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महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ के 45 घंटे अनवरत दर्शन

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मंगला आरती का समय परिवर्तित

—विशेष दर्शन अथवा स्पर्श दर्शन पर रोक,मेडिकल हेल्पडेस्क की समुचित व्यवस्था

वाराणसी, 07 फरवरी (हि.स.)। महाशिवरात्रि पर्व पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर शिवभक्तों के लिए 45 घंटे दर्शन पूजन के लिए खुलेगा। श्रद्धालु 45 घंटे अनवरत दर्शन पूजन कर सकेंगे। महाशिवरात्रि पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती का समय परिवर्तित रहेगा। मंगला आरती प्रातः 02:15 बजे से 03:15 बजे तक संपन्न होगी। इसके उपरांत गर्भगृह की सफाई के बाद सामान्य दर्शन प्रारंभ होंगे, जो लगातार 45 घंटे तक चलेंगे।

शनिवार शाम पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल, वाराणसी परिक्षेत्र के कमिश्नर एस राजलिंगम, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने धाम परिसर में उच्चस्तरीय बैठक कर महाशिवरात्रि पर्व को लेकर दिशा निर्देश दिया। अफसरों के गाइड लाइन के अनुसार महाशिवरात्रि पर्व पर श्री काशी विश्वनाथ धाम एवं उसके आसपास स्थित सभी विद्युत खंभों की टेपिंग होगी। धाम परिसर में विद्युत सुरक्षा संबंधी ऑडिट पूर्ण करने के लिए कमिश्नर एस.राजलिंगम ने निर्देश दिया। श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए धाम के भीतर दर्शन व्यवस्था के लिए बैरिकेडिंग, प्रमुख स्थानों पर खोया-पाया केंद्र, शुद्ध पेय जल की व्यवस्था तथा पब्लिक एड्रेस सिस्टम स्थापित होगा।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि श्रद्धालुओं से अपील की जाएगी कि वे धाम में प्रवेश करते समय प्रतिबंधित वस्तुएँ, जैसे—बड़े बैग, मोबाइल फोन, स्मार्ट/डिजिटल घड़ी, पेन, तंबाकू, पॉलीथीन बैग, प्लास्टिक की वस्तुएँ एवं अन्य निषिद्ध सामग्री अपने साथ न लाएँ तथा इन्हें अपने स्थान पर ही छोड़कर आएँ। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धाम परिसर में शुद्ध पेयजल, ग्लूकोज, ओ०आर०एस०, गुड़, तथा मेडिकल हेल्पडेस्क की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी संबंधित विभागों को दिए गए। नगर निगम को आगामी महाशिवरात्रि से पूर्व शेष दिनों में बंदरों एवं आवारा पशुओं के नियंत्रण हेतु आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में तय हुआ किया काशीवासियों के लिए प्रातः 04:00 बजे से 05:00 बजे तक के दर्शन नियम के संबंध में संबंधित पक्षों से बैठक कर व्यवस्था निर्धारित की जाएगी! इससे उन्हें सुगमता से दर्शन कराया जा सके। मीडिया के माध्यम से समस्त श्रद्धालुओं एवं दर्शनार्थियों से अपील किया गया कि वे खाली पेट धाम में दर्शन के लिए न आएँ तथा प्रतिबंधित वस्तुएँ अपने साथ न लाएँ। श्री काशी विश्वनाथ धाम श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित दर्शन उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। विशेष दर्शन अथवा स्पर्श दर्शन के लिए अनुरोध न करें, क्योंकि महाशिवरात्रि के अवसर पर इसे पूर्ण किया जाना संभव नहीं होगा।

जम्मू-कश्मीर को विद्युत की पूरी क्षमता का उपयोग करना चाहिए :अमित शाह

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जम्मू, 07 फ़रवरी (हि.स.)। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर में विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और केंद्र शासित प्रदेश में जलविद्युत परियोजनाओं की पूरी क्षमता का उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

यहां लोक भवन में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार विकसित और समृद्ध जम्मू-कश्मीर के निर्माण के लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्पित है।

गुरुवार देर शाम जम्मू पहुंचे और शुक्रवार को कठुआ जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास गुरनाम और बोबियान स्थित सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की अग्रिम चौकियों का दौरा कर अपने दो दिवसीय क्षेत्रीय दौरे की शुरुआत की। कठुआ से लौटने पर उन्होंने एक सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की जिसमें सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी सहित अन्य लोग उपस्थित थे। बैठक में जम्मू-कश्मीर को आतंकवाद से मुक्त करने पर जोर दिया गया।

