LATEST ARTICLES

विद्युत दुर्घटनाएं रोकने हेतु कारपोरेशन अध्यक्ष का कड़ा रूख

0

अधिशाषी अभियन्ता को निलम्बित करनें, तथा अधीक्षण अभियन्ता एंव मुख्य अभियन्ता को कारण बताओं नोटिस जारी करने के आदेश

विद्युत दुर्घटनाएं अत्यन्त दुखद इस पर जीरो टालरेन्स नीति

लखनऊ,
विद्युत दुर्घटनाओं पर उ0प्र0 पावर कारोरेशन के अध्यक्ष डा0 आशीष गोयल ने सख्त रूख अख्तिियार करते हये विगत नवम्बर में शाहजहापुर में हई दुर्घटना पर अधिशाषी अभियन्ता को भी निलम्बित करनें के निर्देश दिये। इस प्रकरण में अवर अभियन्ता एवं सहायक अभियन्ता को पहले ही निलम्बित किया जा चुका है।
शाहजहॉपुर जनपद के जलालाबाद में नवम्बर 2025 में अनुरक्षण कार्य करते हुये संविदा कर्मी की स्पर्शाधात से मृत्यु हो गयी थी। समीक्षा बैठक में उन्होनें पूॅछा की अधिशाषी अभियन्ता को क्यों छोडा गया। सुरक्षा उपकरण पहने बगैर कार्य क्यों कराया गया । इस सन्दर्भ में पहले ही निर्देश जारी किये जा चुके है कि जहॉ भी विद्युत दुर्घटना होगी वहॉ अधिशाषी अभियन्तापर भी कार्यवाही होगी।
अध्यक्ष ने शाहजहॉपुर के अधीक्षण अभियन्ता तथा मुख्य अभियन्ता को भी इस प्रकरण में नियम 10 के तहत कारण बताओं नोटिस जारी करनें के निर्देश दिया।
उन्होनें कहा कि विद्युत दुर्धटनायें रोकनी हैं इसके लिये जीरों टालरेन्स की नीति है यह अत्यन्त पीड़ा दायी हे। बिना सुरक्षा उपकरण पहनें कोई भी अनुरक्षण कार्य नहीं कराया जाये। यदि कहीं भी दुर्धटना होगी तो सख्त कार्यवाही होगी।
उन्होनें कहा कि अनुरक्षण कार्याे में सुरक्षा उपकरण अनिवार्य से रूप से पहन कर कार्य करें और उसको सोशल मीडिया पर भी ड़ाले।
डा0 आशीष कुमार गोयल ने कार्य में प्रगति न होने एवं खराब परर्फामेन्स को लेकर प्रयागराज, के अधीक्षण अभियन्ता एवं मुख्य अभियन्ता, मेरठ-1 के मुख्य अभियन्ता, अलीगड़ के मुख्य अभियन्ता को शो कॉज नोटिस देने के निर्देश दिये। साथ ही बादां और झॉसी में खराब राजस्व वसूली को लेकर दोनों जगहों के जेई, एस0डी0ओ0, अधिशासी अभियन्ता, अधीक्षण अभियन्ता, मुख्य अभियन्ता को नियम 10 के तहत नोटिस देने एवं एडवर्स इंन्ट्री देने के निर्देश दिये। अध्यक्ष ने कहा कि विद्युत बिल वसूली में किसी प्रकार की कोई कोताही नही बरती जायेगी जहॉ भी वसूली कम होगा वहा के समस्त जिम्मेदारों पर कार्यवाही होगी।
अध्यक्ष ने कहा कि समस्त प्रकार के ट्रांसफार्मर छतिग्रसतता रूकनी चाहिए। लगातार इसके लिये प्रयासरत रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहाकि जहॉ भी ट्रांसफार्मर डैमेज कम नहीं हुआ है वहॉ सख्त कार्यवाई करिये। अभी तक क्यों कार्यवाई नहीं हुई। ट्रांसफार्मर डैमेज पर सभी डिस्कॉम कार्यवाई करें। इसमें लापरवाही बरदास्त नहीं की जायेगी। दिसम्बर से लेकर अब तक जहॉ भी ट्रांसफार्मर डैमेज हो रहे हैं वहॉ जिम्मेदारी तय करते हुये सख्त कार्यवाई करिये। उन्होंने कहाकि मेन्टेनेन्स एवं बिजनेस प्लान का पूरा पैसा दिया जा रहा है फिर ट्रांसफार्मर डैमेज क्यों हो रहे हैं।
उ0प्र0 पावर कारपोरेशन अध्यक्ष डॉ0 आशीष गोयल ने कहा है कि विगत 1 दिसम्बर 2025 से पूरे प्रदेश में प्रारम्भ हुयी बिजली बिल राहत योजना को उपभोक्ताओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है। लेकिन अभी और अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है। सभी वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि अपने अपने क्षेत्रों में योजना के पात्र उपभोक्ताओं का पंजीकरण कराकर बकाया जमा करायें।
अध्यक्ष ने कहा कि प्रत्येक उपभोक्ता से सम्पर्क करें। उसे फोन काल करें और व्यक्तिगत रूप से भी उससे सम्पर्क करके उसे योजना का लाभ लेने के लिये सहमत करें। अध्यक्ष ने कहा हर उपभोक्ता तक मुनादी पहॅुचायें। सम्पर्क करें तथा उसे बकाये की नोटिस दें तथा योजना के पाम्पलेट एवं सूचना पर्ची दें। माइक्रो प्लान बनाकर हर कार्मिक एजेन्सी (फिनटेक) को इसमें लगाकर कार्य करायें।
अध्यक्ष ने कहा कि बिजली चोरी के मामलों में बतायें कि योजना के माध्यम से मुकदमा तथा एफ.आई.आर का निस्तारण करायें, कोर्ट कचेहरी के चक्कर से बचें।
अध्यक्ष ने कहाकि विद्युत बिल वसूलने के लिये अभियान चलाइये। अध्यक्ष ने कहा कि बेहतर विद्युत व्यवस्था के लिये यह जरूरी है कि जितनी बिजली दे उतना राजस्व वसूलें और लाइन हानियॉ कम करेें।
अध्यक्ष ने कहाकि जहॉ भी एटीएण्डसी हानियॉ ज्यादा है वहॉ योजना बनाकर व्यवस्था सुधारें। सबस्टेशन वाइज रणनीति बना ली जाये। डॉ0 गोयल ने कहा कि फीडर वाइस मैनेजर के कार्यों की रेग्यूलर समीक्षा करिये।
अध्यक्ष ने कहा कि निवेश मित्र, झटपट पोर्टल तथा सोलर रूफटॉप में पेन्डेन्सी की शिकायतें नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहाकि सोलर रूफटॉप कनेक्शन में उपभोक्ताओं की अनेक शिकायते हैं। इस पर ध्यान देकर समस्या हल करायें।
कारपोरेशन के प्रबन्ध निदेशक पंकज कुमार ने भी बैठक की समीक्षा की। शक्ति भवन में सम्पन्न इस बैठक में सभी डिस्कॉमों के प्रबन्ध निदेशक तथा निदेशक तकनीकी एवं वाणिज्य के अतिरिक्त पावर कारपोरेशन के सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

