भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धजन दिवस (आईडीओपी)-2025 के समारोहों की श्रृंखला के क्रम में वृद्धावस्था के प्रति जागरूकता...
काशी–तमिल संगमम् 4.0 के अंतर्गत आयोजित काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में सुबह आयोजि ‘रन फॉर केटीएस 4.0’ में सैकड़ों युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सुबह 7:30 बजे मालवीय भवन से शुरू होकर रविदास गेट तक जाने वाली इस दौड़ ने न केवल परिसर को ऊर्जा से भर दिया बल्कि ‘विविधता में एकता’ के संदेश को भी प्रभावी रूप से प्रसारित किया। तमिलनाडु और काशी की सांस्कृतिक एकता को सशक्त करने वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को जोड़ना और उन्हें राष्ट्र की विविध विरासत के प्रति जागरूक करना रहा!
बीएचयू कुलपति श्री अजित कुमार चतुर्वेदी ने मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की इतनी संख्या देखकर हमें भी उत्साह आ गया है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हर राज्य के लोग रहते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा विश्वविद्यालय काशी तमिल संगमम्-4.0 को मना रहा है इससे हमारे प्राचीन सभ्यता, आध्यात्मिक और संगीत का भी एक संगम हो रहा है।
कार्यक्रम के मुख्य संयोजक प्रो.भुवन चंद्र कपरी, विभाग- फिजिकल एजुकेशन, कला संकाय, बीएचयू ने बताया कि इस दौड़ का मकसद केवल खेल को बढ़ावा देना नहीं बल्कि काशी और तमिलनाडु की ऐतिहासिक साझेदारी को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से युवाओं की ऊर्जा सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है और राष्ट्रीय एकता का संदेश मजबूत होता है।
सह-संयोजक डॉ. राजीव कुमार सिंह, असिस्टेंट डायरेक्टर, फिजिकल एजुकेशन एवं स्पोर्ट्स (रैकेट गेम्स) ने बताया कि इस बार मैराथन में बीएचयू के छात्रों के साथ-साथ आस-पास के कॉलेजों और समुदाय से भी बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों में जोश और अनुशासन दोनों देखने को मिला जो विश्वविद्यालय की खेल संस्कृति की पहचान है।
इस पूरे कार्यक्रम की निगरानी और समन्वय नोडल ऑफिसर प्रो. अंचल श्रीवास्तव ने की। उन्होंने बताया कि काशी–तमिल संगमम् बीएचयू का एक प्रमुख सांस्कृतिक सेतु है जो दक्षिण और उत्तर भारत के प्राचीन संबंधों को वर्तमान में जीवंत करता है। ‘रन फॉर केटीएस 4.0’ इसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण प्रयास है जिसमें युवाओं ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लेकर इसे सफल बनाया!
दौड़ शुरू होने से पहले सभी प्रतिभागियों को कार्यक्रम के उद्देश्यों, सुरक्षा दिशा-निर्देशों और मार्ग के बारे में जानकारी दी गई। जैसे ही संकेत मिला, सैकड़ों युवक-युवतियों ने दौड़ की शुरुआत की। इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि काशी और तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत कितनी मजबूत है।
रविवार को दंतेवाड़ा में 37 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की। आत्मसमर्पण करने वालों में 12 महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इनमें से 27 नक्सलियों पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने बताया कि लगातार चलाए जा रहे ऑपरेशनों और मुठभेड़ों के बाद नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति का फायदा उठाया है। इन सभी नक्सलियों ने बस्तर रेंज पुलिस की ‘पूना मारगेम’ (स्थानीय बोली में ‘नया रास्ता’) पहल के तहत स्थानीय पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया।
पूना मारगेम’ अभियान उग्रवाद छोड़ने वालों को पुनर्वास से लेकर सामाजिक मुख्यधारा में शामिल होने तक पूरा सहयोग प्रदान करता है।
SP राय ने जानकारी दी कि पिछले 20 महीनों में कुल 508 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली अब सरकार की पुनर्वास योजनाओं के तहत सम्मान और विकास की राह पर आगे बढ़ेंगे।