उन्होंने कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का शत प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने और सभी विकास परियोजनाओं का लाभ लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। गृह मंत्री ने युवाओं को विकास से जोड़ने के लिए खेल अवसंरचना विकसित करने और खेल अकादमियों की स्थापना के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “इस संबंध में विभिन्न खेल निकायों के साथ बातचीत करके लगभग 200 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त करने के प्रयास किए जाएंगे।” शाह ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के माध्यम से जम्मू और कश्मीर में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाने चाहिए। एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जम्मू और कश्मीर को वित्तीय वर्ष 2025-26 में पहली बार पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएएससीआई) योजना के दायरे में लाया गया है, जिससे पूंजी परियोजनाओं के लिए 50 वर्षों के लिए ब्याज मुक्त ऋण प्राप्त करना संभव हो गया है।

शाह ने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत राजकोषीय अनुशासन केंद्र शासित प्रदेश के राजकोषीय घाटे को समय के साथ स्थिर करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा, “भारत स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर लगातार प्रगति कर रहा है। सरकार इस लक्ष्य की प्राप्ति में जम्मू और कश्मीर को अपना पूर्ण समर्थन देना जारी रखेगी।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर घूमने के लिए देशभर के पर्यटकों का उत्साह कम नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर घूमने के लिए देशभर के पर्यटकों का उत्साह कम नहीं हुआ है। यहां मौजूद पर्यटन क्षमता का लाभ उठाने के लिए अन्य राज्यों में जम्मू-कश्मीर के पर्यटन स्थलों का आक्रामक रूप से प्रचार करने की आवश्यकता है।” शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में नए पर्यटन स्थलों के विकास की योजना में हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में नए पर्यटन स्थलों के विकास की योजना में हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

पिछले साल 22 अप्रैल को लश्कर-ए-तैबा से जुड़े पाकिस्तानी आतंकवादियों ने दक्षिण कश्मीर के प्रसिद्ध पहाड़ी पर्यटन स्थल पहलगाम में पर्यटकों को निशाना बनाया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। जम्मू-कश्मीर के पर्यटन उद्योग को भारी झटका लगा था।

एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि शाह की यात्रा से भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का जम्मू-कश्मीर के विकास, शांति और सुरक्षा को सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने का दृढ़ संकल्प झलकता है। अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान गृह मंत्री ने आतंकवाद से लड़ते हुए शहीद हुए कई पुलिसकर्मियों के परिवारों से मुलाकात की और उन्हें नौकरी के पत्र सौंपे। भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी शुक्रवार को गृह मंत्री से मुलाकात की।

शाह ने हिंदी में एक पोस्ट में कहा, “मैंने जम्मू में राज्य पदाधिकारियों और जम्मू-कश्मीर भाजपा के विधायकों और सांसदों से मुलाकात की। भाजपा मोदीजी की विकास पहलों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए काम करती रहेगी। साथ ही, एक विकसित और सुरक्षित जम्मू-कश्मीर के सपने को साकार करने के लिए संगठन का विस्तार भी करेगी।”

हिन्दुत्व में ही सबकी सुरक्षा की गारंटी है : संघ प्रमुख डॉ भागवत

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मुंबई, 07 फरवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शनिवार को मुंबई में कहा कि हिन्दुत्व में ही सबकी सुरक्षा की गारंटी है। भाषा, भूषा, खान-पान रीति रिवाज में भिन्नता के बावजूद हम राष्ट्र और संस्कृति से हिन्दू हैं।

संघ प्रमुख डॉ. भागवत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुंबई में आयोजित “नए क्षितिज” कार्यक्रम के दूसरे सत्र को संबोधित कर रहे थे।

