर्ती के लिए आयु सीमा का शिथिलीकरण) नियमावली-1992 के नियम-3 के आलोक में लिया गया। यह फैसला 31 दिसंबर 2025 को जारी भर्ती विज्ञप्ति के अनुक्रम में 5 जनवरी 2026 को जारी शासनादेश के माध्यम से लागू किया गया, जिससे बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों को अवसर मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ जो आयु सीमा के कारण अब तक भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे थे।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा वर्ष 2024 में प्रदेश में कांस्टेबल के कुल 60,244 पदों पर भर्तियां की गई थीं। यह प्रदेश सरकार की अब तक की सबसे बड़ी भर्ती थी। भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत चयनित सभी पदों में से 20 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित रखते हुए उन्हें नियुक्ति प्रदान की गई है।

#उत्तरप्रदेश #पुलिससिपाहीभर्तीपरीक्षा

नाटो प्रमुख बोले- यूक्रेन समझौते को तैयार, रूस हमलों से ‘अराजकता’ फैला रहा

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ब्रसेल्स/कीव, 03 फरवरी (हि.स.)। नाटो महासचिव मार्क रुटे और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मंगलवार को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूस-यूक्रेन युद्ध, सुरक्षा गारंटी और संभावित वार्ता पर अहम बयान दिए। दोनों नेताओं ने कहा कि यूक्रेन किसी स्वीकार्य समझौते की दिशा में आगे बढ़ने को तैयार है, लेकिन रूस के ताजा हमले शांति प्रयासों के लिए नकारात्मक संकेत हैं।

जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस ने हालिया ऊर्जा युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन करते हुए रातभर हमले किए, जिनके “परिणाम” होने चाहिए। उन्होंने साझेदार देशों से चुप न रहने की अपील की और कहा कि यूरोप की सुरक्षा के लिए वायु रक्षा प्रणालियों तथा मिसाइलों से जुड़े लाइसेंस अहम हैं।

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि लगभग 8 लाख सैनिकों वाली यूक्रेन की सेना मौजूदा सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप है। उनके मुताबिक यूरोपीय संघ की सदस्यता दीर्घकालिक सुरक्षा ढांचे का हिस्सा है, लेकिन असली सवाल यह है कि भविष्य में हमले की स्थिति में यूरोप और अमेरिका क्या कदम उठाएंगे।

नाटो प्रमुख रुटे ने यूक्रेन के लिए बाध्यकारी सुरक्षा गारंटी की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने “कोएलिशन ऑफ द विलिंग” के तहत यूरोपीय बलों की तैनाती और अमेरिकी बैकस्टॉप को महत्वपूर्ण बताया। रुटे ने उम्मीद जताई कि नाटो देश इस वर्ष हथियार खरीद कार्यक्रम के तहत यूक्रेन के लिए बड़े वित्तीय आवंटन करेंगे। उन्होंने सहयोगियों के बीच “संतुलित बोझ-वितरण” की भी अपील की।

रुटे ने रूस के हमलों को नागरिक ढांचे को निशाना बनाने वाला बताते हुए कहा कि इससे आम लोगों के बीच अराजकता फैल रही है। उनके अनुसार, यूक्रेन वार्ता के लिए तैयार है, मगर रूस के ताज़ा हमले भविष्य की बातचीत से पहले खराब संकेत देते हैं।

मुरादाबाद : सामूहिक विवाह कार्यक्रम में अनियमितता ,समाज कल्याण मंत्री ने जांच के दिए आदेश

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मुरादाबाद, 03 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में 5 दिसंबर 2025 को आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में सामने आई अनियमितताओं को लेकर समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने सख्त रुख अपनाया है। मामले को गंभीरता से लेते उन्होंने जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है, जो मौके पर जाकर जांच करेगी और 12 फरवरी तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। समिति में समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक पीके त्रिपाठी, उपनिदेशक अमरजीत सिंह और जिला समाज कल्याण अधिकारी अनामिका सिंह शामिल हैं।

शिकायतों में सामने आया है कि सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान कई पात्र जोड़ों को निर्धारित विवाह उपहार सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं जिन जोड़ों को सामग्री वितरित की गई, उसकी गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। इसके साथ ही यह भी सामने आया है कि निर्धारित अधिकतम सीमा के विपरीत 100 से अधिक जोड़ों के विवाह कराए गए।