नवयुग खादी फैशन शो का आयोजन शनिवार, 29 नवंबर को राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी, प्रगति मैदान में किया गया। इस शो में “नए भारत की नई खादी” को आधुनिक और नए तरीके से प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम में खादी के आधुनिक और नए रूप को आधुनिक तरीके से प्रदर्शित किया गया।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष मनोज कुमार थे। उन्होंने रैंप पर प्रदर्शित परिधानों की सराहना की और खादी के कारीगरों के समर्पण एवं शिल्प कौशल की प्रशंसा की।
अपने संबोधन में, अध्यक्ष ने खादी को नया जीवन देने का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने खादी को महज एक कपड़े से ऊपर उठाकर देशभक्ति के प्रतीक के साथ-साथ आधुनिक भारतीय जीवनशैली का प्रतीक बना दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शक मंत्र – “खादी राष्ट्र के लिए, खादी फैशन के लिए और खादी परिवर्तन के लिए” को दोहराया। इसने खादी को एक नई पहचान दी है।
उन्होंने कहा, “आज की खादी न केवल पूज्य बापू की विरासत को आगे बढ़ा रही है बल्कि आधुनिक डिज़ाइन और वैश्विक फ़ैशन में भी तेज़ी से अपनी जगह बना रही है। खादी अब केवल गाँवों तक सीमित नहीं रही; शहरों, फ़ैशन बाज़ारों और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी इसकी लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ रही है।”
श्री मनोज कुमार ने कहा कि नए ज़माने की खादी डिज़ाइन, तकनीक और परंपरा का एक अनूठा संगम है। उन्होंने कहा कि खादी युवा पीढ़ी की पहली पसंद बन गई है और यह रोज़गार सृजन, पर्यावरणीय अनुकूलता और देश की आत्मनिर्भरता की यात्रा से जुड़ी हुई है।
यह कार्यक्रम केवीआईसी, खादी उत्कृष्टता केंद्र (सीओईके), राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएफटी) और भारतीय फैशन डिज़ाइन परिषद (एफडीसीआई) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। रैंप पर खादी परिधानों और उत्पादों की विविध श्रृंखला प्रदर्शित की गई। इसे दर्शकों की भरपूर सराहना मिली। विशेष रूप से प्रेरक क्षण तब आया जब देश भर से खादी संस्थानों और कारीगरों के प्रतिनिधियों ने रैंप पर वॉक किया। केवीआईसी के अध्यक्ष श्री मनोज कुमार भी कारीगरों के साथ शामिल हुए। इससे यह संदेश गया कि खादी की असली ताकत उसके बुनकरों और निर्माताओं में निहित है – जो “गाँव से ग्लैमर तक” की यात्रा का एक सशक्त अभिव्यक्ति है।
इस कार्यक्रम में केवीआईसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एमएसएमई मंत्रालय के संयुक्त सचिव (ए एंड आरई), एमएसएमई मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार और केवीआईसी के वित्तीय सलाहकार, सीओईके के निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।
विश्व एड्स दिवस हर वर्ष 1 दिसंबर को एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने, इससे जुड़े मिथकों को मिटाने और एड्स से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। यह दिवस हमें न केवल इस वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती को समझने का अवसर देता है, बल्कि उन प्रयासों को भी सलाम करता है जो सरकारें, स्वास्थ्य संगठन, स्वयंसेवी समूह और समाज मिलकर इस बीमारी से लड़ने के लिए कर रहे हैं। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में यह दिवस और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि एचआईवी/एड्स के मामले और उनके समाधान समाज के व्यापक स्वास्थ्य ढांचे से जुड़े हुए हैं