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि भाषा, भूषा, खान पान रीति रिवाज में भिन्नता के बावजूद हम राष्ट्र और संस्कृति से हिन्दू हैं, ऐसा कहने से आपको कुछ भी छोडऩा नहीं होगा और न ही आपकी पहचान संकट नहीं पैदा होगा। इसके लिए संवाद की आवश्यकता होती है। हिन्दू-मुस्लिम एक हैं, यह नारा ही गलत है। हम एक ही थे। वह भूल गए उसे याद दिलाने की आवश्यकता है। एक कालखंड में उन्होंने पूजा-पद्धति बदली, अब उसे छोड़ नहीं सकते। लेकिन अपना मूल याद कर अपनी संस्कृति के आधार पर जुड़ तो सकते हैं। संघ की शाखा में आकर एक घंटे शरीर मन बुद्धि से व्यायाम करना और शेष 23 घंटे अपनी सुविधा और सामथ्र्य के अनुसार अपने समाज के लिए कार्य करना ,यह भी एक मार्ग है। भारत अपने स्वत्व के आधार पर सब प्रकार से खड़ा हो, इसके लिए आप कुछ भी कर रहे हैं तो एक प्रकारसे आप संघ का ही कार्य कर रहे हैं। संघ के बारे में संघ को देखकर मन और मत बनाइये, यही मेरा आग्रह है। सही स्रोत से संघ को समझिए। संघ की शाखा, संघ के कार्यक्रम, संघ स्वयंसेवकों के आचरण और उनके घर से आपको संघ समझ में आएगा। तथ्यों के आधार पर यदि आप हमारा विरोध करेंगे तो भी हम आपका स्वागत करेंगे।

सर संघचालक ने कहा कि ग्राम विकास, गोसेवा आदि सर्वमान्य कार्यों से व्यवस्था परिवर्तन भले न हो पर इससे समाज में परिवर्तन आता है। समाज की सज्जन शक्ति को अच्छी तरीके से सक्रिय होने की आवश्यकता है और सभी एक दूसरे के पूरक हों। समाज की सज्जन शक्ति की सक्रियता और उनके बीच समन्वय के लिए ही पंच परिवर्तन का अभियान है। सामाजिक समरसता अर्थात अपने समाज के बीच बिना किसी भेदभाव के अपने संचार के क्षेत्र में सम्पूर्ण हिन्दू समाज के सभी वर्गों में अपने एक मित्र होने चाहिए। इसके लिए अलग से कुछ खर्च नहीं लगता और अलग से अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता। अपने घर के निकट चर्मकार का कार्य करने वाला या आपका माली ही हो, उसके साथ अपने कुटुम्ब के सदस्यों के समान व्यवहार करना, इससे अपने आप संदेश जाएगा। बच्चों के भीतर परिवार के संस्कार, यह 12 वर्ष की आयु तक दिए जाते हैं तो यह जीवन भर प्रभावी होते हैं। वर्तमान समय में परिवार के सभी सदस्य मोबाइल में अधिक समय बिताते हैं। आवश्यकता है कि सप्ताह में एक दिन परिवार के साथ सामूहिक चर्चा करना, साथ ही भोजन करना। सभी को प्रामाणिकता और निस्वार्थ बुद्धि से अपने समाज की सेवा करना और उसकी चर्चा परिवार में करना, इसे मंगल संवाद कहते हैं। ऐसा करने से परिवार और समाज में बहुत सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेगा। अपने घर की चारदीवारी के बीच भाषा, भूषा, भजन, हवन, भोजन, भ्रमण अपना ही होना चाहिए। अपनी भाषा में हस्ताक्षर से ही शुरू करें। उसके लिए किसी दूसरी या विदेशी भाषा की आवश्यकता क्या है। पंच परिवर्तन की बात स्वयंसेवकों ने अपने घरों में शुरू कर दी है। यह एक दिन में नहीं होगा लेकिन यह एक दिन अवश्य होगा। हम सम्पूर्ण समाज को भी पंच परिवर्तन के विभिन्न आयामों को अपनाने का आग्रह करते हैं।

आवास विकास परिषद में टेंडर पर ‘सेटिंग’ का खेल

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रिटायर कर्मचारी की फर्म पर करोड़ों के काम, मुख्यालय तक पहुंचा मामला

बरेली, 07 फरवरी (हि.स.) । आवास विकास परिषद की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि परिषद से सेवानिवृत्त एक कर्मचारी के पुत्र ने नियमों की अनदेखी कर पिता के नाम से संचालित फर्म को करोड़ों रुपये के टेंडर दिलाने में भूमिका निभाई। मामला उजागर होने के बाद इसे परिषद मुख्यालय लखनऊ भेज दिया गया है, जहां से रिपोर्ट तलब की गई है।

जानकारी के अनुसार, रिटायर कर्मचारी के पुत्र विनय कुमार ने आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से परिषद में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर तैनाती हासिल की। आरोप है कि इसी पद का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी सूचनाओं और औपचारिकताओं में प्रभाव डालकर पिता के नाम से संचालित काव्या इंटरप्राइजेज को लाभ पहुंचाया। हाल ही में फर्म द्वारा करीब सवा करोड़ रुपये के कार्य का टेंडर डाले जाने की चर्चा है। सूत्रों का यह भी दावा है कि इससे पहले भी फर्म को परिषद से कई काम मिल चुके हैं।