बेघर लोगों को शेल्टर देने की संवैधानिक जिम्मेदारी से सरकार पल्ला नहीं झाड़ सकती : हाई कोर्ट

0

नई दिल्ली, 14 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि भारत एक सामाजिक कल्याण वाला देश है और लोगों को शेल्टर के अधिकार से वंचित करना जीवन के अधिकार से वंचित करने जैसा है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि बेघर लोगों को शेल्टर देने के अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से सरकार पल्ला नहीं झाड़ सकती है। उच्च न्यायालय ने दिल्ली में पड़ रही कड़ाके की ठंड के बीच एम्स और दूसरे अस्पतालों के बाहर मरीज़ों और उनके तीमारदारों की खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के मामले पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की। इस मामले पर अगली सुनवाई 16 जनवरी को होगी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज इस मामले पर कई दिशा-निर्देश जारी किए। कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद, दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन, पीडब्ल्यूडी, डीडीए, दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली पुलिस आयुक्त के अलावा दिल्ली के सभी बड़े अस्पतालों को पक्षकार बनाने का आदेश दिया। उच्च न्यायालय ने एम्स के अलावा सफदरजंग अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और राम मनोहर लोहिया अस्पताल को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।

उच्च न्यायालय ने इस बात पर गौर किया कि ठंड में बेघरों, मरीजों और उनके तिमारदारों की सुरक्षा के लिए इंतजाम नाकाफी हैं। कोर्ट ने कहा कि विंटर एक्शन प्लान को लागू करने की प्रभावी योजना नहीं है। शेल्टर होम की कमी है। अस्पतालों के पास बेघर आबादी का गलत सर्वे और उनके लिए शेल्टर होम की जरुरत और क्षमता के आंकड़ों में काफी अंतर है।

उच्च न्यायालय ने इस बात पर भी गौर किया कि दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड ने एम्स, वीएमसीसी और लेडी हार्डिंग अस्पताल को पत्र लिखकर अस्पाताल के खुले स्थानों पर पैगोडा टेंट स्थापित करने की अनुमति मांगी थी। सुनवाई के दौरान एम्स ने कहा कि उसने शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को पैगोडा टेंट स्थापित करने की अनुमति देने से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि वर्तमान में पर्याप्त उपाय हैं और पैगोगा टेंट से सुरक्षा की चिंताएं बढ़ सकती हैं।