राज्यमंत्री असीम अरुण ने कहा कि समाज कल्याण विभाग की योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इन बिंदुओं पर होगी जांच

– सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शासन द्वारा निर्धारित अधिकतम जोड़ों की संख्या का पालन किया गया या नहीं। 100 से अधिक जोड़ों के विवाह की अनुमति किस स्तर पर दी गई।

-योजना का लाभ पाने वाले जोड़ों की पात्रता और अपात्र लाभार्थियों की स्थिति।

– सामूहिक विवाह कार्यक्रम के आयोजन और व्यवस्थाओं में कहां-कहां लापरवाही हुई।

-पात्र जोड़ों को विवाह के लिए तय उपहार सामग्री मिली या नहीं। जो उपहार सामग्री दी गई, उसकी गुणवत्ता ठीक थी या नहीं।

दिल्ली दंगा-2020 के 6 आरोपिताें को कड़कड़डूमा कोर्ट ने बरी किया

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नई दिल्ली, 03 फरवरी (हि.स.)। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने दिल्ली दंगा-2020 के छह आरोपितों को बरी करते हुए पुलिस की जांच पर सवाल खड़े किए हैं। एडिशनल सेशंस जज प्रवीण सिंह ने कहा कि पुलिस ने फर्जी चार्जशीट दाखिल किया।

कोर्ट ने जिन आरोपितों को बरी करने का आदेश दिया उनमें प्रेम प्रकाश ऊर्फ कालू, इशु गुप्ता, राजकुमार ऊर्फ सेवैया, अमित ऊर्फ अन्नू, सुरेंद्र सिंह और हरि ओम शर्मा शामिल हैं। इन आरोपितों के खिलाफ न्यू उस्मानपुर थान में दंगा करने के मामले में एफआईआर दर्ज किया गया था। कोर्ट ने आरोपितों को बरी करते हुए इस बात पर चिंता जताई कि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई। ऐसा होना इस केस को देख रहे पुलिस अधिकारियों की गंभीर लापरवाही का नतीजा है। कोर्ट ने तत्कालीन एसएचओ और संबंधित एसीपी की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त को आदेश की प्रति भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वो जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करें।

घटना 25 फरवरी, 2020 की है जब दिल्ली पुलिस को फोन पर एक सूचना मिली कि दुकानें तोड़ी जा रही हैं, आग लगाई जा रही है, नारेबाजी कर रहे हैं, डंडे ले रखे हैं। जब पुलिस टीम अजीजिया मस्जिद के पास सुदामापुरी पहुंची तो वहां फोन करने वाला मौजूद नहीं था। घटनास्थल का मुआयना करने पर पुलिस ने पाया कि बड़ी संख्या में ईंट और पत्थर के टुकड़े बिखरे पड़े हैं। 29 फरवरी को शिकायतकर्ताओं महबूब अली, आसिफ अली, मोहम्मद ताहिर और शोएब थाने पहुंचे और घटना के संबंध में शिकायत दर्ज करायी। इन शिकायतकर्ताओं के बाद दूसरे शिकायतकर्ता मोहम्मद रईस और खालिद ने भी दंगों के दौरान हुए नुकसान की शिकायत की।

कोर्ट ने पाया कि जिन गवाहों ने पुलिस के सामने आरोपितों की पहचान करने की बात कही उन्होंने कोर्ट ने आरोपितों को नहीं पहचाना। ऐसा होना पुलिस की जांच और इस मामले की देखरेख करने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की घोर लापरवाही का नतीजा है। फरवरी, 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और करीब 200 लोग घायल हुए थे।

आयकर विभाग की बाबा ग्रुप -चावल व्यापारियों के ठिकानों पर छापे समाप्त

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रांची, 02 फरवरी (हि.स.)। आयकर विभाग की अनुसंधान शाखा की बाबा ग्रुप और चावल व्यापारियों के ठिकानों पर की गयी छापेमारी मंगलवार की देर रात समाप्त हो गयी। अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि छापेमारी के दौरान 100 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति जब्त की गयी। इसमें 50 करोड़ रुपये का चावल का स्टॉक, 15 करोड़ रुपये के जेवरीत, पांच करोड़ रुपये नकद और संपत्ति के मूल्य में 25 करोड़ रुपये का अंतर शामिल है।