निविदा में लगाए गए अनुभव प्रमाण पत्रों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि नियमों के विपरीत दस्तावेज लगाए गए, हालांकि आधिकारिक स्तर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि कुछ अधिकारी और इंजीनियर पूरे घटनाक्रम से अवगत थे, लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी, जिससे मामला लंबे समय तक चलता रहा।

प्रकरण सामने आने के बाद मुख्यालय ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है और जांच के संकेत दिए हैं। जांच में आरोप सही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई संभव है।

इस संबंध में एक्सईएन राजेंद्र नाथ राम ने कहा कि विनय के पिता विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके नाम से फर्म होने की जानकारी मिली है। रिटायरमेंट के बाद कोई भी व्यक्ति टेंडर ले सकता है। मामले में तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।

मेलों में मौत के झूले: खुशी के टिकट पर बिकती ज़िंदगी

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−डॉ० प्रियंका सौरभ

हरियाणा के सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले में झूला टूटने की घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हमारे यहाँ मनोरंजन भी जान जोखिम में डालकर ही किया जाता है। जिस मेले को संस्कृति, कला और पर्यटन का उत्सव कहा जाता है, वही मेला एक पल में चीखों, अफरातफरी और मातम में बदल गया। झूले के अचानक टूटकर गिरने से एक पुलिस इंस्पेक्टर की मौत हो गई और तेरह लोग गंभीर रूप से घायल हुए। यह सिर्फ़ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का परिणाम है जहाँ सुरक्षा सबसे आख़िरी प्राथमिकता बन चुकी है।

मेलों में झूले हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहे हैं। बच्चों की हँसी, युवाओं का उत्साह और परिवारों की उम्मीदें—सब कुछ इन झूलों से जुड़ा होता है। लेकिन जब यही झूले मौत का कारण बन जाएँ, तो सवाल केवल तकनीकी खराबी का नहीं रहता, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढाँचे की लापरवाही उजागर हो जाती है। सूरजकुंड हादसा अचानक नहीं हुआ। यह उस लापरवाही की परिणति है, जिसे सालों से “चलने दो” कहकर नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसे झूलों की अनुमति कैसे दी जाती है? क्या इनके फिटनेस सर्टिफिकेट की कोई गंभीर जाँच होती है या फिर कुछ काग़ज़ों और हस्ताक्षरों से ही सब कुछ “मैनेज” कर दिया जाता है? हर बड़े मेले से पहले प्रशासन सुरक्षा के दावे करता है—ड्यूटी पर पुलिस, एंबुलेंस, दमकल वाहन—लेकिन झूलों की तकनीकी जाँच अक्सर औपचारिकता भर बनकर रह जाती है। जिस मशीन पर दर्जनों ज़िंदगियाँ झूल रही हों, उसकी गुणवत्ता, मेंटेनेंस और ऑपरेटर की ट्रेनिंग पर कोई सख़्त निगरानी क्यों नहीं होती?

यह पहली बार नहीं है जब किसी मेले या मनोरंजन पार्क में झूला गिरने से मौतें हुई हों। देश के अलग-अलग राज्यों में समय-समय पर ऐसे हादसे होते रहे हैं—कहीं बच्चों की जान गई, कहीं महिलाएँ घायल हुईं, कहीं पूरा परिवार उजड़ गया। हर बार वही कहानी दोहराई जाती है—जाँच के आदेश, मुआवज़े की घोषणा और कुछ दिनों का शोर। फिर सब कुछ भुला दिया जाता है, अगली दुर्घटना तक।

सूरजकुंड हादसे में एक पुलिस इंस्पेक्टर की मौत होना इस त्रासदी को और गंभीर बना देता है। जो व्यक्ति जनता की सुरक्षा के लिए तैनात था, वही स्वयं व्यवस्था की लापरवाही का शिकार हो गया। यह घटना प्रतीक है उस विडंबना की, जहाँ सुरक्षा देने वाला भी सुरक्षित नहीं है। सवाल यह है कि अगर एक अधिकारी की जान यूँ ही चली गई, तो आम नागरिक की सुरक्षा की क्या गारंटी है?