भारत ने पिछले दो दशकों में एचआईवी/एड्स नियंत्रण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। 2000 के दशक की शुरुआत में देश में संक्रमित व्यक्तियों की संख्या तेजी से बढ़ रही थी, लेकिन राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) और विभिन्न राज्य सरकारों के सतत अभियानों से संक्रमण दर में उल्लेखनीय कमी आई। आज भारत विश्व में एचआईवी संक्रमणों के बोझ वाले शीर्ष देशों में होते हुए भी संक्रमण को नियंत्रित करने के सफल उदाहरणों में शामिल है। देश के कुछ राज्यों—जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, मणिपुर और नागालैंड—में संक्रमण दर अपेक्षाकृत अधिक रही है, लेकिन जागरूकता, परीक्षण सुविधाओं और इलाज की उपलब्धता बढ़ने से स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है।
भारत में एचआईवी संक्रमण का सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध हैं। इसके अलावा संक्रमित सीरिंजों का उपयोग, रक्त संक्रमण, जन्म के दौरान मां से बच्चे में संक्रमण और असुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाएं भी इसके प्रसार के कारण हैं। जोखिम समूहों में हाई-रिस्क व्यवहार वाले समूह प्रमुख हैं—जैसे वाणिज्यिक यौनकर्मी, ट्रक चालक, इंजेक्शन द्वारा नशीले पदार्थ लेने वाले लोग, ट्रांसजेंडर समुदाय तथा पुरुष-से-पुरुष यौन संबंध रखने वाले पुरुष (MSM)। सरकार और गैर-सरकारी संगठन इन समूहों के लिए विशेष जागरूकता और उपचार कार्यक्रम चलाते हैं।
भारत में एचआईवी/एड्स नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) सबसे प्रमुख सरकारी योजना है। यह कार्यक्रम जागरूकता अभियान, एचआईवी परीक्षण केंद्र, काउंसलिंग सेवाएं, ART (एंटी-रेट्रो वायरल थेरेपी) उपचार, गर्भवती महिलाओं की जांच और संक्रमण को रोकने के उपायों पर केंद्रित है। सरकार ने देशभर में हजारों ART केंद्र स्थापित किए हैं, जहां संक्रमित व्यक्ति जीवनभर मुफ्त उपचार प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा ‘90-90-90’ लक्ष्य (90% संक्रमित व्यक्तियों की पहचान, 90% को उपचार, और 90% में वायरल लोड नियंत्रण) को हासिल करने की दिशा में लगातार प्रगति की जा रही है।
एड्स के प्रति समाज में मौजूद भ्रांतियां और भेदभाव संक्रमित व्यक्तियों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हैं। आज भी कई क्षेत्रों में एचआईवी संक्रमित लोगों को सामाजिक दूरी, रोजगार में भेदभाव, रिश्तों में अस्वीकार और स्वास्थ्य सुविधाओं में उपेक्षा झेलनी पड़ती है। विश्व एड्स दिवस जैसे अवसर इस भेदभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों और शहरी क्षेत्रों में रैलियां, पोस्टर अभियान, स्वास्थ्य शिविर और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनसे जागरूकता फैलती है और समाज को वैज्ञानिक जानकारी मिलती है।
एचआईवी से बचाव पूरी तरह संभव है, बशर्ते आवश्यक सावधानियों का पालन किया जाए। असुरक्षित यौन संबंध से बचना, कंडोम का नियमित उपयोग, नशीले पदार्थों के लिए साझा सुई का प्रयोग न करना, केवल प्रमाणित रक्त का ही उपयोग करना और गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच कराना प्रमुख उपाय हैं। सरकार और संगठनों द्वारा कंडोम वितरण, टेस्टिंग कैंप और पीपीटीसीटी (Prevention of Parent to Child Transmission) जैसी योजनाओं से संक्रमण रोकथाम के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।
आज एचआईवी संक्रमित व्यक्ति भी पूर्ण जीवन जी सकता है। ART दवाओं की वजह से वायरस की मात्रा शरीर में इतनी कम हो जाती है कि रोगी स्वस्थ जीवन जी सकता है और दूसरों को संक्रमण फैलने का खतरा भी कम हो जाता है। भारत में चिकित्सा अनुसंधान संस्थान वैक्सीन और दीर्घकालीन उपचार पद्धतियों पर काम कर रहे हैं। दवाओं की किफायती कीमत और सरकारी सहायता ने उपचार को और आसान बनाया है। इससे मृत्यु दर और संक्रमण दर दोनों में कमी आई है।
यह दिन न केवल एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर है बल्कि समाज में दया, सम्मान और समर्थन का संदेश भी देता है। यह अवसर उन लाखों लोगों को याद करने का भी है जिन्होंने एड्स के कारण अपनी जान गंवाई और उन स्वास्थ्य योद्धाओं को सम्मानित करने का जिनके अथक प्रयासों ने लाखों जीवन बचाए हैं। भारत में इस दिन सरकारी भवनों, अस्पतालों, स्कूलों और संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित होते हैं। लाल रिबन पहनने की परंपरा भी इसी दिन की पहचान है, जो जागरूकता और समर्थन का प्रतीक है।