उल्लेखनीय है कि आयकर विभाग की अनुसंधान शाखा (रांची) ने 29 जनवरी को बाबा एग्रो, बाबा फुड प्रोसेसिंग और बाबा ग्रुप से जुड़े आढ़तियों (कमीशन एजेंट) के 45 ठिकानों पर झारखंड और बिहार से ठिकानों छापा मारा था। वर्ष 2026 में आयकर विभाग की और से की जाने वाली यह पहली छापेमारी है। यह कार्रवाई व्यापारियों की ओर से अपनी वास्तविक आमदनी छिपा कर टैक्स चोरी करने के मामले में की गयी थी।

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खेमचंद भाजपा विधायक दल के नेता: मणिपुर भाजपा

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-सरकार गठन का रास्ता साफ

इंफाल, 03 फरवरी (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मणिपुर यूनिट ने आज कहा कि मणिपुर में युमनाम खेमचंद सिंह का भाजपा विधायक दल के नेता के तौर पर चुनाव, हिंसा प्रभावित राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के केंद्र के इरादे को दिखाता है। सिंह के नेता चुने जाने के बाद राज्य में सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है। माना जा रहा है कि राज्य में बहुत जल्द नई सरकार का गठन होगा।

मणिपुर भाजपा के प्रवक्ता लाइमयूम बसंत शर्मा ने कहा कि इस फैसले से करीब एक साल के राष्ट्रपति शासन के बाद लोकप्रिय सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “हम युमनाम खेमचंद को विधायक दल के नेता के तौर पर चुने जाने की सराहना करते हैं। राज्य में करीब एक साल से राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है।”

शर्मा ने सिंह को पार्टी के सबसे सीनियर नेताओं में से एक बताया, जिनकी “विधायकों में सबसे साफ-सुथरी छवि है।” उन्होंने कहा कि वह “बातों के बजाय काम में विश्वास करते हैं, जैसा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में हुए विकास कार्यों से साफ है।”

शर्मा के अनुसार, सिंह का चुनाव “राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के केंद्र के साफ इरादे को दिखाता है” और वह “नागा और कुकी सहित सभी समुदायों को स्वीकार्य हैं।”

मंगलवार को विधायक दल के नेता के तौर पर सिंह के चुनाव से 60 सदस्यों वाली मणिपुर विधानसभा में सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है, जो 13 फरवरी, 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद से निलंबित थी।

सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में, मणिपुर भाजपा ने कहा, “युमनाम खेमचंद सिंह को मणिपुर के भाजपा विधायक दल के नेता चुने जाने पर हार्दिक बधाई… आपका अनुभव, समर्पण और नेतृत्व पार्टी को और मजबूत करेगा और मणिपुर के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगा।”

बासठ वर्षीय सिंह, जो एक पूर्व ताइक्वांडो खिलाड़ी हैं, 2017 और 2022 में भाजपा उम्मीदवार के तौर पर सिंगजामेई निर्वाचन क्षेत्र से मणिपुर विधानसभा के लिए चुने गए थे। उन्होंने 2017 से 2022 तक विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और 2022 में दूसरी बीरेन सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल हुए, जहां उन्होंने नगर प्रशासन और आवास विकास, ग्रामीण विकास और पंचायती राज और शिक्षा विभाग संभाले। पिछले साल 8 दिसंबर को, सिंह उखरुल के लिटन और कामजोंग जिले के चस्साद इलाकों में कुकी समुदाय के अंदरूनी तौर पर विस्थापित लोगों के लिए बनाए गए राहत कैंपों का दौरा करने वाले पहले मैतेई विधायक बने, जहां उन्होंने कुकी आईडीपी (आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों) से बातचीत की।

भाजपा के पास अभी मणिपुर में 37 विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 32 सीटें जीती थीं, लेकिन बाद में पांच जेडी (यू) विधायक भाजपा में शामिल हो गए। विधानसभा में नेशनल पीपल्स पार्टी, नागा पीपल्स फ्रंट, कांग्रेस, कुकी पीपल्स अलायंस, जनता दल (यूनाइटेड) और निर्दलीय सदस्य भी शामिल हैं। एक मौजूदा विधायक की मौत के बाद एक सीट खाली है।

मई 2023 से मणिपुर में इंफाल घाटी के मैतेई और पहाड़ी इलाकों के कुकी लोगों के बीच लंबे समय से जातीय हिंसा हो रही है, जिसमें 260 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।