प्रशासन अक्सर ठेकेदारों पर दोष मढ़कर पल्ला झाड़ लेता है। कहा जाता है कि झूला निजी संचालक का था, मेंटेनेंस उसकी ज़िम्मेदारी थी। लेकिन क्या प्रशासन की ज़िम्मेदारी यहीं खत्म हो जाती है? क्या बिना कड़ी जाँच के किसी भी ठेकेदार को मौत के झूले लगाने की खुली छूट दी जा सकती है? अगर हाँ, तो फिर हादसे के बाद सिर्फ़ ठेकेदार को दोषी ठहराना एक तरह का धोखा ही है।

असल में यह समस्या सिस्टम की है। मेले अस्थायी होते हैं, लेकिन लापरवाही स्थायी। सुरक्षा मानकों को “अतिरिक्त खर्च” समझा जाता है और मुनाफ़े को सबसे ऊपर रखा जाता है। झूले पुराने होते हैं, कई बार दूसरे राज्यों से लाकर बिना समुचित जाँच के लगा दिए जाते हैं। ऑपरेटर अक्सर अप्रशिक्षित होते हैं, जिन्हें न मशीन की तकनीक की समझ होती है और न आपात स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग।

दुखद यह भी है कि हादसे के बाद प्रशासन की संवेदनशीलता केवल मुआवज़े की घोषणा तक सीमित रह जाती है। मृतक के परिवार को कुछ लाख रुपये देकर समझ लिया जाता है कि जिम्मेदारी पूरी हो गई। लेकिन क्या किसी की जान की कीमत कुछ लाख रुपये हो सकती है? क्या मुआवज़ा उस दर्द, उस खालीपन और उस अन्याय की भरपाई कर सकता है?

सवाल यह भी है कि क्या हमारे यहाँ मनोरंजन का मतलब ही जोखिम बन गया है? क्या मेले, झूले और उत्सव आम आदमी के लिए “लक आज़माने” की जगह बन चुके हैं—जहाँ ज़िंदा लौटना भी किस्मत पर निर्भर हो? यह सोच किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है।

सूरजकुंड मेला अंतरराष्ट्रीय पहचान रखता है। देश-विदेश से लोग यहाँ आते हैं। अगर ऐसे प्रतिष्ठित आयोजन में सुरक्षा का यह हाल है, तो छोटे कस्बों और गाँवों के मेलों की स्थिति का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है। वहाँ न जाँच होती है, न एंबुलेंस समय पर पहुँचती है और न ही किसी की जवाबदेही तय होती है।

अब ज़रूरत है केवल संवेदना जताने की नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की। हर मेले और मनोरंजन आयोजन के लिए सख़्त सुरक्षा मानक तय होने चाहिए। झूलों की तकनीकी जाँच स्वतंत्र विशेषज्ञों से कराई जाए, न कि औपचारिक समितियों से। ऑपरेटरों की ट्रेनिंग अनिवार्य हो और ज़रा-सी लापरवाही पर लाइसेंस रद्द किया जाए। सबसे अहम बात—हादसे की स्थिति में सिर्फ़ मुआवज़ा नहीं, बल्कि आपराधिक ज़िम्मेदारी भी तय की जाए।

आज सूरजकुंड में झूला गिरा है। कल यह किसी और मेले में गिरेगा, अगर हमने अभी भी आँखें मूँदे रखीं। सवाल यह नहीं है कि अगला हादसा कहाँ होगा, सवाल यह है कि क्या हम हर बार मौत के बाद ही जागेंगे? मेलों का मकसद खुशी बाँटना होता है, मौत नहीं। लेकिन जब खुशी के टिकट पर ज़िंदगी बिकने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि यह सिर्फ़ हादसा नहीं, एक अपराध है—और उस अपराध की ज़िम्मेदारी तय करना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

 

−डॉ. प्रियंका सौरभ, कवयित्री एवं सामाजिक चिंतक

कुंभ में पहुंचे 13 साल के नागा साधु, बने आकर्षण का केंद्र

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राजिम, 07 फ़रवरी (हि.स.)। राजिम कुंभ कल्प मेला में नागा साधुओं व संताें का आगमन लगातार जारी है। शनिवार काे पेशवाई के दौरान दत्तात्रेय मंदिर में अन्य नागा साधुओं के साथ में एक 13 साल के नागा साधू बैठे हुए थे। उन्होंने मीडिया काे बताया कि पिछले 4 साल से नागा साधु बना हुआ हूं मेरी उम्र 13 साल है। अर्थात 9 साल की उम्र में ही साधु संस्कृति की ओर इनका झुकाव हो गया था।