भारत ने एचआईवी/एड्स से लड़ाई में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं—खासकर सामाजिक भेदभाव और जागरूकता की कमी के क्षेत्र में। आवश्यकता है कि समाज, सरकार और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता मिलकर एक ऐसी वातावरण का निर्माण करें जहाँ एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों को सम्मान, सहायता और उचित उपचार मिले। विश्व एड्स दिवस हमें यही संदेश देता है कि शिक्षा, जागरूकता, सहानुभूति और वैज्ञानिक उपायों के माध्यम से हम एचआईवी-मुक्त भारत की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ सकते हैं।
मुरादाबाद के पास दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर एक भीषण सड़क दुर्घटना में शादी समारोह में जा रहे एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई। मेरठ डिपो की अनियंत्रित रोडवेज बस कह ऑटो से हुई जोरदार टक्कर में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। एक ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस हादसे में छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए । घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
गांव कुंदरकी क्षेत्र के अब्दुल्लापुर गांव निवासी संजू, सीमा पत्नी करन सिंह, आरती पुत्री मुरारी, अभय पुत्र ओमवीर, सुमन पत्नी हरदीप और करन सिंह की एक अन्य पुत्री, संजू के ऑटो में सवार होकर कटघर क्षेत्र के रफतापुर गांव में भात (शादी की रस्म) लेकर जा रहे थे। जैसे ही उनका ऑटो जीरो पॉइंट के पास पहुंचा कि पीछे से आ रही मेरठ डिपो की एक रोडवेज बस अनियंत्रित हो गई और ऑटो को अपनी चपेट में ले लिया।
टक्कर इतनी भीषण थी कि ऑटो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में संजू, आरती,सीमा, अभय, और सुमन की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।। अस्पताल में उपचार के दौरान अनन्या नामक परिवार की एक और सदस्य ने दम तोड़ दिया। इससे मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। घायलों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है।
सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और बस चालक की तलाश शुरू कर दी है। यह घटना सड़क सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है।
लेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सी-डैक, भारतीय खिलौना उद्योग और लेगो समूह ने परियोजना ‘डेवलपमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी बेस्ड कंट्रोल और ऑटोमेशन सॉल्यूशन फॉर कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक गुड्स (टॉय इंडस्ट्री)’ के अंतर्गत एक वर्ष का प्रशिक्षण पूरा करने वाले इंजीनियरिंग स्नातकों के दूसरे बैच का दीक्षांत समारोह आयोजित किया। यह परियोजना मंत्रालय के अनुसंधान एवं विकास समूह की एक विशेष पहल है जिसका उद्देश्य प्रोटोटाइप विकसित करके और कम प्रतिनिधित्व वाले समुदायों सहित युवा इंजीनियरों को ऐसे खिलौने डिज़ाइन करने हेतु आवश्यक कौशल से सुसज्जित करके भारतीय इलेक्ट्रॉनिक खिलौना उद्योग के विकास को बढ़ावा देना है।
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की इस पहल के अंतर्गत, पूरे भारत से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और पूर्वोत्तर क्षेत्र की पृष्ठभूमि से युवा इंजीनियरों का चयन किया गया और उन्हें एक वर्ष तक अनुसंधान एवं विकास कार्यों में लगाया गया। पहले छह महीने तक उन्हें सी-डैक-नोएडा स्थित ई-खिलौना प्रयोगशाला में काम करने और सीखने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। इसके बाद, उद्योग जगत की ज़रूरतों के अनुसार खिलौनों के प्रोटोटाइप बनाने के लिए उन्हें छह महीने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को एक वर्ष के लिए 25,000 रुपये का मासिक वृति दी गई।