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प्रदेश में शुष्क मौसम के साथ न्यूनतम तापमान में गिरावट के साथ सुबह घने कोहरे के आसार

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निचले क्षोभमण्डल में पंजाब के आसपास संकेंद्रित पश्चिमी विक्षोभ एवं उत्प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से आ रही हवाओं की मध्य भारत पर बने प्रतिचक्रवाती हवाओं के साथ हो रहे समागम के परिणामस्वरूप आज भोर में प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में तेज झोंकेदार हवाओं के साथ आरम्भ हुई वर्षा का दौर पूर्वाह्न में प्रदेश के मध्यवर्ती हिस्सों से होते हुए अपराह्न में पूर्वांचल तक पहुँच गया तथा इस दौरान 40-50 किमी./घंटा की तेज झोंकेदार हवाओं के साथ हल्की से मध्यम वर्षा के कारण प्रदेश के अधिकतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस तक की उल्लेखनीय गिरावट के साथ प्रदेश के ज्यादातर भाग में सामान्य या सामान्य से नीचे पहुँच गए|

उक्त पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव समाप्त होने के साथ ही 04 फरवरी से प्रदेश का मौसम शुष्क हो जाने से विकिरणीय शीतलन बढ़ने से आगामी 3 दिनों के दौरान प्रदेश के न्यूनतम तापमान में 3-5°C की गिरावट आने से इनके भी सामान्य के करीब पहुँच जाने की सम्भावना है| इसके अतिरिक्त प्रदेश में जारी घने से बहुत घने कोहरे के दौर में आगामी 05 फरवरी से वायुगति बढ़ने के कारण उत्तरोत्तर कमी आने की सम्भावना है, इसी क्रम में राजधानी लखनऊ में भी कल सुबह मध्यम से घना कोहरा पड़ने की सम्भावना है|

सोना-चांदी के भावों में आए उछाल से ललचा रहे असामाजिक तत्व…….!

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उज्जैन, 03 फ़रवरी (हि.स.)। धार्मिक नगरी उज्जैन के तकरीबन हर गली मौहल्ले में कोई एक भगवान का मंदिर स्थापित है। आस्था और धार्मिक मान्यताओं के चलते भी कालोनियों से लेकर मौहल्लों तक में देव स्थान निर्मित करके, प्राण प्रतिष्ठा के साथ प्रतिमाओं को विराजीत किया गया है। इन मंदिरों में वर्ष भर धार्मिक गतिविधियां संचालित होती है। क्षेत्र के लोगों द्वारा प्रतिदिन पूजन,अभिषेक किया जाता है।

इन रोजाना की गतिविधियों के चलते मंदिरों पर सामान्यतया प्रतिदिन सुबह से रात तक जहां चहल पहल रहती है वहीं मंदिरों में पूजा पाठ हेतु पुजारी तथा मंदिर के रखरखाव आदि के लिए सेवादार नियुक्ति रहते ही हैं। शहर की विभिन्न कालोनियों,मौहल्लों में मंदिरों का रखरखाव करने वाले भक्तों से चर्चा करने पर ज्ञात हुआ कि ऐसे मंदिरों में क्षेत्र के श्रद्धालुओं द्वारा भगवान के श्रृंगार हेतु जन सहयोग से सोने-चांदी के गहने भी बनवाए गए हैं,जिनमें से कुछ सामान्यतया प्रतिदिन श्रृंगार के साथ पहनाए जाते हैं। विशिष्ट पर्वो के लिए बनवाए गए गहने लॉकर में रहते हैं।

इन भक्तों की माने तो सोना-चांदी के भावों में आए उछाल के कारण अब असामाजिक तत्वों की निगाह में मंदिर आ गए हैं। असामाजिक तत्वों द्वारा अघोषित रूप से मंदिरों की इसी कारण से रैकी भी की ही जा रही होगी। ऐसे में मंदिरों में चोरी की वारदातों में वृद्धि होने की संभावना है। पिछले एक सप्ताह में हुई तीन चोरियां भी इसी कारण से हुई है। ताकि छोटे गहने,जोकि आम तौर पर भगवान को पहनाए ही जाते हैं,की चोरी भी उनके लिए भावों में आए उछाल के कारण हजारों से लाखों तक पहुंच सकती है।