उच्च न्यायालय ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को निर्देश दिया कि वो अस्पतालों के आसपास के सबवे को अपने हाथों में ले और वहां पर्याप्त शेल्टर होम्स स्थापित करे। बोर्ड अस्पतालों के नजदीक खाली स्थानों की पहचान करेगा और वहां टेंट या पंडाल स्थापित करेगा। इसमें सभी प्राधिकार सहयोग करेंगे. अगर कोई अधिकारी इसमें सहयोग नहीं करेगा को उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उच्च न्यायालय ने साकेत कोर्ट के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज की अध्यक्षता में 15 जनवरी को बैठक करने का आदेश दिया। इस बैठक में दिल्ली नगर निगम, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद, दिल्ली मेट्रो, एम्स, शहरी आश्रय बोर्ड, वीएमसीसी, एम्स, राममनोहर लोहिया अस्पताल, दिल्ली पुलिस, डीडीए समेत दूसरे प्राधिकारों के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे और शॉर्ट टर्म योजना बनाएंगे और उसी दिन उस पर अमल करेंगे। उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर किसी मसले पर मतभेद होता है तो प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज की ओर से हस्तक्षेप कर रास्ता निकाला जाएगा। कोर्ट ने प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज को निर्देश दिया कि वो सुनवाई की अगली तिथि को इस संबंध में रजिस्ट्रार जनरल के जरिये रिपोर्ट दाखिल करेंगे।

बता दें कि उच्च न्यायालय ने 12 जनवरी को इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया था। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि ईश्वर न करें, लेकिन हमे कभी ऐसे खुले आसमान के नीचे रात गुजरानी पड़े तो हम पर न जाने क्या बीतेगी। सरकारी महकमे को इसे लेकर और ज़्यादा संवेदनशील होने की जरूरत है। उच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि वो राजधानी के शेल्टर होम में पर्याप्त जगह और सुविधाएं उपलब्ध कराए।

दुर्घटना में स्थाई दिव्यांग नाबालिग को मुआवजे का अधिकार : हाईकोर्ट

0

प्रयागराज, 14 जनवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक आदेश में कहा है कि दुर्घटना में स्थाई तौर पर दिव्यांग हुए नाबालिग को कुशल श्रमिक की तरह मुआवजा पाने का अधिकार है।

यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन ने प्रयागराज के संगम लाल और न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की अपीलों पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण इलाहाबाद से निर्धारित मुआवजा बढ़ाने की अपील पर कहा कि भले ही यह मान लिया जाए कि दुर्घटना के समय दावा करने वाला केवल 16 वर्ष का था और किसी भी प्रकार की आय अर्जित नहीं कर रहा था, फिर भी उसे कुशल श्रमिक के आधार पर मुआवजा पाने का अधिकार है।

अधिकरण ने अपीलार्थी को 5,03,310 रुपये मुआवजा सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया था, जिसे दुर्घटनाग्रस्त ट्रक की बीमा कम्पनी को अदा करना था। बीमा कम्पनी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि पीड़ित को केवल 60 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता हुई है, जिसे गलत तरीके से 80 प्रतिशत मान लिया गया। वहीं पीड़ित ने मुआवजा बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि उसकी 100 प्रतिशत कार्यात्मक दिव्यांगता हुई है लेकिन ट्रिब्युनल ने केवल 80 प्रतिशत माना।

पीड़ित ने बताया कि दुर्घटना में उसका दायां पैर घुटने से कट गया और बाएं पैर की दो उंगलियां भी काटनी पड़ीं, जिससे वह किसी भी प्रकार का शारीरिक श्रम करने में असमर्थ हो गया। वह खलासी (हेल्पर) के रूप में ट्रक पर काम करता था इसलिए उसकी आजीविका पूरी तरह समाप्त हो गई।

कोर्ट ने कहा कि सीएमओ प्रतापगढ़ के 60 प्रतिशत दिव्यांगता और मुंबई के नायर अस्पताल से जारी 80 प्रतिशत दिव्यांगता के प्रमाणपत्र को किसी ने चुनौती नहीं दी है। यह भी माना गया कि पीड़ित शारीरिक श्रम आधारित काम करता था और उसकी कार्यात्मक दिव्यांगता 100 प्रतिशत है। कोर्ट ने काजल बनाम जगदीश चंद, मास्टर आयुष बनाम रिलायंस जनरल इंश्योरेंस, बेबी साक्षी ग्रेओला और हितेश नागजीभाई पटेल मामलों का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी व्यक्ति को 100 प्रतिशत कार्यात्मक दिव्यांगता हो जाती है, तो उसकी आय का आकलन कुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि अनुमानित रूप में। इसी के साथ कोर्ट ने मुआवजा बढ़ाकर 16,59,510 रुपये सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित दावा दाखिल करने की तिथि से भुगतान करने का आदेश दिया। यह राशि भी ट्रक की बीमा कम्पनी चुकाएगी।