उन्हाेंने बताया कि मेरा मन लगा और साधुओं के सानिध्य में आने के चलते उनके द्वारा दिये गये ज्ञान को आत्मसात किया और सीधे नागा साधु बन गया। शिक्षा दीक्षा के बारे में पूछा तब बताया कि वह संस्कृत पढ़ते हैं। सुबह 3:00 बजे से उठ जाते हैं 4:00 बजे स्नान करने के लिए चले जाते हैं उसके बाद जप, तप, ज्ञान, माला जाप इत्यादि कृत्य में लीन रहते हैं। 9 साल की उम्र में मां-बाप का अपने बच्चों को छोड़ना बहुत मुश्किल होता है ऐसे में इस नन्हे साधु का कहना है कि मेरे माता-पिता साधु संस्कृति से प्रभावित थे, इसलिए उन्होंने रोका नहीं।

इसी तरह से यहां साधु संतों के आश्चर्य चकित करने वाले अनेक दृश्य देखे जा रहे हैं एक साधु तो 1100 रुद्राक्ष को अपने सिर पर रखे हुए हैं। दत्तात्रेय मंदिर में ही बैठे एक साधु ने बताया कि मुझे 30 बार हार्ट अटैक आ चुका है लेकिन फिर भी जिंदा हूं। जिसको राम रखेगा उसे मारेगा कौन और जिसे राम मारेगा उसे बचाएगा कौन। सब कुछ ऊपर वाले के हाथ में है। यह कुंभ पर्व भारतीय संस्कृति, संस्कार, समृद्धि एवं परंपराओं को पल्लवित कर रही है।

बसपा को कमजोर करने की हो रही साजिश : मायावती

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लखनऊ, 07 फरवरी (हि.स.)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने विपक्षी पार्टियों पर बसपा को कमजोर करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पार्टी को कमजोर करने के लिए लगातार साजिश की जा रही है। मायावती ने आरोप लगाया कि आज धर्म और जाति के नाम पर राजनीति हो रही है, जबकि जनता से जुड़े मूलभूत मुद्दों को जानबूझकर दरकिनार किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर मायावती ने शनिवार को पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ एक अहम बैठक की। लखनऊ में आयोजित इस बैठक में उन्होंने संगठन को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए। मायावती ने कहा कि बसपा कार्यकर्ता विरोधी दलों के साम, दाम, दंड और भेद जैसे हथकंडों के साथ-साथ कुछ स्वार्थी दलित संगठनों के घिनौने षडयंत्रों का डटकर मुकदमा करते हुए पार्टी संगठन को मजबूत बनाने में लगे हुए हैं, लेकिन चुनावी तैयारियों को ध्यान में रखकर संगठन में जरूरी फेरबदल किए जाने हैं। मायावती ने भरोसा जताया कि उत्तर प्रदेश की जनता की चाहत और पार्टी के संकल्प के अनुरूप ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर आधारित पूर्ण बहुमत की बसपा सरकार एक बार फिर प्रदेश में बनाई जाएगी।

बसपा प्रमुख ने इस दौरान भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश सरकार पिछले कुछ समय से जनहित के इन मुद्दों पर ध्यान देने की बजाए ज्या​दा​तर जाति व धर्म की आड़ में ही अपनी राजनीति चमकाने लगी रहती है। इससे समाज में आपसी द्वेष व नफरत की भावना पैदा हो रही है, जो देश व जनहित में ठीक नहीं है। प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के संबंध में मायावती ने कहा कि राज्य सरकार भी इसको लेकर चिंता जताती रहती है कि इसका समाधान यही है कि हर स्तर के अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि वे लोग नाम वोटरलिस्ट में शामिल कराने में सहानुभूतिपूर्व हर प्रकार से पूरा सहयोग करें ताकि खासकर गरीब, अशिक्षित लोग भी वोटर बनने में पिछड़ ना जाए। बसपा प्रमुख ने कहा कि संसद का वर्तमान बजट सत्र भी सरकार व ​विपक्ष के बीच जबरदस्त राजनीति व टकराव के कारण काफी हंगामेदार,निलंबन बायकॉट से ग्रश्त रहा, जबकि सभी को अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए।

बसपा प्रमुख ने कहा कि संसद का वर्तमान बजट सत्र भी सरकार व ​विपक्ष के बीच जबरदस्त राजनीति व टकराव के कारण काफी हंगामेदार, निलंबन बायकॉट से ग्रश्त रहा, जबकि सभी को अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए। संसद को चलाने के लिए जो नियम कानून बने हैं, उन पर भी इन दोनों को जरूर अमल करना चाहिए।