इनकी है यह मांग

ऐसे में शहर के विभिन्न क्षेत्रों के नागरिकों से चर्चा की गई तो उनकी पुलिस विभाग से मांग रही कि मंदिरों में वहां के भक्तों की टोलियों की बैठकें ली जाए ओर जन सहयोग से सीसीटीवी केमरे लगाए जाएं ताकि शरारती तत्वों द्वारा सोने-चांदी के गहनों की चोरी की नियत से मंदिर के ताले तोडऩे पर फुुटेज के आधार पर बदमाशों को पकड़ा जा सके।

इनका कहना है…

इस संबंध में एसपी प्रदीप शर्मा से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि प्रमुख मंदिरों में तो सीसीटीवी केमरे लगे हुए है। अन्य मंदिरों में से अनेक में भक्तों द्वारा इतना व्यय उठाया नहीं जाने के कारण सीसीटीवी लगाना अनिवार्य नहीं किया जा सकता है। भक्तों की स्थानीय समितियां अपने स्तर पर पहल करके यह निर्णय लेती है तो स्वागत है। चोरियां बढऩे के मूल में सोने-चांदी के भावों में अत्यधिक उछाल आना है। ऐसे में वारदातें न हो,यह कहा नहीं जा सकता। वारदात रोकने का पुलिस का प्रयास पूरा है। रात्रि गश्त जारी है। फिर भी यदि श्रद्धालु चाहें और सीसीटीवी केमरे लगा लें तो बहुत ही अच्छा होगा।

यूपी में बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने सरकार से किया सवाल

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–सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भी बुलडोजर कार्रवाई जारी रखना क्या सत्ता का दुरूपयोग नहीं

प्रयागराज, 03 फरवरी (हि.स)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में बुलडोज़र से मकान गिराने की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की है। कहा कि नवम्बर 2024 में सुप्रीम कोर्ट के “बुलडोज़र जस्टिस” फैसले के बाद भी राज्य में दंड के तौर पर मकान तोड़े जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है।

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने सवाल उठाया कि क्या किसी अपराध के तुरंत बाद मकान गिरा देना सरकार की शक्ति का गलत इस्तेमाल नहीं है। अदालत ने कहा कि उसके सामने ऐसे कई मामले आए हैं, जहां एफआईआर दर्ज होते ही पहले नोटिस दिए गए और बाद में घरों को गिरा दिया गया।

अदालत ने कहा कि यह मामला सिर्फ सरकार के अधिकार का नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों (अनुच्छेद 14 और 21) से भी जुड़ा है। इसलिए कोर्ट ने कुछ अहम सवाल तय किए।

हाईकोर्ट ने कहा कि 1. क्या सुप्रीम कोर्ट के नवम्बर 2024 के निर्णय-विशेषकर उसके पैरा 85 और 86 का अनुपालन नहीं हो रहा है ? 2. क्या ढांचा गिराने का अधिकार अपने-आप में ध्वस्तीकरण को उचित ठहराता है। 3. क्या अपराध के तुरंत बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कार्यपालिका के विवेक का दुरूपयोग है ? 4. हाईकोर्ट राज्य के वैधानिक अधिकार और नागरिक के अनुच्छेद 21 व 14 के मौलिक अधिकारों के बीच टकराव को कैसे संतुलित करे ? 5. क्या ध्वस्तीकरण की “उचित आशंका” किसी नागरिक के लिए इस अदालत का दरवाजा खटखटाने का कारण बन सकती है; और यदि हां, तो ऐसी आशंका स्थापित करने के लिए न्यूनतम मानक क्या होगा? यह मामला 9 फरवरी को हाईकोर्ट में फिर सुना जाएगा।

यह मामला हमीरपुर के कुछ लोगों की याचिका से जुड़ा है। उनका कहना है कि उनके एक रिश्तेदार पर गंभीर अपराधों का केस दर्ज है, लेकिन वे खुद आरोपित नहीं हैं। फिर भी उन्हें डर है कि उनका घर, लॉज और आरा मिल तोड़े जा सकते हैं। उनका आरोप है कि उनकी कुछ सम्पत्तियां पहले ही सील कर दी गई हैं। राज्य सरकार ने कहा कि याचिका जल्दबाजी में दाखिल की गई है और लोगों को पहले नोटिस का जवाब देना चाहिए। सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया कि कानूनी प्रक्रिया के बिना कोई मकान नहीं तोड़ा जाएगा। लेकिन कोर्ट ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, तो इन सवालों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है।