वेदांता के शेयर में छह फीसदी की तेजी,बाजार पूंजीकरण 2.64 लाख करोड़ रुपये

0

नई दिल्‍ली, 14 जनवरी (हि.स)। विभिन्न कारोबार से जुड़े वेदांता लिमिटेड के शेयर में आज छह फीसदी का उछाल आया, जिससे वह रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। इसके साथ कंपनी का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) 2,64,224.92 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस महीने वेदांता के शेयर में अब तक करीब 12 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है।

बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) में कंपनी का शेयर बुधवार को 6.06 फीसदी की उछाल के साथ 675.70 रुपये पर बंद हुआ। वहीं, कारोबार के दौरान एक समय यह 6.63 फीसदी की बढ़त के साथ 679.40 रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा था। वहीं, नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) में यह 6.04 प्रतिशत की तेजी के साथ 675.75 रुपये पर रहा। इस तेजी के साथ कंपनी का बाजार पूंजीकरण बढ़कर 2,64,224.92 करोड़ रुपये हो गया।

इस महीने अभी तक बीएसई पर कंपनी के शेयर में करीब 11.88 फीसदी का उछाल आया है। कंपनी का शेयर पिछले साल करीब 36 फीसदी चढ़ा था। हालांकि, जहां वेदांता के शेयर में तेजी आई, वहीं घरेलू शेयर बाजार में नरमी का रुख रहा। 30 शेयरों पर आधारित बीएसई का सेंसेक्स 244.98 अंक टूटकर 83,382.71 पर बंद हुआ। वहीं, 50 शेयरों पर आधारित एनएसई का निफ्टी 66.70 अंक के नुकसान के साथ 25,665.60 पर आ गया।

मकर संक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर में ‘आरआरआर सेंटर’ का शुभारम्भ

0

गोरखपुर, 14 जनवरी (हि.स.)। मकर संक्रांति के अवसर पर गोरखपुर नगर निगम ने स्वच्छता और सेवा का संगम प्रस्तुत करते हुए गोरखनाथ मंदिर मेला परिसर में आरआरआर (रिड्यूस, रीयूज, रिसाइकिल) केंद्र एवं अस्थाई कार्यालय का संचालन शुरू किया है।

बुधवार को महापौर डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह और एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से इन केंद्रों का उद्घाटन किया। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा मेले में आए श्रद्धालुओं को गर्म वस्त्र और ‘वार्षिक स्वच्छता कैलेंडर’ वितरित किए गए।

–स्वच्छता और सामाजिक सरोकार का समन्वय

महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने बताया कि महानगर को पर्यावरण-अनुकूल और संवेदनशील बनाने की दिशा में नगर निगम वर्तमान में सात आरआरआर केंद्रों का संचालन कर रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से नागरिक अपने अनुपयोगी वस्त्र, जूते, बैग और अन्य घरेलू सामान दान कर सकते हैं। यह पहल न केवल कचरा प्रबंधन में सहायक है, बल्कि इसके जरिए एकत्र सामान को छाँटकर गरीब और वंचित वर्ग के लोगों तक पहुँचाया जाता है। जिससे समाज के अंतिम व्यक्ति की मदद सुनिश्चित हो रही है।

कार्यक्रम के दौरान विधायक विपिन सिंह और एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने नगर निगम के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। इस अवसर पर उप सभापति पवन त्रिपाठी, नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल, अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार व दुर्गेश मिश्र, मुख्य अभियंता अमित शर्मा सहित कई पार्षद और निगम के अधिकारी उपस्थित रहे।

–नागरिकों से दान की अपील

नगर निगम ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने पुराने लेकिन उपयोगी सामान को इन आरआरआर केंद्रों पर दान करें। अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने आश्वस्त किया कि निगम यह सुनिश्चित करता है कि दान किया गया सामान पूरी तरह स्वच्छ और उपयोगी स्थिति में ही जरूरतमंदों तक पहुँचे। यह अभियान शहर को स्वच्छ, सुंदर और मानवीय बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हो रहा है।