महाशिवरात्रि पर श्री काशी विश्वनाथ को माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का पावन उपहार

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वाराणसी, 07 फरवरी (हि.स.)। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की ओर से भगवान श्री विश्वेश्वर (श्री काशी विश्वनाथ महादेव) के लिए विशेष उपहार एवं प्रसाद भेजा गया है। यह पावन भेंट शनिवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास कार्यालय में प्राप्त हुई।

महाशिवरात्रि के इस शुभ अवसर पर काशी विश्वनाथ धाम में सनातन परंपरा को और अधिक समृद्ध करने वाले इस भावपूर्ण नवाचार को लेकर शिवभक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला। उपहार के आगमन के साथ ही धाम परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय माता दी’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। इस पावन भेंट के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।

मंदिर न्यास की ओर से बताया गया कि इस वर्ष महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर एक अभिनव पहल के तहत देश के विभिन्न प्रसिद्ध देवालयों एवं देवी-देवताओं की ओर से भगवान विश्वनाथ के लिए शुभेच्छास्वरूप उपहार प्रेषित किए जा रहे हैं। यह नवाचार महाशिवरात्रि महोत्सव को आध्यात्मिक दृष्टि से नई ऊंचाइयां प्रदान कर रहा है।

मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने कहा कि शक्ति स्वरूपा माता वैष्णो देवी की ओर से काशी में स्थित भगवान विश्वनाथ को अर्पित यह पावन उपहार शाश्वत शक्ति–शिव संबंध का सजीव प्रतीक है। यह भेंट श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक अनुभूति का विशेष माध्यम बनेगी तथा सनातन संस्कृति की मूल भावना को सशक्त रूप से जनमानस के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान श्री विश्वेश्वर के लिए यह पावन उपहार भेजने पर श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है। साथ ही, मंदिर न्यास ने यह भी स्पष्ट किया कि मां वैष्णो देवी के प्रधान उत्सव के अवसर पर भगवान विश्वनाथ की ओर से मां वैष्णो देवी को भी उपहार प्रेषित किए जाएंगे, जिससे सनातन आस्था के प्रमुख केंद्रों के मध्य स्थायी पुण्य संबंध और अधिक सुदृढ़ हो सकें।

दिल्ली मुख्यमंत्री ने 400 करोड़ के विकास कार्यों का किया शिलान्यास

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नई दिल्ली, 07 फ़रवरी (हि.स.)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मटियाला विधानसभा क्षेत्र में शनिवार को लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत के विकास कार्यों का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने अपना संकल्प दोहराते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए कभी फंड की कमी नहीं होने दी जाएगी। ये शिलान्यास केवल ईंट और पत्थर का प्रतीक नहीं है, बल्कि क्षेत्र के नागरिकों के विश्वास, सुविधाओं और बेहतर जीवन की मजबूत नींव है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ने मटियाला विधानसभा क्षेत्र के लिए लगभग 400 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है। इससे इस क्षेत्र के विकास कार्यों को गति मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य विकास को कागजों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उसे जमीन पर उतारकर हर नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। इस अवसर पर पश्चिमी दिल्ली से सांसद कमलजीत सहरावत, मटियाला के विधायक संदीप सहरावत, नजफगढ़ जोन से एमसीडी चेयरमैन सविता शर्मा मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के अंतर्गत सड़कों, नालियों, ड्रेनेज सिस्टम, पार्कों, सामुदायिक स्थलों और नागरिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण से जुड़े अनेक कार्य किए जाएंगे। ग्रामीण और शहरी इलाकों को जोड़ने वाले मार्गों के निर्माण से क्षेत्र में कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे आवागमन सुगम बनेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के उत्थान पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि क्षेत्र में कई नए आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं। इससे स्थानीय लोगों को घर के पास ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। मटियाला में दो अटल कैंटीन भी शुरू की गई हैं। यहां मात्र 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यह सुविधा गरीब, श्रमिक और जरूरतमंद वर्ग के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। इसके अलावा क्षेत्र के आसपास के गांवों में नई पाइप लाइन और ट्यूबवेल की स्थापना से जल आपूर्ति को सुदृढ़ किया जा रहा है, जिससे नागरिकों को पानी की समस्या से राहत मिलेगी।