इस कार्यक्रम के दौरान, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव, श अमितेश कुमार सिन्हा ने सी-डैक, नोएडा में स्थापित इलेक्ट्रॉनिक खिलौना प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “भारत इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों का एक बढ़ता हुआ बाजार है और भारतीय खिलौना उद्योग के तंत्र के निर्माण में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मुझे बहुत खुशी है कि इसके लिए आधारशिला तैयार हो रही है और इंजीनियरों की अगली पीढ़ी इस दिशा में काम कर रही है। इस कार्यक्रम को और बड़े पैमाने पर औपचारिक रूप दिया जा सकता है ताकि अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिल सके और खिलौना उद्योगों को समग्र रूप से बढ़ावा देने में अधिक प्रभावी हो। ई-खिलौनों के लिए सी-डैक-नोएडा में स्थापित उत्कृष्टता केंद्र में राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, एमएसएच और इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों पर केंद्रित अन्य संस्थान शामिल होंगे। इससे उद्यमिता/स्टार्टअप शुरू करने में मदद मिलेगी। मैं स्नातक करने वाले विद्यार्थियों को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूँ।”
29 नवंबर को इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में आयोजित इस दीक्षांत समारोह में श्री अमितेश कुमार सिन्हा, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में जीसी आर एंड डी श्रीमती सुनीता वर्मा, सी-डैक, नोएडा के ईडी श्री विवेक खनेजा, टॉयज़ एसोसिएशन ऑफ इंडिया के निदेशक श्री अनिर्बान गुप्ता, , जीपीए, भारत में लेगो समूह, इलेक्ट्रॉनिक्स खिलौना उद्योग के सदस्य शामिल हुए।
भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धजन दिवस (आईडीओपी)-2025 के समारोहों की श्रृंखला के क्रम में वृद्धावस्था के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को बढ़ावा देने के लिए 28 नवंबर को जनपथ, नई दिल्ली स्थित डीआईएसी के भीम हॉल में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम “आराधना” का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का विषय “अनुभव से ऊर्जा तक” था।
इस सत्र में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल.वर्मा, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के सचिव, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विद्यार्थी, वरिष्ठ नागरिक और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 41 के अंतर्गत, राज्य को वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए प्रभावी प्रावधान करने का अधिकार दिया गया है। इसी भावना से माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 लागू किया गया था। यह ऐतिहासिक कानून हमारे सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक है—देखभाल, कर्तव्य और प्रेम को प्रवर्तनीय अधिकारों में परिवर्तित करता है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित मामलों के लिए नोडल विभाग है।
2011 की जनगणना के अनुसार, देश में लगभग 10 करोड़ वरिष्ठ नागरिक हैं। 2036 तक यह संख्या बढ़कर 22 करोड़ होने का अनुमान है। यह बढ़ती जनसंख्या एक चुनौती के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिक केंद्रित नीतियों पर अपना ध्यान केंद्रित करने का अवसर भी प्रस्तुत करती है। हमारे देश ने नीतिगत और कानूनी ढाँचे, दोनों स्तरों पर इस दिशा में पहले ही कई पहल की हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान वायुसेना बैंड ने स्पेस फ़्लाइट, सुजलाम सुफलाम, रिजॉइस इन रइसाना, इवनिंग स्टार, वंदे मातरम और सारे जहाँ से अच्छा जैसे गीतों की धुनें बजाईं। वायुसेना बैंड द्वारा बजाई गई धुनों ने उपस्थित लोगों में भारत माता के प्रति गौरव, राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना जगाई। इसने एक बार पुन: मातृभूमि के प्रति प्रेम को जागृत कर दिया।