बिना नियमित जांच अप्रमाणित सामग्री के आधार पर नहीं ठहराया जा सकता दोषी-हाईकोर्ट

0

जयपुर, 14 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक पुलिस अधिकारी को पदावतन करने से जुड़े मामले में कहा है कि बिना नियमित जांच किए केवल अखबार में प्रकाशित फोटो या अप्रमाणित सामग्री के आधार पर व्यक्ति को दोषी ठहराकर उसे दंडित नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता एएसआई को पदावनत कर हैड कांस्टेबल बनाने के आदेश को रद्द कर दिया है। हालांकि अदालत ने विभाग को छूट दी है कि वह चाहे तो मामले में नियमानुसार नियमित जांच कर सकता है। जस्टिस गणेश राम मीणा की एकलपीठ ने यह आदेश अजीत मोगा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सेवा नियम, 1958 के नियम 19 के उपनियम 2 का प्रयोग अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में ही किया जा सकता है। यह प्रावधान विभाग को जांच से बचने का लाइसेंस नहीं देता। समान परिस्थिति में जब एक अधिकारी को राहत दी गई तो दूसरे को दंड देना समानता के अधिकार के भी खिलाफ है।

याचिका में अधिवक्ता मुकेश कुमार ने अदालत को बताया कि जनवरी, 2020 में एक दैनिक समाचार पत्र में कुछ पुलिस अधिकारियों की अपराधियों के साथ मौजूदगी दर्शाते हुए तस्वीरें प्रकाशित हुई थी। इन तस्वीरों के आधार पर पुलिस के आलाधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला कि याचिकाकर्ता आपराधिक तत्वों के संपर्क में है। इसके बाद बिना नियमित विभागीय जाए किए उसे हेड कांस्टेबल पद पर पदावनत कर दिया गया। इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि न तो उसे सुनवाई का मौका दिया गया और ना ही प्रकाशित फोटो की फॉरेंसिक जांच कराई गई, जबकि ये फोटो एआई से बनाई जा सकती हैं। वहीं इसी फोटो में दिख रहे पुलिस निरीक्षक जोधा राम को बर्खास्त किया गया था, लेकिन विभागीय अपील में उन्हें राहत दी गई और याचिकाकर्ता की अपील को खारिज कर दिया गया। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि ऐसे मामलों में गवाह सामने नहीं आते और विभागीय जांच करना व्यावहारिक नहीं था। इसलिए नियम 19 के उपनियम 2 के तहत कार्रवाई की गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने पदावनती आदेश को रद्द कर दिया है।

गांवों को बचाकर रखना बड़ा सांस्कृतिक जागरण है :डॉ. सच्चिदानंद जोशी

0

– एनएमसीएम का प्रतिष्ठा दिवस भव्य रूप से मनाया गया

नई दिल्ली, 14 जनवरी (हि.स.)। मकर संक्रान्ति पर जब सूर्यदेव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं और पूरा देश इस पर्व को मकर संक्रान्ति, उत्तरायण, बिहू, पोंगल और खिचड़ी जैसे विविध रूपों में उत्साहपूर्वक मनाता है, उसी पावन बेला में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन प्रभाग (एनएमसीएम) ने अपना प्रतिष्ठा दिवस सांस्कृतिक वैभव से परिपूर्ण कार्यक्रम के साथ मनाया। यह आयोजन बुधवार को आईजीएनसीए के समवेत सभागार नई दिल्ली में सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम के मुख्यातिथि रहे केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजेश कुमार सिंह, जबकि विशिष्ट अतिथि रहे केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के उप सचिव डॉ. शाह फैसल। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की और स्वागत भाषण दिया कला निधि प्रभाग के प्रमुख एवं एनएमसीएम के प्रभारी प्रो. (डॉ.) आरसी. गौड़ ने। इस अवसर पर एनएमसीएम के निदेशक डॉ. मयंक शेखर भी उपस्थित रहे।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि मकर संक्रान्ति पर्व पूरे देश में मनाया जाता है। अलग-अलग नाम से मनाया जाता है। कहीं बिहू होता है, कहीं पोंगल होता है, कहीं संक्रांति होता है, कहीं उत्तरायण होता है। यह पर्व अलग-अलग तरह से मनाया जाता है, उसके बावजूद एक ही समय पर पूरा देश इस पर्व को मनाता है। इस त्योहार को मनाने की परंपरा अलग अलग प्रदेशों में, अलग अलग क्षेत्रों में कैसी है? वहां खानपान कैसा है, वहां वेशभूषा कैसी है? वहां कौन कौन से रिचुअल्स हैं? कौन कौन सी परम्पराएं हैं, इन सबका भी एक डॉक्यूमेंटेशन हो सकता है। उन्होंने नेशनल मिशन फॉर कल्चरल मैपिंग प्रभाग से आग्रह किया कि जब अगले साल अपना वार्षिक उत्सव मनाएं तो संक्रान्ति पर एक पब्लिकेशन लेकर आएं कि पूरे भारत में मकर संक्रांति का पर्व अलग-अलग जगह पर कैसे मनाया जाता है।