उन्होंने पिछली सरकार पर तंज करते हुए कहा कि वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्रों को केवल घोषणाओं और वादों में उलझाए रखा गया। उन्होंने न गांवों की बुनियादी जरूरतों पर ध्यान दिया और न ही विकास योजनाओं को जमीन पर उतारा। इसकी वजह से सड़कें जर्जर होती चली गईं, जल निकासी और सीवर जैसी मूलभूत सुविधाएं उपेक्षित रहीं और गांवों को विकास की मुख्यधारा से काटकर रख दिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान की दिल्ली सरकार का विजन केवल बड़े प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि गली, मोहल्ले और गांव स्तर तक विकास पहुंचाना है। मटियाला में शुरू की गई ये परियोजनाएं इसी सोच का उदाहरण हैं, जहां बुनियादी ढांचे के साथ-साथ नागरिक सुविधाओं, स्वच्छता और कनेक्टिविटी पर समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में इन कार्यों के पूरा होने से मटियाला विधानसभा क्षेत्र विकास, सुविधा और विश्वास का एक सशक्त मॉडल बनकर उभरेगा। सरकार जनता के सहयोग से दिल्ली को आधुनिक, समावेशी और आत्मनिर्भर राजधानी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

सूरजकुंड मेले में झूला गिरा, इंस्पेक्टर की मौत, 11 पर्यटक जख्मी

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फरीदाबाद, 07 फरवरी (हि.स.)। फरीदाबाद में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में शनिवार को झूला गिरने से हरियाणा पुलिस के एक इंस्पेक्टर की मौत हो गई, जबकि 12 अन्य पर्यटक घायल हो गए। घायलों में से नौ को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है और तीन अन्य को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हरियाणा सरकार ने घटना की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। हादसे के बाद मेला स्थल को खाली करवा लिया गया है।हरियाणा के मुख्यमंत्री तथा पर्यटन मंत्री ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। फरीदाबाद के जिला उपायुक्त से रविवार सुबह तक जांच रिपोर्ट मांग ली गई है। सूरजकुंड में शनिवार को एक के बाद एक दो हादसे हुए हैं।

सूरजकुंड मेले में शनिवार व रविवार को अन्य दिनों के मुकाबले भारी भीड़ रहती है। आज शाम यहां गेट गिरने से एक बच्चा व एक युवा घायल हो गए। बताया जा रहा है गेट नंबर दो हिल रहा था। ऐसे में मेला प्रबंधन के कर्मचारी गेट को ठीक कर रहे थे। उन्होंने लोगों को उस तरफ जाने से रोका हुआ था। इस दौरान हवा के झोंके के साथ गेट गिर गया। वहां से गुजर रहे सेक्टर-28 निवासी सुमित मल्होत्रा घायल हो गए। उन्हें बादशाह खान अस्पताल लाया गया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। इसमें एक बच्चे को भी मामूली चोट आई।

अभी मेला आयोजक इस स्थिति को सामान्य कर ही रहे थे कि मेला परिसर में लगा तूफानी नामक झूला टूट गया। झूले में 18 लोग सवार थे। झूला टूटने से मेला परिसर में भगदड़ मच गई। इस हादसे में पुलिस कर्मचारियों सहित एक दर्जन लोग जख्मी हो गए। हादसे का शिकार हुए झूले की चेन पुरानी होने के कारण यह घटना हुई है। हादसे के बाद यहां अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। घटना की सूचना मिलते ही जिला उपायुक्त आयुष सिन्हा समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस बल ने हादसे के बाद आसपास के क्षेत्र को खाली करवा लिया।

फरीदाबाद के उपायुक्त आयुष सिन्हा ने बताया कि झूला टूटने की घटना में कुल 13 लोग घायल हुए हैं, जिसमें नौ लोगों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि तीन लोगों का बादशाह खान सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है। लोगों को बचाते हुए हरियाणा पुलिस के एक पुलिस इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद की जान चली गई, जो पलवल में तैनात थे और यहां मेला डयूटी पर आए हुए थे। झूला टूटने के बाद लोगों को बचाने के प्रयास में उनकी जान चली गई। इस मामले में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। टूरिज्म विभाग द्वारा डेली इंस्पेक्शन रिपोर्ट बनाई जा रही थी। वेंडर की लापरवाही की जांच की जाएगी और दोषी लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया जाएगा।

इस बीच हरियाणा के पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा ने कहा कि आज शाम 39वें सूरजकुण्ड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव 2026 के दौरान झूला क्षेत्र में एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हुआ। पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। हमारी सबकी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। सभी घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध करवाया जा रहा है। मैं सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन की जांच रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी। सरकार पूरी तत्परता के साथ घायलों तथा उनके परिजनों को हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।