पद्मश्री गीता चंद्रन ने अपनी टीम के साथ भरतनाट्यम का प्रदर्शन किया। लवंगी राग में त्रिधारा, नमः शिवाय, ओंकार कारिणी और संकीर्तन का प्रदर्शन किया। भारतीय नृत्य शैलियों की इन भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अपने संबोधन में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री, श्री बी.एल. वर्मा ने कहा कि हमारे वरिष्ठ नागरिकों को सदैव ज्ञान, धैर्य और मूल्य-आधारित जीवन का प्रतीक माना गया है। उनके जीवन का प्रत्येक अध्याय—कड़ी मेहनत, संघर्ष, त्याग और उपलब्धियों से भरा—युवा पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शक का काम करता है। यह सांस्कृतिक कार्यक्रम इसलिए विशेष है क्योंकि संगीत, नृत्य और कला मिलकर अनुभवों को अभिव्यक्त करते हैं और ऊर्जा को एक सुंदर रूप प्रदान करते हैं, जैसा कि भारतीय वायु सेना के संगीत बैंड द्वारा प्रस्तुत किया गया—सेवा और एकता की मधुर अभिव्यक्ति—और भारत की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना पद्मश्री सुश्री गीता चंद्रन का सम्मानित नृत्य और संगीत प्रदर्शन।
यह आयोजन इसलिए यादगार है क्योंकि आज तीन पीढ़ियाँ इस मंच पर एक साथ हैं—हमारे बुजुर्गों की संगीतमय प्रस्तुतियाँ, हमारे युवाओं की कलात्मक अभिव्यक्तियाँ और बच्चों की आनंदमय उपस्थिति। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय इसी दिशा में कार्यरत है, क्योंकि इसका प्रत्येक कार्यक्रम हमारे वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा, सक्रिय जीवन और भागीदारी को सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता से प्रेरित है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम “आराधना” ने वृद्धावस्था के प्रति जागरूकता और अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को बढ़ावा देने के लिए वरिष्ठ नागरिकों, विद्यार्थी, नीति निर्माताओं, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को एक मंच पर एकत्रित किया।
भारत निर्वाचन आयोग ने 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए प्रासंगिक तिथियों को एक सप्ताह बढ़ाकर संशोधित कार्यक्रम की घोषणा की है, जिसमें 01.01.2026 को अर्हक तिथि माना गया है।
विशेष गहन पुनरीक्षण का संशोधित कार्यक्रम इस प्रकार है:
क्रमांक
गतिविधियां
अनुसूची
1
गणना अवधि
11.12.2025(गुरुवार) तक
2
मतदान केंद्रों का युक्तिकरण/पुनर्व्यवस्थापन
11.12.2025 (गुरुवार) तक
3
नियंत्रण तालिका का अद्यतनीकरण और ड्राफ्ट रोल की तैयारी
12.12.2025 (शुक्रवार)15.12.2025 (सोमवार) तक
4
मसौदा मतदाता सूची का प्रकाशन
16.12.2025 (मंगलवार) को
5
दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि
16.12.2025 (मंगलवार)15.01.2026 (गुरुवार) तक
6
नोटिस चरण (जारी करना, सुनवाई और सत्यापन); गणना प्रपत्रों पर निर्णय और दावों तथा आपत्तियों का निपटान ईआरओ द्वारा साथ साथ किया जाएगा
16.12.2025 (मंगलवार) से07.02.2026 (शनिवार)
7
मतदाता सूची के स्वास्थ्य मापदंडों की जांच करना तथा अंतिम प्रकाशन के लिए आयोग की अनुमति प्राप्त करना।
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), कुरुक्षेत्र, हरियाणा के 20वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।उन्होंने विद्यार्थियों से ज़िम्मेदारी से नवाचार करने का आग्रह किया और कहा कि “प्रौद्योगिकी का असली उद्देश्य केवल प्रगति नहीं, बल्कि उद्देश्यपूर्ण प्रगति है।”
उपराष्ट्रपति ने भारत के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में से एक के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने को अपना सौभाग्य बताया। उन्होंने एनआईटी कुरुक्षेत्र की सराहना करते हुए कहा कि यह एक समृद्ध विरासत, जीवंत वर्तमान और भविष्य वाला संस्थान है जो देश में तकनीकी शिक्षा के मानकों को आकार दे रहा है।
उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र एक पवित्र भूमि है जो हमें याद दिलाती है कि अधर्म पर धर्म की हमेशा विजय होती है, चाहे अधर्म कितना भी शक्तिशाली क्यों न होउपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल एक समारोह नहीं, बल्कि एक ऐसा क्षण होता है जब वर्षों का समर्पण गर्व, आशा और अवसर से भरी एक नई शुरुआत में बदलता है।
वैश्विक परिवर्तन की गति पर बोलते हुए उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में विकास के बारे में बात की।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रौद्योगिकी उद्योगों को नया रूप देने और समाज के कामकाज के तरीके को पुन:परिभाषित करने में एक शक्तिशाली माध्यम बन गई है। उन्होंने विद्यार्थियों से ज़िम्मेदारी से नवाचार करने का आग्रह किया और कहा कि “प्रौद्योगिकी का असली उद्देश्य केवल प्रगति नहीं, बल्कि उद्देश्यपूर्ण प्रगति है।”
विद्यार्थियों को अनुसंधान, नवाचार और भारत-विशिष्ट समस्या-समाधान में गहराई से उतरने के लिए प्रोत्साहित करते हुए, उन्होंने कहा कि ये दोनों इंजन भारत के तकनीकी नेतृत्व को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने युवा नवप्रवर्तकों को राष्ट्रीय महत्व के उभरते क्षेत्रों, जैसे टिकाऊ विनिर्माण, स्मार्ट मोबिलिटी, क्वांटम प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी, कृषि नवाचार और हरित बुनियादी ढाँचागत क्षेत्र में अनुसंधान करने पर बल दिया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत प्रौद्योगिकी के उपयोगकर्ता से उन्नत समाधानों का वैश्विक निर्माता बनने की ओर अग्रसर हो रहा है। उन्होंने एक जीवंत उद्यमशीलता तंत्र को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों को श्रेय दिया और स्नातकों से अपने विचारों को ऐसे उद्यमों में बदलने का आग्रह किया जो रोजगार का सृजन करें और राष्ट्रीय विकास में योगदान दें।
समकालीन वैश्विक चुनौतियों – जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा खतरे, प्रौद्योगिकी तक समान पहुँच और एआई का नैतिक उपयोग – को स्वीकार करते हुए, उन्होंने कहा कि ये नवाचार और नेतृत्व के लिए अपार अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 को लागू करने में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता की प्रशंसा की। यह नीति बहु-विषयक शिक्षा के अवसर प्रदान करती है और भारत की संस्कृति, विरासत और लोकाचार में गहराई से निहित है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि एनईपी 2020 ने मैकाले शिक्षा प्रणाली की औपनिवेशिक छाप को तोड़कर भारत को परिवर्तनकारी पथ पर अग्रसर किया है। उन्होंने कहा कि मैकाले की शिक्षा प्रणाली भारत पर शासन करने के लिए शुरू की गई थी और केवल क्लर्क तैयार करती थी।
समग्र शिक्षा पर संस्थान के फोकस की सराहना करते हुए, उन्होंने समग्र व्यक्तित्व विकास केंद्र (सीएचपीडी) की स्थापना की सराहना की, जो भगवद गीता, सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों, संज्ञानात्मक विज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य पर पाठ्यक्रमों के माध्यम से बौद्धिक, भावनात्मक और नैतिक विकास को बढ़ावा देता है।
विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि एनआईटी कुरुक्षेत्र के स्नातक इस लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने सराहना करते हुए कहा कि संस्थान को अब तक 64 पेटेंट प्रदान किए गए हैं, जो अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक संपदा निर्माण की इसकी मजबूत संस्कृति को दर्शाता है।