उन्होंने एनएमसीएम की चुनौतियों और उपलब्धियों के बारे में बताया कि जब शुरू में यह काम हमको दिया गया था, तो अपने आप में यह बहुत बड़ी चुनौती थी। 6 लाख 50 हजार गांवों का डॉक्यूमेंटेशन करना कोई बहुत आसान बात नहीं होती, लेकिन जिस तरह से एनएमसीएम ने काम शुरू किया, यहां के सब लोगों ने मेहनत की, अलग-अलग एजेंसियों का सहयोग मिला है, उसके परिणास्वरूप आज हम 6 लाख 23 हजार गांवों का डॉक्यूमेंटेशन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के बीच आज हमें गांव बहुत याद आते हैं, जहां पर आज भी हमारी परम्परा, हमारी सांस्कृतिक थाती कहीं न कहीं मौजूद है। अगर हम उन गांव को बचाकर रखते हैं, तो निश्चित तौर पर ऐसे समय में एक बहुत बड़ा सांस्कृतिक जागरण करते हैं।

मुख्यातिथि राजेश सिंह ने कहा कि गांवों की जो कल्चरल मैपिंग हो रही है, वह सरकार की बहुत महत्त्वाकांक्षी परियोजना है और यह बहुत आवश्यक भी है। उन्होंने कहा, जो व्यक्ति गांव को देखना चाहता है, अपनी धरोहर को समझना चाहता है, उसको अगर एक ही जगह प्रामाणिक सूचना मिल जाए, तो उसके लिए इससे बड़ी सुविधा कुछ और नहीं हो सकती। जब हम अपनी विरासत के बारे में जानेंगे, तभी उस पर चर्चा कर पाएंगे और गर्व कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि पंचायतों के लिए संविधान में 29 कार्य निर्दिष्ट हैं और सांस्कृतिक कार्यकलाप भी उनमें एक है। उस पर किसी का ध्यान नहीं गया था। इसी को ध्यान में रखते हुए पंचायती राज मंत्रालय ने ‘पंचायत धरोहर’ का कार्यक्रम शुरू किया।

विशिष्ट अतिथि शाह फैसल ने इस बात पर जो दिया कि भारतीय संस्कृति का मूल स्वरूप लिखित संहिताओं (कोडिफिकेशन) से नहीं, बल्कि श्रुति-स्मृति परम्परा और मौखिक इतिहास के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ता रहा है। ऐसे में जब इस जीवंत संस्कृति का दस्तावेज़ीकरण किया जाता है, तो उसके साथ कई चुनौतियां भी जुड़ जाती हैं। अन्य सभ्यताओं, जैसे कुछ मध्य-पूर्वी या यूरोपीय संस्कृतियों में लिखित ग्रंथों को सर्वोच्च महत्व मिला है, जिससे वहां परिवर्तन की संभावनाएं सीमित हो गईं। इसके विपरीत, भारतीय संस्कृति लचीली और निरंतर विकसित होने वाली रही है।

अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रो. रमेश गौड़ ने कहा कि भारत त्योहारों का देश है। सूर्य के उत्तरायण होने पर देश में मकर संक्रान्ति, बिहू, पोंगल मनाए जाते हैं। एनएमसीए की शुरुआत भी मकर संक्रान्ति के दिन 2021 में हुई। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने नोडल एजेंसी के रूप में आईजीएनसीए को एनएमसीएम की जिम्मेदारी दी। वहीं डॉ. मयंक शेखर ने विभाग की वार्षिक रिपोर्ट पेश की और उपलब्धियों के बारे में बताया। उन्होंने ‘मेरा गांव मेरी धरोहर’ पोर्टल के बारे में भी कई महत्त्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।

कार्यक्रम की शुरुआत दक्षिण भारतीय पारम्परिक वाद्य-संगीत ‘पंचवाद्यम’ की सशक्त प्रस्तुति से हुई, जिसने वातावरण को मंगलमय बना दिया। इसी क्रम में एनएमसीएम के ब्रोशर और अर्धवार्षिक प्रकाशन ‘माटी’ के द्वितीय अंक का विमोचन भी किया गया, जिसे सांस्कृतिक शोध और जन-संपर्क की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के अंतर्गत नागा जनजाति ‘आओ’ द्वारा पारम्परिक नृत्य-संगीत की मनोहारी प्रस्तुति ने दर्शकों को पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। इसके बाद प्रज्ञा आर्ट्स की प्रस्तुति तथा नितीश कुमार के सांगीतिक कार्यक्रम ने समारोह को जीवंत बना दिया।

कार्यक्रम के समापन सत्र में रंगोली प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए तथा सभी कलाकारों का सम्मान किया गया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ औपचारिक कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम समाप्ति के पश्चात् सभी अतिथियों एवं आगंतुकों ने मकर संन्क्रान्ति के विशेष भोजन चूड़ा-दही का आनंद भी लिया।