संसद की सुरक्षा में पूरी तरह से सेंध लगी थी : हाईकोर्ट

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नई दिल्ली, 03 फरवरी (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिसंबर, 2023 में संसद की सुरक्षा में चूक के आरोपित मनोरंजन डी की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में पूरे तरीके से सुरक्षा चूक हुई है। जस्टिस प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता वाली पीठ ने उच्चतम न्यायालय के दिल्ली दंगे के आरोपितों की जमानत पर दिए गए फैसले में आतंकी कृत्य की परिभाषा का जिक्र करते हुए ये टिप्पणी की। उच्च न्यायालय मनोरंजन डी की जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 17 मार्च को करेगा।

सुनवाई के दौरान मंगलवार काे उच्च न्यायालय को ये बताया गया कि इस मामले में आरोपितों के खिलाफ आरोप तय करने पर ट्रायल कोर्ट में 6 फरवरी को सुनवाई होनी है। मनोरंजन डी के वकील केके मनन ने कहा कि याचिकाकर्ता पिछले दो साल से हिरासत में है, अभी तक आरोप तय नहीं हुए हैं। उच्चतम न्यायालय ये कई बार कह चुका है कि अगर ट्रायल में देरी हो रही हो और इसके जल्द पूरा होने के आसार नहीं है तो आरोपित को जमानत दी जा सकती है।

सुनवाई के दौरान केके मनन की दलीलों का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस के वकील रितेश बाहरी ने कहा कि आरोपितों ने साजिश रची और रंगीन कनस्तर, मोबाइल फोन इत्यादि का इंतजाम किया। कुछ आरोपित संसद के बाहर थे और कुछ संसद के भीतर। वकील बाहरी ने कहा कि जब संसद चल रहा था तो उस समय एक भयपूर्ण माहौल पैदा किया गया। आरोपितों ने सांसदों और स्टाफ को आतंकित किया। ऐसा करना देश की संप्रभुता पर खतरा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में अभी मुख्य गवाहों के परीक्षण नहीं हुए हैं। इस पर कोर्ट ने खुफिया विभाग पर सवाल करते हुए कहा कि खुफिया विभाग का इस पर क्या कहना है। आरोपित संसद के भीतर कनस्तर कैसे ले गए, ये पूरी तरह से सुरक्षा के चूक का मामला है।

उच्च न्यायालय ने 24 जुलाई, 2025 को मनोरंजन डी की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था। सुनवाई के दौरान मनोरंजन डी के वकील ने कहा कि संसद के अंदर नारेबाजी करते हुए धुएं के कनस्तर खोलना आतंकवादी कृत्य नहीं है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2 जुलाई, 2025 को इस मामले के दो आरोपितों नीलम आजाद और महेश कुमावत को जमानत दी थी।

दिल्ली पुलिस ने 15 जुलाई, 2024 को इस मामले में पूरक चार्जशीट दाखिल की थी। दिल्ली पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा मामले में 186, 353, 153, 452, 201, 34, 120बी और यूएपीए की धारा 13, 16, 18 के तहत चार्जशीट दाखिल किया था। दिल्ली पुलिस ने 7 जून, 2024 को पहली चार्जशीट दाखिल की थी, जाे करीब एक हजार पन्नों की है। दिल्ली पुलिस ने जिन आरोपितों के खिलाफ यूएपीए की धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की है उनमें मनोरंजन डी, ललित झा, अमोल शिंदे, महेश कुमावत, सागर शर्मा और नीलम आजाद शामिल हैं।

घटना 13 दिसंबर, 2023 की है जब संसद की विजिटर गैलरी से दो आरोपित मुख्य सभागार में कूदे। कुछ ही देर में एक आरोपित डेस्क के ऊपर चलते हुए अपने जूतों से कुछ निकाला और अचानक पीले रंग का धुआं निकलने लगा। इस घटना के बाद सदन में अफरातफरी मच गई। हंगामे और धुएं के बीच कुछ सांसदों ने इन युवकों को पकड़ लिया और इनकी पिटाई भी की। कुछ देर के बाद संसद के सुरक्षाकर्मियों ने दोनों युवकों को पकड़ा। संसद के बाहर भी दो लोग पकड़े गए जो नारेबाजी कर रहे थे और पीले रंग का धुआं छोड़ रहे थे।