उन्होंने डीआरडीओ और इसरो के सहयोग से एआई-आधारित युद्ध, रक्षा अनुसंधान और चंद्रयान और मार्स ऑर्बिटर मिशन जैसे अंतरिक्ष मिशनों में उन्नत तकनीकों में संस्थान के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। उन्होंने गांवों और झुग्गियों में जीवन स्तर में सुधार के लक्ष्य से कम लागत आधारित अनुसंधान, स्वदेशी तकनीक के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के लिए संस्था के प्रयासों की प्रशंसा की।
विद्यार्थियों से भारत की विकास यात्रा से जुड़े रहने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि अनुसंधान को शहरी-ग्रामीण खाई को पाटने, एमएसएमई को सशक्त बनाने, कृषि को आधुनिक बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सहायता करनी चाहिए ताकि प्रौद्योगिकी अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। उन्होंने कहा, “हमें प्रतिभा पलायन से प्रतिभा से लाभ की ओर बढ़ना चाहिए।” उन्होंने स्नातकों को प्रोत्साहित किया कि वे जहां भी जाएं भारत को अपने दिल में रखें।
भारत के युवाओं से अपनी आकांक्षाओं को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि अगला गूगल, अगला टेस्ला, अगला स्पेसएक्स भारत से हो – एनआईटी कुरुक्षेत्र जैसे संस्थानों से हो।”
उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से “नशे को ना” कहकर अनुशासित जीवन जीने की भी अपील की।
अपने संबोधन के समापन पर उन्होंने स्नातकों को याद दिलाया कि उनकी डिग्री एक समापन बिंदु नहीं है बल्कि एक नई जिम्मेदारी की शुरूआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से सृजनात्मकता, मानवीयता और करूणा से समाज की सेवा करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर हरियाणा के राज्यपाल प्रो. आशिम कुमार घोष, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, एनआईटी कुरुक्षेत्र के निदेशक प्रो. बी.वी. रमना रेड्डी, एनआईटी कुरुक्षेत्र के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्ष डॉ. तेजस्विनी अनंत कुमार और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
संसद के आगामी शीतकालीन सत्र, 2025 से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए आज (30 नवंबर, 2025) रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ संसद भवन परिसर, नई दिल्ली में एक बैठक आयोजित की गई। यह बैठक संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने बुलाई थी। इस बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा, विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल और संसदीय कार्य और सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन भी शामिल हुए। कुल मिलाकर, बैठक में मंत्रियों सहित 36 राजनीतिक दलों के 50 नेताओं ने भाग लिया।
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की परिचयात्मक टिप्पणी से बैठक की शुरूआत हुई। उन्होंने बैठक में उपस्थित सभी नेताओं का स्वागत किया। तत्पश्चात, संसदीय कार्य मंत्री ने बैठक का संचालन किया। उन्होंने नेताओं को सूचित किया कि संसद का शीतकालीन सत्र, 2025 सोमवार, 1 दिसंबर, 2025 को आरंभ होगा और सरकारी कार्य की अनिवार्यताओं के अधीन, सत्र शुक्रवार, 19 दिसंबर, 2025 को समाप्त हो सकता है। इस सत्र में 19 दिनों की अवधि में कुल 15 बैठकें होंगी।
संसदीय कार्य मंत्री श्री रिजिजू ने आगे बताया कि इस सत्र के दौरान उठाए जाने वाले विधायी और अन्य कार्यों के लिए अस्थायी रूप से 14 विषयों की पहचान की गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार दोनों सदनों के नियमों के अनुसार, सदनों में किसी भी अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने संसद के आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान उनके की ओर से उठाए जाने वाले विभिन्न संभावित मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए और सरकार को पूर्ण सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।
अंत में, श्री राजनाथ सिंह और श्री किरेन रिजिजू ने बैठक में भाग लेने, अपने विचार व्यक्त करने तथा सक्रिय एवं प्रभावी भागीदारी के लिए सभी नेताओं को धन्यवाद दिया।