एनएमसीएम का यह प्रतिष्ठा दिवस न केवल मकर संक्रान्ति की सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा रहा, बल्कि भारत की विविध लोक, जनजातीय और शास्त्रीय परम्पराओं को एक मंच पर लाकर राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता का सशक्त संदेश भी देता हुआ सम्पन्न हुआ।

मोदी सरकार के लिए सैनिक बोझ नहीं, राष्ट्र की अनमोल पूंजी : शेखावत

0

जोधपुर, 14 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि राष्ट्र केवल सीमाओं या संविधान से नहीं, बल्कि उस राष्ट्रीय चेतना से बनता है, जिसे एक सैनिक अपने हृदय में धारण करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार के लिए सैनिक बोझ नहीं, बल्कि राष्ट्र की अनमोल पूंजी हैं।

जोधपुर सब-एरिया द्वारा आयोजित पूर्व सैनिक दिवस समारोह में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने गौरव सेनानियों और वीर नारियों के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। अपने संबोधन में शेखावत ने जोधपुर और पश्चिमी राजस्थान की वीरता का स्मरण करते हुए कहा कि यह धरती केवल रेतीले धोरों का विस्तार नहीं है, बल्कि यह राव चंद्रसेन और वीर दुर्गादास राठौड़ जैसे योद्धाओं की तपस्थली है। उन्होंने परमवीर चक्र विजेता मेजर शैतान सिंह और गंगाराम चौधरी जैसे सपूतों का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां के कण-कण में वीरता रची-बसी है।

शेखावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आए सामरिक बदलावों पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि आज सीमा पर खड़ा जवान निर्णय लेने के लिए दिल्ली के आदेश का इंतजार नहीं करता। यह नया भारत है जो घर में घुसकर जवाब देना जानता है। भारत अब दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस एक्सपोर्टर्स की सूची में शामिल हो गया है। तेजस लड़ाकू विमान और आधुनिक मिसाइलें आज भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं। उन्होंने ऑपरेशन मेघदूत के बलिदानियों को याद करते हुए कहा कि एक समय था, जब हमारे पास अनुकूल कपड़े और जूते तक नहीं थे, लेकिन आज भारत का सैनिक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गैजेट्स और बुलेटप्रूफ जैकेट से लैस है।

केंद्रीय मंत्री शेखावत ने ‘वन रैंक वन पेंशन’ को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों में जो मुद्दा दशकों तक अटका रहा, उसे मोदी सरकार ने प्राथमिकता से हल किया। अब तक 70,000 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। यह केवल पैसा नहीं, बल्कि उन सैनिकों के स्वाभिमान का सम्मान है, जिन्होंने अपनी जवानी देश के नाम कर दी। शेखावत ने पूर्व सैनिकों को ‘नेचुरल लीडर’ बताते हुए उन्हें भविष्य की जिम्मेदारियों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि समाज में गिरते नैतिक मूल्यों और नशे की कुरीतियों के विरुद्ध पूर्व सैनिकों को अपनी अनुशासित छवि के साथ आगे आना चाहिए। ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में, पूर्व सैनिकों का युद्धकालीन अनुभव प्राकृतिक आपदाओं के समय समाज की रक्षा करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

उन्होंने आग्रह किया कि जल शक्ति और नरेगा जैसे अभियानों में सैनिक अपने संगठनात्मक कौशल का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों को दें। शेखावत ने उपस्थित वीर माताओं और वीर नारियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि उनके परिवार के सर्वोच्च बलिदान के कारण ही आज देश सुरक्षित है और विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। जीओसी जोसा द्वारा स्वागत भाषण दिया गया। जोधपुर संभागीय आयुक्त श्रीमती प्रतिभा सिंह, वरिष्ठ वेटरन मेजर जनरल शेर सिंह, सेवानिवृत्त विचार व्यक्त किए।

नेतृत्व संकट के बीच नेपाली कांग्रेस में टूट,गगन थापा बने अलग गुट के अध्यक्ष

0

काठमांडू, 14 जनवरी (हि.स.)। नेतृत्व परिवर्तन और संगठनात्मक सुधार को लेकर लंबे समय से जारी खींचतान के बाद नेपाल की प्रमुख राजनीतिक पार्टी नेपाली कांग्रेस आखिरकार विभाजन के दौर में पहुंच गई है। पार्टी अध्यक्ष शेरबहादुर देउवा के नेतृत्व वाले गुट ने महामंत्री गगन थापा, विश्वप्रकाश शर्मा और सह-महामंत्री फरमुल्लाह मंसूर के खिलाफ पांच वर्षों के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा कर दी है।

इसी बीच, देउवा नेतृत्व के विरोध में आयोजित विशेष महाधिवेशन ने गगन थापा को पार्टी अध्यक्ष के रूप में चुन लिया है। हालांकि, इस निर्णय की औपचारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन इससे कांग्रेस के भीतर गहराते मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

विशेष महाधिवेशन के समर्थक नेताओं का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में देउवा के नेतृत्व में पार्टी को चुनावी मैदान में ले जाना संभव नहीं है। वे लंबे समय से नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे थे, लेकिन पार्टी अध्यक्ष के पद छोड़ने से लगातार इनकार के चलते अंततः संगठन दो हिस्सों में बंट गया।

पार्टी के भीतर सुधार की मांग करने वाले और यथास्थिति बनाए रखने के पक्षधर गुटों के बीच चला आ रहा संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। कांग्रेस की केंद्रीय समिति ने गगन थापा सहित अन्य नेताओं पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की है।

अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा के बाद गगन थापा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि नेपाली कांग्रेस किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, “यह वह पार्टी है जिसने देश के राजनीतिक इतिहास को दिशा दी है और बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया है।”

देउवा पक्ष का तर्क रहा है कि चुनाव की तैयारी के बीच विशेष महाधिवेशन कराना व्यावहारिक नहीं है। इसी आधार पर केंद्रीय कार्यसमिति ने नियमित महाधिवेशन के लिए बैशाख के अंतिम सप्ताह की तिथि भी तय कर दी थी।

हालांकि, पार्टी के 54 प्रतिशत महाधिवेशन प्रतिनिधि पहले ही विशेष महाधिवेशन की मांग कर चुके थे, जिससे विवाद और गहरा गया।

नियमित महाधिवेशन की तारीख घोषित होने के बाद संस्थापन पक्ष ने विशेष महाधिवेशन को असंभव बताते हुए अपना रुख और सख्त कर लिया। वहीं, विशेष महाधिवेशन समर्थकों का कहना था कि पार्टी के विधान में इस तरह के अधिवेशन का स्पष्ट प्रावधान है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

विशेष महाधिवेशन के पक्षधर नेताओं ने पुस 28 तक महाधिवेशन बुलाने की मांग को लेकर दिए गए आवेदन की समयसीमा समाप्त होने के बाद किसी भी परिस्थिति में अधिवेशन कराने का निर्णय लिया और उसी अनुरूप प्रक्रिया आगे बढ़ाई।

महाधिवेशन के दौरान पार्टी को टूट से बचाने के लिए कई दौर की बातचीत भी हुई। दोनों गुटों ने वार्ता समितियां गठित कर संदेशों का आदान-प्रदान किया, लेकिन कोई भी पक्ष अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ। अंततः यह राजनीतिक टकराव पार्टी विभाजन में तब्दील हो गया।

——————-

किड्स प्रीमियर क्रिकेट लीग-2026 : 108 रन से जीती द आर्यन्स बैशर्स

0

मुरादाबाद, 14 जनवरी (हि.स.)। किड्स प्रीमियर क्रिकेट लीग-2026 में बुधवार को द आर्यंस बेसर्स व सीएसएस रायलस के बीच मैच संपन्न हुआ। जिसमें द आर्यन्स बैशर्स ने 108 रन से जीत हासिल की। 7 बॉल में 12 रन बनाकर 3 विकेट लेने वाले द आर्यंस बेसर्स के आदि लिट को मैन ऑफ द मैच चुना गया।

सीएसएस रायलस ने टॉस जीत कर पहले बोलिंग चुनी। आर्यन्स बैशर्स ने पहले बैटिंग करते हुए 29.2 ओवर में 10 विकेट के नुकसान पर 238 रन बनाए। जिसमें उजैर अहमद ने 45 बॉल में 64 रन और मोहम्मद शरीक ने 34 बॉल पर 51 रन की पारी खेली। सीएसएस रायलस की ओर से गेंदबाजी करते हुए पुरुषार्थ, शुएब, कामरान ने 2-2 विकेट लिए।

सीएसएस रायलस ने बल्लेबाजी करते हुए 22.4 ओवर में 10 विकेट के नुकसान पर 131 रन ही बना सकी। जिसमें सक्षम ने 33 बॉल में 31 रन व हसन ने 19 बॉल पर 21 रन की पारी खेली। द आर्यन्स बेशर्स की ओर से बोलिंग करते हुए आदि लिट ने 3 विकेट ब अदनान, आदित्य, राजदीप ने 2-2 विकेट लिए। 7 बॉल में 12 रन बनाकर 3 विकेट लेने वाले सीएसएस रायलस के आदि लिट को मैन ऑफ द मैच चुना गया।

इस अवसर पर एनपीएस के प्रधानाचार्य शक़ील, मिर्जा दानिश आलम, प्रियांशु जोशी, रोहित, शरीफ शेख, सलीम, शांतनु दीक्षित, रोहित सूरी, ऋषिका, प्रतीक्षा आदि मौजूद रहीं।